इंदौर में पानी नहीं, जहर बंटाः राहुल गांधी
दूषित पानी से मौतों का आरोप, प्रशासन पर लापरवाही का ठीकरा
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दूषित पानी से मौतों का आरोप, प्रशासन पर लापरवाही का ठीकरा
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‘साफ पानी एहसान नहीं, जीवन का अधिकार है’
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भाजपा के ‘डबल इंजन’ शासन को ठहराया जिम्मेदार
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मंत्री के ‘फोकट सवाल’ बयान पर भी घेरा
समग्र समाचार सेवा
इंदौर। 02 जनवरी: देश के सबसे साफ शहर के दावे वाले इंदौर में दूषित जल आपूर्ति से फैले बीमारी के मामले ने राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है। उल्टी-दस्त के प्रकोप में कई लोगों की मौत के दावों के बीच कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने राज्य सरकार और प्रशासन पर तीखा हमला बोला है। राहुल गांधी ने कहा कि यह कोई “फोकट सवाल” नहीं, बल्कि जवाबदेही की मांग है।
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा कि इंदौर में पानी नहीं, ज़हर बांटा गया और प्रशासन कुंभकर्णी नींद में रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि गरीब परिवारों के घरों में मातम पसरा है, लेकिन सरकार संवेदनशीलता दिखाने के बजाय अहंकारी बयान दे रही है। राहुल गांधी ने सवाल किया कि जब लोगों ने बार-बार बदबूदार और गंदे पानी की शिकायत की, तो समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
सीवर कैसे मिला, आपूर्ति क्यों नहीं रोकी गई?
राहुल गांधी ने सीधे सवाल उठाते हुए कहा कि सीवर का पानी पीने की सप्लाई में कैसे मिला, समय पर जल आपूर्ति बंद क्यों नहीं की गई और जिम्मेदार अधिकारियों व नेताओं पर कार्रवाई कब होगी। उन्होंने कहा कि साफ पानी कोई उपकार नहीं, बल्कि नागरिकों का जीवन का अधिकार है, और इस अधिकार की “हत्या” के लिए भाजपा का डबल इंजन शासन जिम्मेदार है।
‘एमपी कुप्रशासन का केंद्र बन चुका’
राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश को कुप्रशासन का केंद्र बताते हुए कहा कि कहीं खांसी की सिरप से मौतें, कहीं सरकारी अस्पतालों में लापरवाही, और अब सीवर मिला पानी पीने से जान जाने के आरोप सामने आ रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जब-जब गरीब मरते हैं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चुप रहते हैं।
‘फोकट सवाल’ बयान पर विवाद
यह विवाद उस बयान के बाद और गहरा गया, जब एनडीटीवी के सवाल पर कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने “फोकट का सवाल” कह दिया था। बाद में विवाद बढ़ने पर उन्होंने माफी मांग ली, लेकिन विपक्ष इसे संवेदनहीनता का उदाहरण बता रहा है।
मौतों के आंकड़े पर विरोधाभास
इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी से फैले प्रकोप में 10 लोगों की मौत की जानकारी मिली है। वहीं स्थानीय नागरिकों का दावा है कि छह माह के बच्चे सहित 14 लोगों की जान गई है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग ने अभी मौतों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।