उद्धरण से डर क्यों? अप्रकाशित संस्मरण के हवाले पर राहुल गांधी बनाम सरकार, लोकसभा ठप

नियम 349, स्पीकर की रूलिंग और विपक्ष का विरोध—लोकसभा में टकराव

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  • राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान विवाद
  • राहुल गांधी ने पत्रिका में छपे पूर्व सेना प्रमुख के संस्मरण का हवाला दिया
  • राजनाथ सिंह, अमित शाह और किरेन रिजिजू ने जताई कड़ी आपत्ति
  • नियम 349 का हवाला, स्पीकर की रूलिंग के बाद सदन कई बार स्थगित

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली। 02 फरवरी:  राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान सोमवार को लोकसभा में उस समय तीखा हंगामा खड़ा हो गया, जब नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक पत्रिका में प्रकाशित लेख के कुछ अंश पढ़ने की अनुमति मांगी। उनके ऐसा करते ही सत्ता पक्ष की ओर से कड़ी आपत्ति जताई गई और सदन की कार्यवाही बाधित हो गई।

कारवां पत्रिका के अंश से शुरू हुआ विवाद

राहुल गांधी ने सदन में कहा कि कारवां पत्रिका में भारतीय सेना के पूर्व प्रमुख जनरल एम एम नरवणे के संस्मरण से जुड़े अंश प्रकाशित हुए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह उनका संस्मरण है, जिसे पुस्तक के रूप में प्रकाशित नहीं होने दिया गया है। राहुल गांधी ने कहा कि वह इसमें से केवल “पाँच पंक्तियाँ” पढ़ना चाहते हैं।

राजनाथ सिंह की आपत्ति

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने राहुल गांधी के इस प्रयास पर आपत्ति जताते हुए कहा कि जिस पुस्तक का उल्लेख किया जा रहा है, वह अब तक प्रकाशित ही नहीं हुई है। ऐसे में उसका हवाला देना न तो उचित है और न ही संसदीय मर्यादाओं के अनुरूप। उन्होंने कहा कि सदन को गुमराह करने वाली किसी भी बात का यहां उल्लेख नहीं होना चाहिए।

अमित शाह ने उठाए प्रामाणिकता पर सवाल

गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि राहुल गांधी जिस सामग्री को पढ़ना चाहते हैं, वह किसी प्रकाशित पुस्तक का हिस्सा नहीं है, बल्कि एक पत्रिका में छपा लेख है। उन्होंने तर्क दिया कि पत्रिकाएं कुछ भी लिख सकती हैं और इसे जनरल नरवणे की किताब कहना गलत है।

स्पीकर की रूलिंग

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि सदन में जो कुछ भी कहा जाए, वह प्रमाणिक होना चाहिए ताकि संसद की गरिमा बनी रहे। उन्होंने कहा कि संसदीय परंपरा के अनुसार अख़बार, पत्रिका, किताब, ई-मेल या ऐसी कोई भी सामग्री, जिसकी प्रामाणिकता सदन के समक्ष प्रमाणित न हो, उस पर चर्चा की अनुमति नहीं दी जा सकती।

राहुल गांधी का पलटवार

आपत्ति के बीच राहुल गांधी ने कहा कि राष्ट्रपति का अभिभाषण देश की स्थिति, नीतियों, विदेश नीति और वैश्विक हालात से जुड़ा होता है। उन्होंने सत्ता पक्ष की ओर इशारा करते हुए सवाल किया कि जब सरकार आतंकवाद से लड़ने का दावा करती है, तो फिर एक उद्धरण से डर क्यों रही है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार को कोई डर नहीं है, तो उन्हें पढ़ने की अनुमति दी जानी चाहिए।

नियम 349 का हवाला

इसके बाद भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने नियम 349(1) का उल्लेख करते हुए कहा कि सदन की कार्यवाही से असंबंधित किसी पुस्तक या समाचार सामग्री को पढ़ना नियमों के खिलाफ है। उन्होंने संसद के बाहर यह भी कहा कि संविधान के अनुच्छेद 19 की सीमाएं राष्ट्रीय सुरक्षा और पड़ोसी देशों से जुड़े मामलों में लागू होती हैं।

किरण रिजिजू की नाराज़गी

केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि स्पीकर द्वारा रूलिंग दिए जाने के बाद भी बार-बार वही विषय उठाया जा रहा है, जिससे सदन की कार्यवाही नहीं चल पा रही है। उन्होंने कहा कि नियमों का पालन नहीं होगा, तो चर्चा संभव नहीं है।

कंगना रनौत का बयान

संसद के बाहर भाजपा सांसद कंगना रनौत ने कहा कि जिस सामग्री की प्रामाणिकता पर सवाल हैं, उसे पढ़कर संसद और सांसदों के सम्मान को ठेस पहुंचाई जा रही है।

विपक्ष का समर्थन

वहीं विपक्षी दलों ने राहुल गांधी के समर्थन में बयान दिए। शिवसेना (यूबीटी) सांसद अरविंद सावंत ने कहा कि नरवणे कोई साधारण व्यक्ति नहीं थे, बल्कि देश के सेना प्रमुख रहे हैं और उनके संस्मरण को यूं खारिज नहीं किया जा सकता।

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने कहा कि राहुल गांधी कभी सेना को बदनाम नहीं करेंगे और एक पूर्व सेना प्रमुख के संस्मरण का उल्लेख करना गलत नहीं है।

सिंघवी ने उठाया विदेश नीति का मुद्दा

कांग्रेस सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि राहुल गांधी डोकलाम, चीन और लद्दाख से जुड़े मुद्दे उठाना चाहते थे, लेकिन तकनीकी आपत्तियों के जरिए उनसे जुड़े सवालों को उठाने नहीं दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि जनहित से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्नों को जानबूझकर रोका जा रहा है।

सदन की कार्यवाही स्थगित

लगातार हंगामे के कारण लोकसभा की कार्यवाही दोपहर करीब 45 मिनट तक बाधित रही। इसके बाद सदन को पहले दोपहर 3 बजे तक, फिर 4 बजे तक और अंततः मंगलवार तक के लिए स्थगित कर दिया गया। इस दौरान सदन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मौजूद थे।

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