समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली | 13 नवंबर -भारत की सुरक्षा एजेंसियों ने एक बड़े आतंकी नेटवर्क का पर्दाफाश किया है, जिसके सूत्रधार का कोडनेम “उक़ासा (Ukasa)” बताया जा रहा है. जाँच एजेंसियों के अनुसार यह हैंडलर तुर्किये (Turkey) से पूरे नेटवर्क को संचालित कर रहा था और हालिया धमाकों की प्लानिंग में उसकी केंद्रीय भूमिका रही है.
तुर्किये से लेकर भारत तक फैला नेटवर्क
सूत्रों के अनुसार, “उक़ासा” पिछले कुछ महीनों से भारत में सक्रिय एक मॉड्यूल को रिमोट तरीके से निर्देश दे रहा था। इंटरसेप्टेड कॉल्स और चैट्स से यह स्पष्ट हुआ कि वह भारत में भर्ती किए गए युवाओं को ‘धार्मिक मिशन’ के नाम पर भड़काकर विस्फोटक हमलों की ट्रेनिंग दे रहा था।
संदेश भेजने के लिए एन्क्रिप्टेड ऐप्स और डार्क वेब चैनल्स का इस्तेमाल किया गया ताकि सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी से बचा जा सके।
दिल्ली में हाल ही में हुए विस्फोट के बाद मौके से मिली इलेक्ट्रॉनिक सामग्री और डिजिटल डेटा की जांच में “उक़ासा” का नाम सामने आया।
जांच में पाया गया कि हमले से कुछ घंटे पहले तक हैंडलर और स्थानीय मॉड्यूल के बीच बातचीत चल रही थी।
एक सूत्र ने बताया — “उक़ासा” ने हमले का कोडनेम ‘ऑपरेशन जेड रखा था और इसका उद्देश्य भारत में राजनीतिक और सांप्रदायिक अस्थिरता फैलाना था।
भेष बदलकर काम करने वाले एजेंट
जाँच एजेंसियों के अनुसार, “उक़ासा” ने भारत में अपनी मौजूदगी छिपाने के लिए सोशल मीडिया पर फेक प्रोफाइल्स बनाए थे।
वह कभी पत्रकार, कभी मानवाधिकार कार्यकर्ता बनकर खुद को प्रस्तुत करता और उन्हीं रास्तों से स्थानीय संपर्क बढ़ाता।
एजेंसियों का मानना है कि उसकी टीम में कुछ प्रशिक्षित साइबर ऑपरेटिव भी हैं, जो भारत के सरकारी सर्वर और संवेदनशील डेटा को टारगेट करने की योजना बना रहे थे।
एन आई ए और रॉ की कार्रवाई जारी है
राष्ट्रीय जाँच एजेंसी और रॉ ने कई राज्यों में संयुक्त रूप से छापेमारी अभियान चलाया है।राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) और रॉ (RAW) ने संयुक्त रूप से कई राज्यों में छापेमारी अभियान शुरू किया है।
पटना, दिल्ली, हैदराबाद और कोलकाता में हुई छापेमारियों में अब तक कई संदिग्ध गिरफ्तार किए गए हैं, जिनके पास से इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, पासपोर्ट और विदेशी फंडिंग के सबूत बरामद हुए हैं।
सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, “उक़ासा” का नेटवर्क तुर्किये, पाकिस्तान और सीरिया तक फैला हुआ है।
तेजी से फैलता ‘डिजिटल जिहाद’
एजेंसियों का यह भी कहना है कि यह नेटवर्क सिर्फ हथियारों तक सीमित नहीं है — यह ऑनलाइन ब्रेनवॉशिंग और फंडिंग ऑपरेशन भी चला रहा था।
कई भारतीय युवाओं को क्रिप्टो करेंसी के ज़रिए भुगतान किया जा रहा था ताकि वे ‘कॉन्टेंट क्रिएटर’ या ‘सोशल एक्टिविस्ट’ बनकर इस्लामिक नैरेटिव्स को आगे बढ़ाएँ।
सरकार की सख्त चेतावनी
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इसे भारत के खिलाफ हाइब्रिड टेररिज़्म का उदाहरण बताया है — जहाँ हथियारों से ज़्यादा सोशल मीडिया और दिमाग़ी प्रोपेगैंडा का इस्तेमाल हो रहा है। सरकार ने कहा कि जो भी विदेशी ताकतें भारत की आंतरिक शांति को अस्थिर करने की कोशिश करेंगी, उन्हें “ज़ीरो टॉलरेंस” नीति के तहत जवाब मिलेगा।
“उक़ासा” अब भारत की सुरक्षा एजेंसियों के लिए केवल एक कोड नाम नहीं, बल्कि यह एक चेतावनी भी बन गया है। यह डिजिटल आतंकी नेटवर्क, जो तुर्की से संचालित है, भारत की सीमा पार बैठे उन ताकतों की याद दिलाता है जो युद्ध नहीं, लेकिन अशांति का निर्यात कर रहे हैं।