ईडी बनाम तृणमूल कांग्रेस: आई-पैक छापे के विवाद में सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

आई-पैक छापे पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, जाँच के दौरान भीड़ जुटाने पर उठाए सवाल

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  • आई-पैक कार्यालय पर ईडी की छापेमारी से जुड़ा मामला सुप्रीम कोर्ट पहुँचा
  • ईडी ने कथित व्हाट्सएप संदेशों सहित डिजिटल साक्ष्य पेश किए
  • जाँच के दौरान भीड़ जुटाने पर अदालत ने गंभीर सवाल उठाए
  • तृणमूल कांग्रेस ने कार्रवाई को राजनीतिक बदले की भावना बताया

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली | 16 जनवरी: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को पश्चिम बंगाल में इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (आई-पैक) के कार्यालय पर हुई प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की छापेमारी से जुड़े विवाद की सुनवाई की। इस दौरान अदालत ने जाँच के समय कथित तौर पर राजनीतिक कार्यकर्ताओं की भीड़ जुटाने पर तीखी टिप्पणी की।

ईडी के आरोप और डिजिटल साक्ष्य

सुनवाई के दौरान ईडी ने अदालत के समक्ष डिजिटल साक्ष्य प्रस्तुत किए। इनमें कथित व्हाट्सएप संदेश शामिल हैं, जिनके ज़रिये तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को छापे वाली जगह के आसपास एकत्र होने के लिए कहा गया था। एजेंसी का आरोप है कि यह एक संगठित प्रयास था, जिसका उद्देश्य अधिकारियों को डराना, अव्यवस्था फैलाना और कानूनी जाँच को प्रभावित करना था।

अदालत की सख्त टिप्पणी

मामले की सुनवाई कर रही पीठ ने सवाल उठाया कि क्या किसी जांच के दौरान इस तरह का जनसमर्थन जुटाना कानून के दायरे में आता है। अदालत ने टिप्पणी की कि क्या राजनीतिक दल कोलकाता को “जंतर मंतर जैसा प्रदर्शन स्थल” बनाने की कोशिश कर रहे हैं। पीठ ने स्पष्ट किया कि जाँच एजेंसियों के काम में बाधा स्वीकार्य नहीं हो सकती।

धनशोधन जाँच का हवाला

ईडी ने दलील दी कि आई-पैक पर की गई कार्रवाई कथित धनशोधन और चुनावी वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े व्यापक मामले का हिस्सा है। एजेंसी के अनुसार, जाँच के दौरान भीड़ इकट्ठा करना न्यायिक प्रक्रिया में बाधा डालने के समान है।

तृणमूल का पलटवार

वहीं, तृणमूल कांग्रेस ने ईडी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह पूरी कार्रवाई राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित है। पार्टी का आरोप है कि केंद्र सरकार चुनावों से पहले विपक्षी दलों को निशाना बनाने के लिए केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है।

आगे की सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई आगे भी जारी रहने की संभावना है। अदालत ने संकेत दिए हैं कि दोनों पक्षों को अतिरिक्त दस्तावेज़ और लिखित दलीलें दाखिल करने का अवसर दिया जाएगा।

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