नीट-पीजी 2025: क्वालिफाइंग पर्सेंटाइल में संशोधन
18 हज़ार से अधिक खाली पीजी सीटों को भरने की दिशा में बड़ा फैसला
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राउंड-2 काउंसलिंग के बाद बड़ी संख्या में पीजी सीटें खाली
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क्वालिफाइंग पर्सेंटाइल में संशोधन से अधिक उम्मीदवार होंगे पात्र
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शैक्षणिक गुणवत्ता से समझौते से किया गया इनकार
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इंडियन मेडिकल एसोसिएशन IMA ने प्रधानमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री का जताया आभार
समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली | 14 जनवरी: नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशंस इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) ने नीट-पीजी 2025 के लिए क्वालिफाइंग पर्सेंटाइल में संशोधन किया है। यह निर्णय राउंड-2 काउंसलिंग के बाद देशभर में 18 हज़ार से अधिक खाली पड़ी पोस्टग्रेजुएट मेडिकल सीटों को भरने के उद्देश्य से लिया गया है।
खाली पीजी सीटों को भरने पर केंद्रित फैसला
नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशंस इन मेडिकल साइंसेज NBEMS के अनुसार, पर्सेंटाइल में यह बदलाव इसलिए किया गया है ताकि बड़ी संख्या में खाली रह गई पीजी मेडिकल सीटों पर योग्य एमबीबीएस डॉक्टरों को अवसर मिल सके। इससे मेडिकल शिक्षा प्रणाली को मजबूती मिलने के साथ-साथ विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता भी बढ़ेगी।
शैक्षणिक मानकों से समझौता नहीं
बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि क्वालिफाइंग पर्सेंटाइल में संशोधन के बावजूद शैक्षणिक गुणवत्ता और मानकों से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया गया है। यह कदम केवल पात्रता के दायरे का विस्तार करने के लिए उठाया गया है, जिससे योग्य उम्मीदवारों को बाहर न रहना पड़े।
अधिकृत काउंसलिंग से ही होगा प्रवेश
नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशंस इन मेडिकल साइंसेज NBEMS ने यह भी दोहराया है कि प्रवेश प्रक्रिया पूरी तरह से अधिकृत काउंसलिंग के माध्यम से ही होगी। सीटों का आवंटन इंटर-से मेरिट और उम्मीदवारों की प्राथमिकताओं के आधार पर किया जाएगा, जिससे प्रक्रिया पारदर्शी और मेरिट आधारित बनी रहे।
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने जताया आभार
इस विषय पर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने पहले औपचारिक अनुरोध किया था। संगठन ने इस समयोचित निर्णय के लिए नरेंद्र मोदी और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा के प्रति आभार व्यक्त किया है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन का कहना है कि यह फैसला देश की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को सशक्त बनाएगा।
चिकित्सा मानव संसाधन को मिलेगी मजबूती
नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशंस इन मेडिकल साइंसेज का यह निर्णय चिकित्सा क्षेत्र में मानव संसाधन को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। इससे न केवल पीजी सीटों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा, बल्कि आने वाले वर्षों में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में भी सुधार देखने को मिलेगा।