कर्नाटक CM पद विवाद चरम पर, डीकेएस समर्थकों का दबाव बढ़ा

सिद्धारमैया सरकार के 2.5 साल पूरे होते ही 'सीक्रेट डील' पर रार, कांग्रेस आलाकमान को देनी होगी 'दवा'

कृपया इस पोस्ट को साझा करें!
  • सत्ता की समय सीमा: कांग्रेस सरकार का 20 नवंबर को ढाई साल का कार्यकाल पूरा होते ही ‘सत्ता साझा समझौते’ (Power Sharing Agreement) की मांग तेज।
  • दिल्ली में डेरा: डीके शिवकुमार के वफादार 10 से अधिक विधायक सीएम पद के लिए दबाव बनाने दिल्ली पहुंचे।
  • हाईकमान की चुप्पी टूटी: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने माना विवाद, कहा- सोनिया गांधी और राहुल गांधी के साथ मिलकर ‘दवा’ दी जाएगी।

समग्र समाचार सेवा
बेंगलुरु, 27 नवंबर: कर्नाटक में कांग्रेस की सत्ता में आई सरकार ने जैसे ही अपने पांच साल के कार्यकाल का आधा सफर (ढाई साल) पूरा किया है, वैसे ही मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार (DKS) के बीच मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर संघर्ष चरम पर पहुंच गया है। सत्ता के इस संघर्ष ने अब दिल्ली में कांग्रेस आलाकमान के लिए एक बड़ा सिरदर्द पैदा कर दिया है।

क्या है ‘सीक्रेट डील’ का मामला?

मई 2023 में जब विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को बड़ी जीत मिली थी, तब मुख्यमंत्री पद को लेकर सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा थी। सूत्रों के अनुसार, उस समय पार्टी आलाकमान ने दोनों वरिष्ठ नेताओं के बीच ढाई-ढाई साल तक मुख्यमंत्री पद साझा करने का एक अलिखित या गुप्त समझौता (Secret Deal) करवाया था। हालांकि, कांग्रेस ने कभी भी आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं की।

20 नवंबर 2025 को सरकार के ढाई साल पूरे होने के बाद, डीके शिवकुमार के खेमे ने इस समझौते को लागू करने के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया है। डीकेएस ने स्वयं पिछले कुछ दिनों में सार्वजनिक मंचों पर इस “गुप्त समझौते” का उल्लेख किया है, और यहां तक कि सोशल मीडिया पर एक रहस्यमय पोस्ट भी शेयर की, जिसमें लिखा था, “वर्ड पावर इज़ वर्ल्ड पावर (Word power is world power)” यानी अपनी बात पर कायम रहना दुनिया की सबसे बड़ी ताकत है। इसे सिद्धारमैया और आलाकमान के लिए एक स्पष्ट संदेश माना जा रहा है।

डीकेएस समर्थकों का दिल्ली में दबाव

डीके शिवकुमार का समर्थन कर रहे 10 से अधिक विधायक पिछले कुछ दिनों से दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं। इन विधायकों ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और महासचिव केसी वेणुगोपाल से मुलाकात का समय मांगा है। उनका स्पष्ट एजेंडा है: 2023 में हुए समझौते का सम्मान किया जाए और डीके शिवकुमार को तुरंत मुख्यमंत्री बनाया जाए।

एक विधायक ने मीडिया से बात करते हुए दावा किया कि, “200 प्रतिशत, डीके शिवकुमार जल्द ही मुख्यमंत्री बनेंगे। आलाकमान ने जो वादा किया था, उसे पूरा करना होगा।”

सिद्धारमैया का अटल रुख और जी परमेश्वर की एंट्री

दूसरी ओर, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया लगातार यह दोहरा रहे हैं कि वह पूरे पांच साल तक पद पर बने रहेंगे और नेतृत्व परिवर्तन की खबरें मीडिया द्वारा फैलाई गई “गैर-जरूरी बहस” हैं। सिद्धारमैया खेमा भी सक्रिय है और वह आलाकमान को यह समझा रहा है कि चुनावों के बाद सिद्धारमैया ही सबसे बड़े जन नेता के रूप में उभरे थे और राज्य की स्थिरता के लिए उनका कार्यकाल पूरा करना आवश्यक है। हालांकि, सिद्धारमैया ने ही अब हाईकमान से अनुरोध किया है कि इस भ्रम को समाप्त करने के लिए वे जल्द से जल्द कोई फैसला लें।

इस बीच, राज्य के गृहमंत्री जी. परमेश्वर ने भी मुख्यमंत्री बनने की दौड़ में अपनी दावेदारी पेश कर दी है। उन्होंने दलित मुख्यमंत्री की मांग के बीच कहा कि वह हमेशा इस दौड़ में हैं, जिससे कांग्रेस की आंतरिक खींचतान और बढ़ गई है।

अब आलाकमान के पाले में गेंद

मामले को बढ़ते देख कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने आखिरकार सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि पार्टी के भीतर कुछ समस्या है। उन्होंने कहा, “हम जरूरत पड़ने पर दवा देंगे।” खड़गे ने बताया कि वह, सोनिया गांधी और राहुल गांधी जल्द ही मिलकर इस मुद्दे पर विचार करेंगे। सूत्रों के अनुसार, सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार दोनों को 29 या 30 नवंबर को दिल्ली तलब किया जा सकता है ताकि इस विवाद का कोई अंतिम समाधान निकाला जा सके।

कृपया इस पोस्ट को साझा करें!
Leave A Reply

Your email address will not be published.