करारी हार के बाद बढ़ी तकरार: क्या अलग होंगी RJD–कांग्रेस की राहें?

बिहार चुनाव 2025 के नतीजों के बाद महागठबंधन में अविश्वास गहराया, कांग्रेस में ‘एकला चलो’ की मांग तेज़, RJD ने कहा, वोट हमारी वजह से मिले।

  • कांग्रेस की दिल्ली समीक्षा बैठक में उठे “एकला चलो” के सुर
  • RJD का पलटवार, कांग्रेस को मिला वोट हमारा जनाधार
  • चुनाव में महागठबंधन के सभी दलों का बेहद खराब प्रदर्शन
  • बीजेपी का तंज, देशभर में कांग्रेस पर बड़ा संकट मंडरा रहा है

समग्र समाचार सेवा
पटना,30 नवंबर:बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में महागठबंधन की करारी हार के बाद अब उसके भीतर तनातनी साफ दिखाई देने लगी है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और कांग्रेस के नेताओं के बीच बयानबाज़ी तेज़ हो गई है। कांग्रेस में “एकला चलो” की आवाज़ तेज़ हो रही है, वहीं RJD ने इसे लेकर तीखा पलटवार किया है।

कांग्रेस की समीक्षा बैठक में उठा ‘एकला चलो’ का सुर

दिल्ली में कांग्रेस की समीक्षा बैठक में कई नेताओं ने माना कि महागठबंधन के अंदर दोस्ताना संघर्ष ने पार्टी को नुकसान पहुंचाया। नेताओं का कहना था कि अब कांग्रेस को “एकला चलो” की नीति अपनानी चाहिए और संगठन को मजबूत करने पर जोर देना चाहिए।

RJD का पलटवार—वोट हमारी वजह से मिले

कांग्रेस के सुरों पर RJD ने तंज कसा।
RJD के प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल ने कहा कि कांग्रेस को मिली जीत और उसका वोट प्रतिशत RJD के जनाधार की वजह से ही संभव हुआ।
उन्होंने कहा कि बिहार में जनाधार RJD का है और कांग्रेस भी यह बात जानती है। साथ ही, उन्होंने कहा कि कोई पार्टी अकेले चलना चाहे तो रोकना मुश्किल है, लेकिन संगठन मजबूत करना किसी भी दल के लिए अच्छा है।

महागठबंधन का प्रदर्शन बेहद खराब

बिहार चुनाव 2025 में

  • RJD ने 143 सीटों पर लड़कर सिर्फ 25 सीटें जीतीं
  • कांग्रेस मात्र 6 सीटों तक सिमट गई
  • वीआईपी (मुकेश सहनी) का खाता भी नहीं खुला

इस खराब प्रदर्शन के बाद RJD पटना में प्रमंडल-स्तर की समीक्षा कर रही है, जबकि कांग्रेस दिल्ली में आत्ममंथन कर रही है।

बीजेपी का तंज—कांग्रेस पर बड़ा संकट

बीजेपी सांसद राजीव प्रताप रूडी ने कहा कि बिहार के बाद देशभर में भी कांग्रेस के लिए संकट खड़ा हो सकता है।
उन्होंने कहा कि किसी पार्टी का टूटना भाजपा की उत्सुकता का विषय नहीं, लेकिन अगर टूटन होती है तो वह कांग्रेस की कमजोरी को उजागर करती है।

महागठबंधन में बढ़ती नाराज़गी और आरोप-प्रत्यारोप के बीच 2025 की हार ने दोनों दलों के बीच अविश्वास और दूरी को और बढ़ा दिया है।

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