सुरक्षा आकलन के बाद भारत का बड़ा फैसला, बांग्लादेश बना नॉन-फैमिली तैनाती स्थल
भारतीय मिशनों से राजनयिकों के परिजन लौटे, नीति में अहम बदलाव
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बांग्लादेश को नॉन-फैमिली श्रेणी में शामिल किया गया
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भारतीय अधिकारियों के परिवारों को लौटने के निर्देश
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फैसला एक जनवरी से प्रभावी
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चुनावी माहौल और सुरक्षा चिंता को माना जा रहा कारण
समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली| 20 जनवरी: भारत सरकार ने बांग्लादेश को ‘नॉन-फैमिली’ यानी बिना परिवार वाली राजनयिक तैनाती की सूची में शामिल कर लिया है। इसके तहत अब वहाँ तैनात किए जाने वाले भारतीय राजनयिक और अधिकारी अपने पति-पत्नी या बच्चों को साथ नहीं रख सकेंगे।
कब से लागू हुई नीति
सूत्रों के अनुसार यह फैसला 1 जनवरी से लागू हो चुका है। बांग्लादेश में तैनात भारतीय अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि उनके परिवार 8 जनवरी तक भारत लौट आएं। जिन अधिकारियों के बच्चे स्कूलों में पढ़ रहे थे, उन्हें अतिरिक्त सात दिन की छूट दी गई।
किन मिशनों पर पड़ा असर
इस फैसले के बाद ढाका, चटगांव, खुलना, सिलहट और राजशाही स्थित भारतीय मिशनों में तैनात अधिकारियों के परिवारों को बेहद कम समय के नोटिस पर भारत लौटना पड़ा।
पहले किन देशों पर लागू थी यह व्यवस्था
इससे पहले भारत ने यह नीति केवल कुछ संवेदनशील देशों के लिए अपनाई थी, जिनमें इराक, अफगानिस्तान, पाकिस्तान और दक्षिण सूडान शामिल हैं। अब बांग्लादेश को भी उसी श्रेणी में रखा गया है।
सुरक्षा और चुनावी माहौल बना वजह
पूर्व भारतीय राजनयिकों का मानना है कि बांग्लादेश में आगामी आम चुनावों से पहले सुरक्षा हालात को लेकर चिंता बढ़ी है। आशंका है कि चुनाव से पहले या बाद में हिंसा की स्थिति बन सकती है, जिससे राजनयिक कर्मचारियों के परिवारों को खतरा हो सकता है। उनका यह भी कहना है कि भारत के पास इस संबंध में ठोस खुफिया इनपुट रहे होंगे, जिसके आधार पर यह कदम उठाया गया।
अस्थायी हो सकता है फैसला
कूटनीतिक हलकों के अनुसार यह निर्णय स्थायी नहीं है। चुनाव प्रक्रिया पूरी होने और हालात सामान्य होने के बाद नीति की समीक्षा की जा सकती है और भविष्य में परिवारों को साथ रहने की अनुमति फिर से दी जा सकती है।
भारत-बांग्लादेश संबंधों की पृष्ठभूमि
बीते कुछ समय से दोनों देशों के बीच राजनयिक सुरक्षा को लेकर तनाव देखा गया है। हाल ही में दिल्ली में बांग्लादेशी उच्चायुक्त के आवास के पास हुए प्रदर्शन को लेकर भी दोनों पक्षों में कूटनीतिक तल्खी सामने आई थी। इसके बाद से ही सुरक्षा व्यवस्थाओं पर विशेष नजर रखी जा रही थी।
अमेरिका पहले से लागू कर चुका है ऐसी नीति
एक अन्य पूर्व वरिष्ठ भारतीय राजनयिक के अनुसार, 2016 में ढाका में हुए आतंकी हमले के बाद से बांग्लादेश अमेरिकी राजनयिकों के लिए भी नॉन-फैमिली पोस्टिंग बना हुआ है। ऐसे में भारत का यह कदम असामान्य नहीं माना जा रहा।