गोविंदगंज से तीन बार की विधायक मीना द्विवेदी जन सुराज में शामिल
जदयू को लगा बड़ा झटका, मीना द्विवेदी के साथ सैकड़ों समर्थकों ने थामा प्रशांत किशोर का हाथ।
- तीन बार की जदयू विधायक मीना द्विवेदी ने प्रशांत किशोर की पार्टी जन सुराज में शामिल होने का ऐलान किया है।
- उनके इस कदम को आगामी बिहार विधानसभा चुनाव से पहले नीतीश कुमार की पार्टी जदयू के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।
- मीना द्विवेदी के साथ उनके सैकड़ों समर्थकों ने भी जन सुराज की सदस्यता ग्रहण की, जिससे चंपारण की राजनीति में हलचल मच गई है।
समग्र समाचार सेवा
पटना, 19 सितंबर, 2025: बिहार की राजनीति में, खास तौर पर पूर्वी चंपारण के गोविंदगंज विधानसभा क्षेत्र में, एक बड़ा सियासी उलटफेर हुआ है। गोविंदगंज से तीन बार की विधायक रह चुकीं मीना द्विवेदी ने अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ प्रशांत किशोर की नई पार्टी जन सुराज में शामिल होने का फैसला किया है। उनके इस कदम को बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जदयू के लिए एक करारा झटका माना जा रहा है। मीना द्विवेदी को चंपारण क्षेत्र में एक लोकप्रिय और अनुभवी नेता के रूप में जाना जाता है, जिनके परिवार का इस क्षेत्र की राजनीति में लंबे समय से दबदबा रहा है।
मीना द्विवेदी के जन सुराज में शामिल होने का स्वागत करते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि उनके जैसे अनुभवी और लोकप्रिय नेता का आना पार्टी को मजबूती देगा। प्रशांत किशोर ने मीना द्विवेदी और उनके समर्थकों को पीले रंग का गमछा पहनाकर पार्टी में उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। उन्होंने कहा कि मीना द्विवेदी के अनुभव और क्षेत्र में उनकी गहरी पकड़ का जन सुराज को सीधा फायदा मिलेगा, जिससे आगामी चुनावों में पार्टी को चंपारण में अपनी स्थिति मजबूत करने में मदद मिलेगी।
मीना द्विवेदी का यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दिखाता है कि कैसे बिहार के कई पारंपरिक राजनेता अब प्रशांत किशोर के ‘जन सुराज’ आंदोलन की ओर आकर्षित हो रहे हैं। यह आंदोलन बिहार की जमीनी राजनीति को बदलने और एक नए विकल्प के रूप में उभरने की कोशिश कर रहा है। मीना द्विवेदी जैसे कद के नेता का साथ मिलना जन सुराज के लिए एक बड़ी जीत है और यह निश्चित रूप से जदयू के चुनावी समीकरणों को प्रभावित करेगा।
मीना द्विवेदी का परिवार दशकों से चंपारण की राजनीति में सक्रिय रहा है। उनके पति देवेंद्रनाथ द्विवेदी, जिन्हें लोग प्यार से ‘देबू बाबू’ कहते थे, भी एक प्रमुख राजनीतिक हस्ती थे। उनकी विरासत को आगे बढ़ाते हुए मीना द्विवेदी ने खुद को एक मजबूत नेता के रूप में स्थापित किया है। उनके समर्थकों का मानना है कि जन सुराज के साथ मिलकर वे अपने क्षेत्र के विकास के लिए और भी बेहतर काम कर पाएंगी। इस घटनाक्रम से यह भी स्पष्ट होता है कि बिहार में चुनावी बिसात बिछाई जा चुकी है और सभी दल अपने-अपने समीकरणों को मजबूत करने में लगे हैं। आने वाले समय में, यह देखना दिलचस्प होगा कि मीना द्विवेदी के इस कदम का चुनाव परिणामों पर क्या असर होता है।
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