पूनम शर्मा
बलूचिस्तान में इस वक्त जो मंजर है, उसे सिर्फ एक ‘आंदोलन’ कहना गलत होगा। यह एक पूर्ण युद्ध जैसी स्थिति है। बलोच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने ‘ऑपरेशन हीरो फेज़ 2’ के जरिए पाकिस्तानी सेना की नींव हिला दी है। जो खबरें छन कर बाहर आ रही हैं, वे पाकिस्तान की संप्रभुता पर एक बड़ा सवालिया निशान लगाती हैं।
खनिज संपदा की लूट और आजादी की तड़प
बलूचिस्तान की इस लड़ाई के केंद्र में वहां की बेशकीमती खनिज संपदा है। बलोच लोगों का आरोप है कि पाकिस्तान पिछले 70 सालों से उनके सोने, तांबे और गैस को लूट रहा है, जबकि बदले में वहां के युवाओं को सिर्फ ‘एनफोर्स्ड डिसएपिएरेंस’ (जबरन गुमशुदगी) और गोलियां मिली हैं। बीएलए का साफ कहना है कि उनका और पाकिस्तान का कोई मेल नहीं है—न संस्कृति, न सोच। सिर्फ मुस्लिम होना एक देश में रहने का आधार नहीं हो सकता।
सोशल मीडिया और अपुष्ट सूत्रों के अनुसार, पिछले कुछ दिनों में बीएलए ने पाकिस्तानी सेना को खोज-खोज कर निशाना बनाया है। अनौपचारिक आंकड़े बताते हैं कि 1000 से 1500 पाकिस्तानी सैनिक मारे जा चुके हैं और सैकड़ों को बंदी बना लिया गया है। क्वेटा, ग्वादर, पंजगुर और मस्तुंग जैसे इलाकों में पाकिस्तानी सेना के कैंपों और सरकारी दफ्तरों पर बीएलए का कब्जा बताया जा रहा है। पाकिस्तान ने सूचनाओं पर पूरी तरह पाबंदी (ब्लैकआउट) लगा दी है ताकि दुनिया को उसकी कमजोरी का पता न चले।
वैश्विक शक्तियों का स्वार्थ और बलोच विद्रोह
बलूचिस्तान आज एक ग्लोबल अखाड़ा बन चुका है। चीन के लिए यह उसका ‘CPEC’ का रास्ता है, तो अमेरिका के डोनाल्ड ट्रंप के लिए यह ‘क्रिटिकल मिनरल्स’ का खजाना है। हाल ही में पाकिस्तान और अमेरिका के बीच जो खनिजों को लेकर डील हुई है, बलोच लड़ाकों ने उसे पूरी तरह नकार दिया है। उनका कहना है कि ट्रंप का सपना तब तक पूरा नहीं होगा जब तक बलूचिस्तान के लोगों को उनका हक नहीं मिलता।
पाकिस्तानी एयरफोर्स जिस तरह से अपने ही लोगों पर बमबारी कर रही है, उसने मानवाधिकारों की धज्जियां उड़ा दी हैं। बीएलए ने अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय और विशेष रूप से भारत से मदद की गुहार लगाई है।
भारत के सामने बड़ी चुनौती
हर बार की तरह, पाकिस्तान ने अपनी नाकामी का ठीकरा भारत पर फोड़ दिया है। गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने भारत पर बीएलए को समर्थन देने का आरोप लगाया है। हालांकि, भारत के विदेश मंत्रालय ने इसे सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि यह पाकिस्तान का आंतरिक मामला है और उन्हें अपने लोगों से बात करके इसे सुलझाना चाहिए।
लेकिन सवाल यह है कि क्या भारत को अपनी रणनीति बदलनी चाहिए? बीएलए के प्रवक्ता कह रहे हैं कि अगर उन्हें ‘एयर पावर’ (वायु सेना) का साथ मिल जाए, तो वे पाकिस्तान को उखाड़ फेंकेंगे। क्या भारत को अपने राफेल या सुखोई के जरिए बलूचिस्तान में हो रहे मानवाधिकार हनन को रोकना चाहिए? यह एक ऐसा फैसला है जो दक्षिण एशिया का भूगोल बदल सकता है।
निष्कर्ष: अब पीछे हटना नामुमकिन है
बलूचिस्तान में लगी यह आग अब बुझने वाली नहीं है। वहां के लोगों ने तय कर लिया है कि वे अब पाकिस्तान के साथ नहीं रहेंगे। अगर अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने अब भी चुप्पी साधे रखी, तो यह एक बड़े मानवीय संकट का रूप ले लेगा। पाकिस्तान की सेना आज जिस तरह लाचार दिख रही है, उससे साफ है कि दमन की राजनीति अब और ज्यादा दिन नहीं चलेगी।