मणिपुर में फिर से खिलेगा कमल? भाजपा सरकार बनाने की तैयारी में

राष्ट्रपति शासन की समयसीमा खत्म होने से पहले सरकार गठन की कवायद तेज, मैतई नेतृत्व पर भाजपा का फोकस

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समग्र समाचार सेवा
इम्फाल/  मणिपुर 2 फरवरी  : मणिपुर की राजनीति में एक बड़ा मोड़ आने के संकेत मिल रहे हैं। सूत्रों के हवाले से खबर है कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) राज्य में फिर से एक लोकप्रिय सरकार (Popular Government) के गठन का दावा पेश करने जा रही है। गौरतलब है कि मणिपुर में 13 फरवरी, 2025 से राष्ट्रपति शासन लागू है और राज्य विधानसभा ‘निलंबित अवस्था’ (Suspended Animation) में है।
सूत्रों के अनुसार, मणिपुर में जारी राजनीतिक गतिरोध के बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) एक बार फिर सरकार बनाने का दावा पेश करने की तैयारी में है। राज्य में पिछले एक साल से लागू राष्ट्रपति शासन के खत्म होने की समयसीमा (13 फरवरी, 2026) के करीब आते ही राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।

मणिपुर में फिर से खिलेगा कमल? BJP सरकार बनाने की तैयारी में

इम्फाल/नई दिल्ली: मणिपुर की राजनीति में एक बड़ा मोड़ आने के संकेत मिल रहे हैं। सूत्रों के हवाले से खबर है कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) राज्य में फिर से एक लोकप्रिय सरकार (Popular Government) के गठन का दावा पेश करने जा रही है। गौरतलब है कि मणिपुर में 13 फरवरी, 2025 से राष्ट्रपति शासन लागू है और राज्य विधानसभा ‘निलंबित अवस्था’ (Suspended Animation) में है।

मुख्यमंत्री पद पर बड़ा अपडेट

सूत्रों का दावा है कि आने वाली नई सरकार का नेतृत्व मैतई समाज का ही कोई चेहरा करेगा। हालांकि पिछले साल हिंसा और राजनीतिक दबाव के बीच एन. बीरेन सिंह ने इस्तीफा दे दिया था, लेकिन नई व्यवस्था में मुख्यमंत्री के नाम को लेकर सस्पेंस बरकरार है। दिल्ली में आलाकमान के साथ चल रही बैठकों में किसी ऐसे नाम पर सहमति बनाने की कोशिश की जा रही है जो घाटी (Valley) और पहाड़ियों (Hills) के बीच संतुलन बना सके, लेकिन प्राथमिकता मैतई समुदाय के प्रतिनिधित्व को दी जा रही है।

दिल्ली में बढ़ी हलचल

खबरों के मुताबिक, मणिपुर के अधिकांश एनडीए (NDA) विधायक और भाजपा के वरिष्ठ नेता इस समय दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं। भाजपा के उत्तर-पूर्व प्रभारी संबित पात्रा और अन्य केंद्रीय नेताओं ने विधायकों के साथ सिलसिलेवार बैठकें की हैं।

संख्या बल: 60 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा के पास 37 विधायक हैं। इसके अलावा एनपीपी और एनपीएफ जैसे सहयोगियों का समर्थन भी उनके पास है।

प्रमुख एजेंडा: सरकार गठन का मुख्य उद्देश्य 13 फरवरी को राष्ट्रपति शासन की अवधि समाप्त होने से पहले लोकतांत्रिक व्यवस्था को बहाल करना है।

चुनौतियां और विपक्ष का रुख

जहाँ  एक ओर सरकार बनाने की तैयारी है, वहीं कुकी संगठनों और कुछ विपक्षी दलों ने इसे लेकर अपनी आपत्तियां जताई हैं। कुकी-ज़ो समुदायों के विधायकों की भागीदारी इस नई सरकार के स्थायित्व के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

 

 

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