‘द ताज स्टोरी’ का पहले दिन का कलेक्शन
परेश रावल की फिल्म ने विवादों के बीच ₹1.04 करोड़ की मामूली कमाई की
- परेश रावल अभिनीत फिल्म ‘द ताज स्टोरी’ ने पहले दिन (शुक्रवार, 31 अक्टूबर) को अनुमानित 1.04 करोड़ रुपये (इंडिया नेट) का मामूली कलेक्शन किया।
- फिल्म ताजमहल के 22 सीलबंद कमरों के रहस्य और स्थापित इतिहास को चुनौती देने के विवादास्पद विषय पर आधारित है।
- रिलीज से पहले फिल्म पर ऐतिहासिक तथ्यों को गलत तरीके से पेश करने के आरोप में दो जनहित याचिकाएं (PILs) दायर की गई थीं, जिससे यह विवादों में घिर गई थी।
समग्र समाचार सेवा
मुंबई, 02 नवंबर: महान अभिनेता परेश रावल की बहुप्रतीक्षित और विवादित फिल्म ‘द ताज स्टोरी’ (The Taj Story) आखिरकार 31 अक्टूबर 2025 को सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। तुषार अमरीश गोयल द्वारा निर्देशित यह फिल्म अपनी रिलीज से पहले ही ताजमहल के इतिहास से जुड़े संवेदनशील विषय के कारण चर्चा में थी। हालांकि, बॉक्स ऑफिस पर इसकी शुरुआत उम्मीदों के अनुरूप नहीं रही।
फिल्म ने अपने पहले दिन यानी शुक्रवार को अनुमानित 1.04 करोड़ रुपये का नेट कलेक्शन किया है। सैक्निल्क (Sacnilk) के शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, किसी भी ड्रामा फिल्म के लिए यह एक मामूली (Modest) शुरुआत मानी जा रही है, खासकर तब जब फिल्म एक बड़े सितारे और एक ज्वलंत विषय पर आधारित हो। ओपनिंग डे के ये आंकड़े दर्शाते हैं कि दर्शकों के एक बड़े वर्ग में फिल्म के विषय को लेकर उत्साह और संदेह दोनों ही देखने को मिला, जिसका सीधा असर इसके शुरुआती कलेक्शन पर पड़ा है। फिल्म में परेश रावल के अलावा ज़ाकिर हुसैन, अमृता खानविलकर, नमित दास और स्नेहा वाघ जैसे कलाकार भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में हैं।
ताजमहल का रहस्य और कानूनी चुनौतियां
‘द ताज स्टोरी’ की कहानी का केंद्र बिंदु ताजमहल के 22 सीलबंद कमरे हैं और यह फिल्म उन ऐतिहासिक मान्यताओं को चुनौती देती है जिन पर लोग लंबे समय से विश्वास करते आ रहे हैं। फिल्म में नाटकीय शोध और गवाहियों के माध्यम से यह सुझाव दिया गया है कि ताजमहल मूल रूप से राजा जय सिंह का एक महल था, जिसे बाद में सम्राट शाहजहाँ ने अधिग्रहित कर लिया था। फिल्म इस व्याख्या को दृढ़ विश्वास के साथ प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।
इस विवादास्पद विषय के कारण, फिल्म को अपनी राष्ट्रव्यापी रिलीज से ठीक पहले कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। फिल्म पर रोक लगाने और इसके प्रमाणन की समीक्षा की मांग करते हुए दो जनहित याचिकाएं (PILs) दायर की गईं थीं। याचिकाओं में आरोप लगाया गया था कि फिल्म ताजमहल से जुड़े ऐतिहासिक तथ्यों को गलत तरीके से प्रस्तुत कर रही है, जिससे सामाजिक सौहार्द बिगड़ सकता है।
परेश रावल का स्पष्टीकरण: ‘नफरत फैलाने का इरादा नहीं’
फिल्म से जुड़े विवादों पर अभिनेता परेश रावल और ज़ाकिर हुसैन ने खुलकर अपनी राय रखी। एनडीटीवी से बात करते हुए, परेश रावल ने निर्देशक के शोध कार्य की सराहना की और स्पष्ट किया कि फिल्म का उद्देश्य किसी भी तरह की सांप्रदायिक या धार्मिक फूट डालना नहीं है। उन्होंने कहा कि निर्देशक तुषार के पास बेहतरीन शोध सामग्री थी और उनके सूत्रों का स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया था।
रावल ने जोर देकर कहा, “हम यह सुनिश्चित करना चाहते थे कि फिल्म में कोई हिंदू-मुस्लिम उन्माद न हो।” उन्होंने फिल्म के एक संवाद का भी उल्लेख किया, जहां एक पात्र कहता है, “यह आप पत्रकार हैं जो हर चीज को हिंदू और मुस्लिम बना देते हैं। यहां कोई हिंदू-मुस्लिम संघर्ष नहीं है। यह साझा इतिहास के बारे में है।”
हालांकि, टाइम्स ऑफ इंडिया ने ‘द ताज स्टोरी’ को 5 में से 2.5 स्टार दिए, इसे “एक महत्वाकांक्षी प्रयास जो बीच में ही अपनी भाप खो देता है” बताया। समीक्षा के अनुसार, फिल्म का पहला भाग, जिसमें नायक अदालत में अपनी जनहित याचिका को स्वीकार कराने के लिए संघर्ष करता है, ध्यान खींचता है। लेकिन दूसरा भाग दोहराए जाने वाले तर्कों, जवाबी तर्कों और लंबी अदालती दृश्यों में उलझकर कमजोर पड़ जाता है।