“गठबंधन टूटा, कांग्रेस बिखरी और अंबरनाथ में भाजपा ने पूरा खेल पलट दिया”
नगर राजनीति में बड़ा उलटफेर, 12 पार्षद भाजपा में शामिल
-
भाजपा–कांग्रेस गठबंधन बना और कुछ ही घंटों में टूट गया
-
कांग्रेस ने 12 पार्षदों को निलंबित किया
-
निलंबित पार्षद भाजपा में शामिल हुए
-
अंबरनाथ में भाजपा बहुमत के आंकड़े तक पहुँची
समग्र समाचार सेवा
अंबरनाथ (महाराष्ट्र), 8 जनवरी: महाराष्ट्र की राजनीति में बुधवार को ऐसा घटनाक्रम सामने आया, जिसकी उम्मीद कम ही की जा रही थी। अंबरनाथ नगर परिषद में पहले भाजपा और कांग्रेस के बीच गठबंधन बना, लेकिन कुछ ही घंटों में यह टूट गया। इसके बाद जो हुआ, उसने पूरे सियासी समीकरण ही बदल दिए।
अंबरनाथ में सत्ता से एकनाथ शिंदे की शिवसेना को बाहर रखने के उद्देश्य से भाजपा और कांग्रेस ने हाथ मिलाया था। हालांकि, गठबंधन टूटते ही कांग्रेस ने बड़ा कदम उठाते हुए भाजपा के साथ जाने वाले अपने 12 निर्वाचित पार्षदों को निलंबित कर दिया। इसके तुरंत बाद ये सभी 12 पार्षद भाजपा में शामिल हो गए, जिससे अंबरनाथ की राजनीति पूरी तरह पलट गई।
संख्या का खेल क्या कहता है?
59 सदस्यीय अंबरनाथ नगर परिषद में:
- शिंदे की शिवसेना: 27 पार्षद
- भाजपा: 14 पार्षद (अब कांग्रेस से आए 12 के साथ कुल 31)
- कांग्रेस: 12 (निलंबन के बाद शून्य प्रभाव)
- एनसीपी: 4
- 1 निर्दलीय
इस नए समीकरण के बाद भाजपा बहुमत के आंकड़े तक पहुँची गई है, जबकि शिंदे की शिवसेना 27 पार्षदों के साथ पीछे रह गई।
देवेंद्र फडणवीस तक पहुँचा मामला
भाजपा–कांग्रेस गठबंधन की खबर फैलते ही राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई। मामला सीधे देवेंद्र फडणवीस तक पहुँचा। इसके बाद कांग्रेस नेतृत्व ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पार्षदों को निलंबित कर दिया।
भाजपा का रणनीतिक दांव
बुधवार रात भाजपा ने बड़ा राजनीतिक दांव चलते हुए कांग्रेस के सभी 12 निलंबित पार्षदों को पार्टी में शामिल करा लिया। इससे न केवल भाजपा को स्पष्ट बहुमत मिला, बल्कि अंबरनाथ की राजनीति भी “कांग्रेस-मुक्त” स्थिति की ओर बढ़ गई।
कांग्रेस की सफाई
अंबरनाथ कांग्रेस अध्यक्ष प्रदीप पाटिल ने दावा किया कि गठबंधन का प्रस्ताव भाजपा की ओर से आया था और वे भाजपा नहीं बल्कि अंबरनाथ विकास अघाड़ी के साथ थे। हालांकि, पार्टी आलाकमान को विश्वास में लिए बिना फैसला लेने के कारण उनके खिलाफ कार्रवाई की गई और पार्षदों को निलंबित कर दिया गया।
नतीजा साफ
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा असर यह हुआ कि अंबरनाथ में शिंदे की शिवसेना सत्ता से दूर हो गई और कांग्रेस का संगठनात्मक प्रभाव भी लगभग खत्म हो गया। वहीं भाजपा ने स्थानीय स्तर पर अपनी स्थिति और मजबूत कर ली है।
कुल मिलाकर, जो प्रयोग कुछ घंटों के लिए शुरू हुआ था, वही अंबरनाथ की राजनीति में नए “खेला” का कारण बन गया—जहाँ सत्ता समीकरण बदले और कांग्रेस को सबसे बड़ा झटका लगा।