छत्तीसगढ़ में सुरक्षाबलों की बड़ी कार्रवाई, सुकमा-बीजापुर मुठभेड़ में 14 माओवादी ढेर
दक्षिण बस्तर के जंगलों में इस साल का सबसे बड़ा नक्सल विरोधी ऑपरेशन, डीवीसीएम कैडर को बड़ा झटका
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सुकमा और बीजापुर जिलों में दो अलग-अलग मुठभेड़ों में 14 से अधिक माओवादी मारे गए
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किस्ताराम इलाके के घने जंगलों में कई घंटों तक चली जबरदस्त गोलीबारी
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मारे गए अधिकांश माओवादी दरभा वैली कमेटी (डीवीसीएम) से जुड़े
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एके-47, इंसास राइफल समेत हथियार और विस्फोटक बरामद, ऑपरेशन जारी
समग्र समाचार सेवा
सुकमा/बीजापुर|04 जनवरी: छत्तीसगढ़ के दक्षिण बस्तर इलाके में सुरक्षा बलों ने नक्सलियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। सुकमा और बीजापुर जिलों में हुई दो अलग-अलग मुठभेड़ों में 14 से अधिक माओवादी मारे गए। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह इस साल के सबसे बड़े नक्सल विरोधी अभियानों में से एक है।
मुख्य मुठभेड़ सुकमा जिले के किस्ताराम क्षेत्र के घने जंगलों में हुई, जहां सुरक्षाबलों की संयुक्त टीमों ने पुख्ता खुफिया जानकारी के आधार पर व्यापक सर्च ऑपरेशन शुरू किया था। इसी दौरान माओवादियों ने अचानक गोलीबारी शुरू कर दी, जिसके बाद दोनों ओर से कई घंटों तक भीषण संघर्ष चला।
वरिष्ठ नक्सली कमांडर भी ढेर
अधिकारियों ने बताया कि मारे गए ज्यादातर माओवादी दरभा वैली कमेटी (डीवीसीएम) के कैडर थे, जो क्षेत्र में सक्रिय एक अहम संगठन माना जाता है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, कोंटा के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आकाश गिरपुंजे की हत्या में कथित रूप से शामिल एक नक्सली कमांडर भी मारे गए लोगों में शामिल है, जिससे संगठन को बड़ा झटका लगा है।
हथियार बरामद, इलाके की सघन तलाशी जारी
मुठभेड़ स्थल से एके-47, इंसास राइफल, भारी मात्रा में गोला-बारूद और विस्फोटक बरामद किए गए हैं। फिलहाल ऑपरेशन जारी है और सुरक्षाबल पूरे इलाके की गहन तलाशी ले रहे हैं। घने जंगल और संवेदनशील परिस्थितियों के चलते मृतकों की सटीक संख्या और पहचान सुरक्षा बलों की वापसी के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी।
सुरक्षा कारणों से सीमित जानकारी
वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने बताया कि ऑपरेशन अभी निर्णायक चरण में है। जवानों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए फिलहाल ऑपरेशन से जुड़ी विस्तृत जानकारी साझा नहीं की जा रही है। मिशन के पूर्ण होने और क्षेत्र के सुरक्षित घोषित होने के बाद मारे गए माओवादियों की पहचान और जब्त हथियारों का पूरा ब्योरा सार्वजनिक किया जाएगा।
उग्रवाद में कमी, लेकिन चुनौतियां बरकरार
लगातार काउंटर-ऑपरेशन, आत्मसमर्पण और विकास योजनाओं के चलते वामपंथी उग्रवाद में उल्लेखनीय कमी आई है। प्रभावित जिले अब घटकर 20 से भी कम रह गए हैं। सरकार का लक्ष्य सुरक्षा कैंप, बुनियादी ढांचे और कल्याणकारी योजनाओं के जरिए तय समयसीमा तक उग्रवाद को समाप्त करना है। हालांकि, आदिवासी विस्थापन और असमानता जैसे मूल कारण अब भी दीर्घकालिक समाधान की बड़ी चुनौती बने हुए हैं।