दीपक प्रकाश: RLM से बिहार के मंत्री, MLA न होते हुए भी बने कैबिनेट का हिस्सा

उपेंद्र कुशवाहा के सबसे करीबी राष्ट्रीय प्रधान महासचिव ने ली शपथ; 6 महीने में विधानमंडल का सदस्य बनना अनिवार्य।

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  • दीपक प्रकाश ने आज राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) कोटे से बिहार मंत्रिमंडल में मंत्री पद की शपथ ली।
  • वह RLM के राष्ट्रीय प्रधान महासचिव हैं, लेकिन वर्तमान में विधायक या विधान पार्षद नहीं हैं।
  • उनका चयन उपेंद्र कुशवाहा की राजनीतिक पकड़ को मजबूत करता है और कुशवाहा समुदाय को प्रतिनिधित्व देता है।

समग्र समाचार सेवा
पटना, 20 नवंबर: बिहार की नई एनडीए सरकार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में आज 27 मंत्रियों ने शपथ ली। इस मंत्रिमंडल में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के अलावा सहयोगी दल लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास), हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) और राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) को भी जगह मिली है। उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी RLM से एकमात्र मंत्री के रूप में दीपक प्रकाश ने शपथ ली है।

दीपक प्रकाश का मंत्री बनना कई मायनों में राजनीतिक रूप से बेहद दिलचस्प है क्योंकि वह वर्तमान में विधायक या विधान पार्षद (MLC) नहीं हैं। उनका यह चयन बिहार की राजनीति में गठबंधन के भीतर विश्वास और रणनीतिक दांव को दर्शाता है। दीपक प्रकाश राष्ट्रीय लोक मोर्चा के राष्ट्रीय प्रधान महासचिव हैं और पार्टी के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के सबसे भरोसेमंद और करीबी माने जाते हैं।

संगठन से सीधे कैबिनेट तक का सफर

दीपक प्रकाश का राजनीतिक करियर संगठन के प्रति उनकी मजबूत प्रतिबद्धता से जुड़ा रहा है। वह उपेंद्र कुशवाहा के साथ लंबे समय से जुड़े हुए हैं और उनके हर राजनीतिक उतार-चढ़ाव में उनकी परछाईं बनकर रहे हैं। RLM के गठन के बाद से ही वह पार्टी के भीतर एक प्रमुख संगठनात्मक भूमिका निभा रहे हैं।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा थी कि मंत्री पद के लिए उपेंद्र कुशवाहा की पत्नी और विधायक स्नेहलता कुशवाहा को मौका मिल सकता है, लेकिन कुशवाहा ने संगठन के एक महत्वपूर्ण स्तंभ दीपक प्रकाश पर भरोसा जताया। उनका यह कदम यह दर्शाता है कि RLM नेतृत्व ने पार्टी के मूल कैडर और संगठनात्मक शक्ति को कैबिनेट में प्रतिनिधित्व देना अधिक महत्वपूर्ण समझा।

सियासी समीकरण और कुशवाहा वोट बैंक

दीपक प्रकाश का मंत्रिमंडल में शामिल होना सिर्फ एक व्यक्ति की पदोन्नति नहीं है, बल्कि यह एनडीए की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत बिहार में कुशवाहा (कोइरी) समुदाय को सशक्त प्रतिनिधित्व दिया गया है। कुशवाहा समुदाय राज्य में एक महत्वपूर्ण वोट बैंक है और उपेंद्र कुशवाहा को उसका सबसे बड़ा चेहरा माना जाता है। दीपक प्रकाश को मंत्री बनाकर एनडीए ने इस प्रमुख पिछड़ा वर्ग को साधने और उन्हें सरकार की नीतियों में शामिल करने का स्पष्ट संदेश दिया है।

RLM को एक मंत्री पद मिलना उपेंद्र कुशवाहा की नेतृत्व क्षमता और गठबंधन के भीतर उनकी मोलभाव करने की शक्ति को भी प्रमाणित करता है। यह दिखाता है कि बीजेपी और जदयू दोनों ही कुशवाहा के राजनीतिक महत्व को स्वीकार करते हैं।

छह महीने में सदस्यता की चुनौती

चूंकि दीपक प्रकाश वर्तमान में बिहार विधानमंडल के किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं, इसलिए मंत्री पद पर बने रहने के लिए उन्हें छह महीने के भीतर विधायक या विधान पार्षद बनना अनिवार्य होगा।

इस चुनौती को देखते हुए, यह संभावना है कि दीपक प्रकाश को जल्द ही राज्यपाल कोटे से विधान परिषद में मनोनीत किया जा सकता है, या फिर छह महीने के भीतर किसी विधानसभा सीट पर उपचुनाव हो सकता है। फिलहाल, उनका मुख्य ध्यान पार्टी के संगठनात्मक कार्य और अब नए मंत्रालय की जिम्मेदारी पर होगा। उनकी यह नियुक्ति यह भी स्पष्ट करती है कि बिहार में अब छोटे सहयोगी दलों को भी उनके आधार और चुनाव प्रदर्शन के आधार पर सम्मानजनक स्थान दिया जा रहा है।

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