मणिकर्णिका घाट पुनर्विकास पर सियासी घमासान: खरगे का मोदी पर तीखा हमला
काशी की आत्मा पर हमला मणिकर्णिका घाट पुनर्विकास पर कांग्रेस का आरोप
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कांग्रेस अध्यक्ष ने पुनर्विकास को विरासत-विरोधी बताया
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प्रशासन बोला—कलाकृतियाँ सुरक्षित, काम के बाद पुनर्स्थापना
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स्थानीय संगठनों का विरोध, मूर्तियों को नुकसान का आरोप
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भाजपा सरकार पर संस्कृति और आस्था से खिलवाड़ का दावा
समग्र समाचार सेवा
वाराणसी |15 जनवरी: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने वाराणसी के मणिकर्णिका घाट के पुनर्विकास को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला है। खरगे ने आरोप लगाया कि ऐतिहासिक और आध्यात्मिक धरोहरों को “सौंदर्यीकरण” के नाम पर मिटाया जा रहा है, ताकि उन पर नामपट्टिका अंकित की जा सके।
“जीर्णोद्धार के बहाने ध्वस्तीकरण” का आरोप
खरगे ने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा कि गुप्त काल में वर्णित और लोकमाता अहिल्याबाई होलकर द्वारा पुनर्स्थापित मणिकर्णिका घाट की दुर्लभ विरासत को नवीनीकरण के नाम पर नुकसान पहुँचाया गया। उनके अनुसार, सौंदर्यीकरण और व्यवसायीकरण के नाम पर सदियों पुरानी धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान पर बुलडोजर चलाया जा रहा है।
प्रशासन का पक्ष: स्वच्छता और प्रबंधन
जिला प्रशासन ने आरोपों को खारिज किया है। जिला मजिस्ट्रेट सत्येंद्र कुमार के मुताबिक, घाट पर मौजूद कलाकृतियों को संस्कृति विभाग ने सुरक्षित कर लिया है और कार्य पूर्ण होने के बाद उन्हें मूल स्वरूप में पुनः स्थापित किया जाएगा। प्रशासन का कहना है कि नवीनीकरण का उद्देश्य स्वच्छता, भीड़ और स्थान प्रबंधन में सुधार करना है, क्योंकि यहाँ प्रतिदिन बड़ी संख्या में शवदाह होते हैं।
“पहले पानी-जंगल, अब विरासत”
खरगे ने आरोप लगाया कि गलियारे के नाम पर पहले मंदिरों और तीर्थस्थलों को हटाया गया और अब प्राचीन घाटों की बारी है। उन्होंने कहा कि काशी जो आध्यात्मिकता, संस्कृति, शिक्षा और इतिहास का संगम है, को व्यावसायिक हितों के लिए बदला जा रहा है।
संसद परिसर और जलियांवाला बाग का हवाला
कांग्रेस अध्यक्ष ने सवाल उठाया कि क्या परामर्श के बिना महान हस्तियों की प्रतिमाएँ हटाना उचित था और “नवीनीकरण” के नाम पर जलियांवाला बाग में बलिदानों की स्मृति को क्यों बदला गया। उन्होंने पूछा कि मणिकर्णिका घाट की सदियों पुरानी मूर्तियों को संग्रहालय में संरक्षित क्यों नहीं किया गया।
स्थानीय विरोध और राजनीतिक प्रतिक्रिया
मंगलवार से शुरू हुए विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व पाल समाज समिति ने किया, जिसे मराठी समुदाय के कुछ वर्गों और अन्य स्थानीय समूहों का समर्थन मिला। समिति का दावा है कि विध्वंस के दौरान अहिल्याबाई होलकर की पुरानी प्रतिमा को हटाया गया।
कांग्रेस के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने इसे “शहर की आत्मा और सनातन संस्कृति पर हमला” बताया। उनका कहना है कि मणिकर्णिका घाट हिंदू धर्म के सबसे प्राचीन और पवित्र श्मशान घाटों में से एक है, जिसे मोक्ष-स्थल माना जाता है, इसलिए यहाँ किसी भी हस्तक्षेप में अत्यंत सावधानी आवश्यक है।
आस्था बनाम विकास की बहस
खरगे ने प्रधानमंत्री से पूछा कि क्या विरासत को संरक्षित रखते हुए सफाई और सौंदर्यीकरण संभव नहीं था। उन्होंने कहा कि वाराणसी के घाट शहर की पहचान हैं और इन्हें आम जनता व श्रद्धालुओं के लिए दुर्गम बनाना आस्था के साथ विश्वासघात होगा।