सुदर्शन पट्टनायक ने रेत पर उकेरा RSS के शताब्दी वर्ष का गौरवशाली इतिहास

पुरी समुद्र तट पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 साल पूरे होने का अद्भुत 'रेत-स्वागत'

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  • अद्वितीय श्रद्धांजलि: पद्मश्री सुदर्शन पट्टनायक ने पुरी समुद्र तट पर रेत कला के माध्यम से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी वर्ष का स्वागत किया।
  • ऐतिहासिक चित्रण: कलाकृति में संघ के 100 वर्षों की ऐतिहासिक यात्रा, त्याग और राष्ट्र सेवा की भावना को खूबसूरती से दर्शाया गया है।
  • राष्ट्रीय चेतना: यह रेत कलाकृति न केवल एक सांस्कृतिक सम्मान है, बल्कि संघ के ‘राष्ट्र प्रथम’ के सिद्धांत पर केंद्रित उसके दीर्घकालिक सामाजिक योगदान को भी रेखांकित करती है।

समग्र समाचार सेवा
पुरी, ओडिशा, 7 अक्टूबर 2025: ओडिशा के पुरी समुद्र तट पर प्रसिद्ध रेत कलाकार और पद्मश्री सुदर्शन पट्टनायक ने अपनी कला का एक और अद्भुत प्रदर्शन किया है। इस बार उनकी कला का विषय है राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का शताब्दी वर्ष। आरएसएस की स्थापना को पूरे 100 साल हो गए हैं, और इस ऐतिहासिक अवसर का स्वागत पट्टनायक ने अपनी अनूठी शैली, यानी रेत कला के माध्यम से किया है।

सोमवार शाम को जैसे ही यह विशाल रेत कलाकृति पूरी हुई, पुरी समुद्र तट पर जमा हुई भीड़ इस अद्भुत रचना को देखकर मंत्रमुग्ध हो गई। सुदर्शन पट्टनायक, जो अपनी कला के माध्यम से राष्ट्रीय और सामाजिक महत्व के विषयों को उजागर करने के लिए विश्वभर में जाने जाते हैं, ने इस कलाकृति को संघ के ‘राष्ट्र प्रथम’ के दर्शन के प्रति एक सांस्कृतिक श्रद्धांजलि के रूप में तैयार किया है।

100 साल की सेवा और संस्कृति का प्रतीक

पद्मश्री पट्टनायक द्वारा बनाई गई इस कलाकृति में संघ के 100 वर्षों की यात्रा का जीवंत चित्रण है। इस विशाल सैंड आर्ट में संघ के प्रतीक और भारत माता की छवि को बड़ी ही बारीकी से उकेरा गया है। कलाकृति में ‘100 वर्ष’ और ‘शताब्दी वर्ष’ जैसे संदेशों को भी प्रमुखता से दर्शाया गया है, जो इस मील के पत्थर को रेखांकित करते हैं।

संघ की स्थापना डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार द्वारा 1925 में विजयादशमी के दिन नागपुर में की गई थी। आरएसएस अपनी स्थापना के शताब्दी वर्ष को एक विशेष आयोजन के रूप में मना रहा है, जिसके तहत देशभर में विविध कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। सुदर्शन पट्टनायक की यह कलाकृति इसी उत्सव की श्रृंखला में एक महत्वपूर्ण और भावनात्मक कड़ी है।

कला, संस्कृति और राष्ट्रभावना का संगम

सुदर्शन पट्टनायक ने अक्सर अपनी कलाकृतियों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक जागरूकता और राष्ट्रीय गौरव के संदेश दिए हैं। आरएसएस के शताब्दी वर्ष पर उनकी यह रचना उनके इसी दृष्टिकोण को आगे बढ़ाती है। इस रेत कला को देखने के लिए बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, पर्यटक और संघ के स्वयंसेवक एकत्र हुए।

इस अवसर पर पट्टनायक ने कहा कि यह कलाकृति संघ के उन लाखों स्वयंसेवकों के त्याग और निःस्वार्थ सेवा को समर्पित है, जिन्होंने एक सदी से अधिक समय तक राष्ट्र निर्माण और सामाजिक उत्थान के लिए काम किया है। उन्होंने जोर दिया कि रेत कला एक क्षणभंगुर माध्यम है, लेकिन इसके माध्यम से दिया गया संदेश चिरस्थायी होता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह कलाकृति युवाओं को राष्ट्र सेवा के लिए प्रेरित करेगी। यह भव्य कलाकृति पुरी समुद्र तट को राष्ट्रीय चेतना और कलात्मक अभिव्यक्ति के केंद्र में लाती है, जो संघ के शताब्दी वर्ष के गौरव को खूबसूरती से प्रदर्शित करती है।

 

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