ऑक्सफोर्ड अध्ययन में ‘प्रगति’ को बताया गया भारत की विकास रफ्तार का प्रमुख इंजन
बुनियादी ढांचा और सामाजिक योजनाओं को तेज़ी देने वाला प्रभावी शासन मॉडल करार
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ऑक्सफोर्ड अध्ययन में ‘प्रगति’ मंच को भारत की विकास रफ्तार का प्रमुख इंजन बताया गया
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मार्च २०१५ से दिसंबर २०२४ तक ३४० से अधिक महत्वपूर्ण परियोजनाओं की समीक्षा हुई
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प्रधानमंत्री की सीधी निगरानी से नौकरशाही देरी घटी और जवाबदेही बढ़ी
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बुनियादी ढांचा और सामाजिक योजनाओं को समयबद्ध गति मिली
समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली,09 जनवरी: ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के सईद व्यवसाय विद्यालय द्वारा किए गए एक विस्तृत अध्ययन में भारत के ‘प्रगति’ मंच को राष्ट्रीय विकास को गति देने वाला एक सशक्त और प्रभावी शासन मॉडल बताया गया है। गेट्स फाउंडेशन के सहयोग से तैयार इस अध्ययन में कहा गया है कि ‘प्रगति’ ने जटिल परियोजनाओं को समयबद्ध ढंग से आगे बढ़ाने में निर्णायक भूमिका निभाई है।
सैकड़ों परियोजनाओं को मिली रफ्तार
अध्ययन के अनुसार मार्च २०१५ से दिसंबर २०२४ के बीच ‘प्रगति’ मंच के माध्यम से तीन सौ चालीस से अधिक महत्वपूर्ण परियोजनाओं की समीक्षा की गई। इन परियोजनाओं की कुल लागत लगभग दो सौ पाँच अरब डॉलर बताई गई है। नियमित निगरानी और त्वरित निर्णयों के कारण कई वर्षों से अटकी योजनाओं को नई गति मिली।
क्या है ‘प्रगति’
‘प्रगति’ का पूरा नाम सक्रिय शासन और समयबद्ध कार्यान्वयन है। यह मंच प्रधानमंत्री कार्यालय, केंद्रीय मंत्रालयों और राज्य सरकारों को एक साथ जोड़ता है। इसके जरिए वास्तविक समय के आंकड़े, वीडियो संवाद और भू-स्थानिक मानचित्रण के माध्यम से परियोजनाओं की निगरानी की जाती है।
शीर्ष नेतृत्व से कम हुई देरी
अध्ययन में बताया गया है कि प्रधानमंत्री की सीधी समीक्षा और हस्तक्षेप से नौकरशाही स्तर पर होने वाली देरी में उल्लेखनीय कमी आई है। समस्याओं की पहचान मौके पर ही कर समाधान सुनिश्चित किया जाता है, जिससे जवाबदेही तय होती है।
बुनियादी ढांचे में बड़ा परिवर्तन
राष्ट्रीय राजमार्गों के विस्तार, हवाई अड्डों के विकास और ऊर्जा अवसंरचना को ‘प्रगति’ के माध्यम से विशेष बढ़ावा मिला है। भूमि अधिग्रहण और पर्यावरणीय स्वीकृतियों जैसे जटिल मुद्दों को भी बेहतर समन्वय से सुलझाया गया।
राज्यों के बीच सहयोग मजबूत
अंतर-राज्यीय परियोजनाओं में ‘प्रगति’ ने समन्वय की नई मिसाल पेश की है। विभिन्न राज्यों के बीच लंबे समय से चले आ रहे विवादों का समाधान निकालकर परियोजनाओं को पूरा किया गया।
वैश्विक स्तर पर उदाहरण
अध्ययन में कहा गया है कि नेतृत्व आधारित जवाबदेही, तकनीक का प्रभावी उपयोग और समन्वित निर्णय प्रक्रिया के कारण ‘प्रगति’ विकासशील देशों के लिए एक अनुकरणीय मॉडल बन सकता है। यह मंच केवल परियोजना समीक्षा तक सीमित नहीं, बल्कि राष्ट्रीय विकास को दिशा देने वाला एक समग्र शासन तंत्र बन चुका है।