भारत की तेल माँग 2050 तक दुनिया में सबसे तेज़ बढ़ेगी: बीपी की रिपोर्ट

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पूनम शर्मा
भारत की ऊर्जा जरूरतें अगले तीन दशकों में सबसे तेज़ी से बढ़ेंगी और 2050 तक देश वैश्विक ऊर्जा बाजार का 12% हिस्सा संभालेगा। यह खुलासा बीपी (BP) के मुख्य अर्थशास्त्री स्पेंसर डेल ने “Energy Outlook 2025” रिपोर्ट में किया।

तेज़ आर्थिक विकास और ऊर्जा खपत में बढ़ोतरी

भारत वर्तमान में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक और उपभोक्ता देश है। इसके साथ ही यह एलएनजी (LNG) का चौथा सबसे बड़ा आयातक भी है। डेल के अनुसार, देश की तेल खपत वर्तमान में 5.4 मिलियन बैरल प्रतिदिन है, जो 2050 तक बढ़कर 9.1 मिलियन बैरल प्रतिदिन हो जाएगी। इसी तरह, प्राकृतिक गैस की खपत 63 बिलियन क्यूबिक मीटर से बढ़कर 153 बिलियन क्यूबिक मीटर हो जाएगी।

यदि भारत की आर्थिक वृद्धि 2023 से 2050 तक औसतन 5% रहे — जो वैश्विक औसत का दोगुना है — तो प्राथमिक ऊर्जा की माँग  में तेज़ी आएगी। डेल ने कहा, “भारत दुनिया का सबसे तेजी से बढ़ता ऊर्जा बाजार है। वैश्विक ऊर्जा माँग  में भारत की भूमिका केंद्रीय होगी।”

दो परिदृश्य: वर्तमान और 2-डिग्री लक्ष्य

बीपी की रिपोर्ट में दो मुख्य परिदृश्य पेश किए गए हैं:

करंट ट्रैजेक्टरी (Current Trajectory): वर्तमान नीतियों और आर्थिक गति के अनुसार।

बिलो 2-डिग्री (Below 2-Degree): पेरिस समझौते के अनुरूप, जिसमें वैश्विक तापमान वृद्धि 2°C से नीचे सीमित रहे।

दोनों परिदृश्यों में ऊर्जा की मांग बढ़ेगी। हालांकि नवीकरणीय ऊर्जा, जैसे सौर और पवन, तेज़ी से बढ़ेगी, लेकिन कोयला अभी भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। करंट ट्रैजेक्टरी में 2050 तक कोयले का हिस्सा 40% से अधिक रहेगा, जबकि बिलो 2-डिग्री परिदृश्य में यह घटकर 16% रह जाएगा।

नवीकरणीय ऊर्जा और बिजली की बढ़ती भूमिका

प्राकृतिक गैस की खपत 1-3% वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ेगी। 2050 तक तेल की मांग वैश्विक तेल खपत का 10% तक पहुँच जाएगी।

बिलो 2-डिग्री परिदृश्य में नवीकरणीय ऊर्जा 2050 तक भारत की प्राथमिक ऊर्जा का सबसे बड़ा स्रोत बन जाएगी। करंट ट्रैजेक्टरी में यह दूसरा सबसे बड़ा स्रोत होगा।

बिजली की खपत भी बढ़ेगी। 2023 में भारत की ऊर्जा का लगभग 20% हिस्सा बिजली के रूप में था। यह 2050 तक करंट ट्रैजेक्टरी में 30% और बिलो 2-डिग्री में लगभग 50% तक पहुँच जाएगा।

भारत बनाम चीन: ऊर्जा वृद्धि में तेज़ी

डेल ने चीन की तुलना में भारत की ऊर्जा वृद्धि दर पर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा, “चीन दुनिया की तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक है, लेकिन भारत उससे भी तेज़ी से बढ़ रहा है। भारत की ऊर्जा जरूरत हर प्रकार की ऊर्जा में बढ़ रही है।”

2030 तक गैर-जीवाश्म ऊर्जा का लक्ष्य

भारत का लक्ष्य 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता हासिल करना है। डेल ने कहा कि करंट ट्रैजेक्टरी में यह लक्ष्य कुछ ही वर्षों के भीतर हासिल हो जाएगा। यह उपलब्धि भी काफी महत्वपूर्ण मानी जाएगी।

भू-राजनीति और ऊर्जा सुरक्षा

डेल ने कहा कि वैश्विक भू-राजनीति में बढ़ती विभाजन और ऊर्जा के हथियार के रूप में इस्तेमाल की प्रवृत्ति के कारण ऊर्जा विविधता और सुरक्षा पर ध्यान बढ़ेगा। भारत जैसे देशों के लिए, जो आयात पर निर्भर हैं, यह जरूरी होगा कि आयात कम करें और घरेलू उत्पादन बढ़ाएँ।

तेल और गैस की माँग : भविष्य का परिदृश्य

डेल के अनुसार, भारत की तेल और प्राकृतिक गैस की मांग 2050 तक बढ़ती रहेगी। अगर दुनिया तेजी से डीकार्बोनाइजेशन की दिशा में बढ़ती है, तो वैश्विक स्तर पर तेल और गैस की मांग घटनी चाहिए। भारत में तेल की खपत 2030 के दशक के शुरुआती हिस्से तक बढ़ेगी, फिर लगभग 6.5 मिलियन बैरल प्रतिदिन स्थिर होकर धीरे-धीरे घटनी शुरू होगी।

हालांकि, घरेलू उत्पादन की वृद्धि इतनी तेज़ नहीं होगी कि बढ़ती माँग  पूरी तरह से पूरी हो सके। इसका मतलब है कि आयात पर निर्भरता 2050 तक बनी रहेगी।

भारत ऊर्जा के क्षेत्र में दुनिया का सबसे बड़ा खिलाड़ी बन सकता है। तेल और प्राकृतिक गैस की माँग में बढ़ोतरी, नवीकरणीय ऊर्जा में तेजी, कोयले का घटता हिस्सा और बिजली की बढ़ती भूमिका — ये संकेत हैं कि भारत की ऊर्जा नीति और बाजार आने वाले दशकों में वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य को प्रभावित करेंगे। ऊर्जा सुरक्षा, आयात कम करना और नवीकरणीय ऊर्जा निवेश बढ़ाना भारत के लिए प्राथमिकता बने रहेंगे।

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