गुरु तेग बहादुर जी शहादत के 350 वर्ष: दिल्ली में भव्य “शहीदी समागम” आयोजन
हिंद की चादर साहिब श्री गुरु तेग बहादुर जी महाराज की शहीदी के 350वें वर्ष को समर्पित समागम का आयोजन
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“साहिब श्री गुरु तेग बहादुर जी शहीदी 350वाँ साल आयोजन समिति” द्वारा विज्ञान भवन में आयोजन
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डॉ. चरन सिंह, डॉ. कृष्ण गोपाल, प्रो. जगबीर सिंह ने दिए महत्वपूर्ण संबोधन
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असहिष्णु विचारधारा के विरुद्ध संघर्ष और भारतीय परंपरा के सह–अस्तित्व संदेश पर चर्चा
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सर्व समाज की सहभागिता, गुरु तेग बहादुर जी को सामूहिक श्रद्धांजलि
समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 27 नवंबर:नौवीं पातशाही साहिब श्री गुरु तेग बहादुर जी महाराज की शहादत के 350वीं वर्षगांठ के अवसर पर गुरुवार, 27 नवंबर 2025 को दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में “नौवीं पातशाही शहीदी समागम” का आयोजन किया गया। “साहिब श्री गुरु तेग बहादुर जी शहीदी 350वाँ साल आयोजन समिति, दिल्ली” के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में डॉ. चरन सिंह (पूर्व अध्यक्ष, पंजाब एंड सिंध बैंक) मुख्य अतिथि तथा डॉ. कृष्ण गोपाल (सह सरकार्यवाह, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) मुख्य वक्ता तथा प्रो. जगबीर सिंह विशिष्ट वक्ता थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता आयोजन समिति के अध्यक्ष जस्टिस तलवंत सिंह (सेवानिवृत्त), दिल्ली उच्च न्यायालय ने की।

इस समागम को सम्बोधित करते हुए मुख्य अतिथि डॉ. चरन सिंह ने कहा कि श्री गुरु तेग बहादुर साहब ने अपने बलिदान से समूचे संसार को संदेश दिया है कि आध्यात्मिकता को भौतिकता का मार्गदर्शक होना चाहिए। उन्होंने मानवीय मूल्यों की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व समर्पित कर देने का संदेश दिया है। डॉ. चरन सिंह ने कहा कि श्री गुरु तेग बहादुर जी के बलिदान दिवस पर अयोध्या में श्री राम मंदिर का ध्वजारोहण होना हम सब की अटूट एकात्मता एवं धर्म की विजय का प्रतीक है।

इस अवसर पर मुख्य वक्ता डॉ. कृष्ण गोपाल ने कहा कि श्री गुरु तेग बहादुर जी की शहादत की पृष्ठभूमि को समझने की जरूरत है। यह संघर्ष किसी भी सभ्यता के साथ समन्वय न करने वाली आक्रमणकारी विचारधारा के साथ भारतीय परंपरा के विचार का था। भारतीय विचार मानता है की हजारों मत एक साथ मिलकर रह सकते हैं। आक्रमणकारी यहां के लोगों को मतांतरित करने के उद्देश्य से आए थे। श्री गुरु नानक देव जी ने बाबर की सेना को पापियों की बारात और उसे कसाई राजा बताया। 1669 मे औरंगजेब ने मंदिरों गुरुकुलों को ध्वस्त करने और हिंदुओं पर जजिया कर लगाने का आदेश जारी किया तब श्री गुरु तेग बहादुर जी ने इसके विरुद्ध समाज के जागरण हेतु आत्मोत्सर्ग का निर्णय किया। यहां बात औरंगजेब की नहीं बल्कि असहिष्णुता के विरुद्ध संघर्ष की है जिसकी सीख श्री गुरु परंपरा ने दी है।
डॉ. कृष्ण गोपाल ने कहा कि गुरुओं की सीख है कि समाज को सभी प्रकार के भय से मुक्त होना चाहिये चाहे वह मृत्यु का ही भय हो और अत्याचार के विरूद्ध मिलकर संघर्ष करना चाहिए। डॉ कृष्ण गोपाल ने कहा की विचारधारा की वह लड़ाई आज भी जारी है जिसमें एक वर्ग किसी भी कीमत पर अपनी बात मनवाने पर अड़ा हुआ है, जबकि दूसरा वर्ग सब को साथ लेकर चलने की बात करता है। दुर्भाग्य की बात है कि औरंगजेब को महान मानने की विचारधारा इस देश में आज भी मौजूद है और उसकी महानता का गुणगान करने वाले बड़े-बड़े लोग हैं जिन्हें यह समझना चाहिए कि इतिहास को छिपाने से कुछ नहीं होगा। यही वह असहिष्णु विचारधारा है, जिसके विरुद्ध श्री गुरु तेग बहादुर जी ने अपनी शहादत दी थी। इसी असहिष्णु विचारधारा ने देश का बंटवारा कर दिया।

समागम को संबोधित करते हुए प्रोफेसर जगबीर सिंह ने कहा कि आज भी श्री गुरु तेग बहादुर जी के बलिदान के बारे में जानकारी का अभाव है। उन्होंने कहा कि भारत में जन्मे सभी धर्म परंपराओं से अलग करके सिख धर्म को नहीं देखा जाना चाहिए।
आयोजन समिति के अध्यक्ष जस्टिस तलवंत सिंह ने समागम को संबोधित करते हुए कहा कि श्री गुरु तेग बहादुर जी के शहादत का दिन हमारे लिए आत्ममंथन का दिन है कि हम उनकी शहादत के संदेश को जीवन में उतरें। श्री गुरु तेग बहादुर जी के संदेशों की याद दिलाते हुए उन्होंने ऐसे भारत का निर्माण करने का संकल्प लेने की बात कही जहां वसुधैव कुटुंबकम, सर्वधर्म समभाव, वैश्विक शांति और सहिष्णुता सर्वोपरि हो।
इस शहीदी समागम की आयोजन समिति मे दिल्ली के सभी मत, पंथ, समुदायों जैसे कि वाल्मीकि समाज, संत रविदास समाज, बौद्ध समाज, जैन समाज एवं बंजरा समाज आदि की सहभागिता रही। सर्व हिन्दू समाज के लोगों ने इस कार्यक्रम के माध्यम से श्री गुरु तेग बहादुर जी महाराज के बलिदान, मानवता, धर्म रक्षा और सहिष्णुता के मूल्यों को स्मरण करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।