
“भय बिन होय न प्रीत” – भारत ने 7 मई, 2025 की प्रभात बेला में ऑपरेशन सिंदूर को सफलतापूर्वक अंजाम देकर एक अभूतपूर्व कीर्तिमान स्थापित किया। यह अभियान 22 अप्रैल, 2025 को जम्मू–कश्मीर के पहलगाम में हुए क्रूर, अमानवीय आतंकवादी हमले का न्याय था, जिसमें 26 निर्दोष लोगों की उनके बच्चों और पत्नियों के सामने गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। आतंकवादियों ने लोगों की धर्म पूछकर उनकी हत्या की। यह नरसंहार मानवता पर एक प्रहार था। विश्व में अपनी तरह के प्रथम प्रहार में, भारत ने वह कर दिखाया जो अब तक विश्व का कोई अन्य राष्ट्र न कर सका। मात्र 23 मिनटों में, भारतीय सशस्त्र बलों (थलसेना, वायुसेना, नौसेना) ने PoJK और पाकिस्तान में 9 आतंकी अड्डों, प्रशिक्षण शिविरों और उनके आधारभूत ढाँचों को ध्वस्त कर 100 से अधिक आतंकियों को मिट्टी में मिला दिया ।
ये प्रहार “सटीक, समानुपातिक, संयमित, गंभीर “और बिना किसी अनावश्यक क्षति के थे । पाकिस्तानी सेना ने हमारे नागरिक क्षेत्रों, तीर्थस्थलों, विद्यालयों और सैन्य प्रतिष्ठानों पर हमला किया, फिर भारतीय सेना ने जवाबी हमले में पाकिस्तान के 11 हवाई अड्डों को ध्वस्त कर उसकी हृदय और आत्मा को झकझोर दिया। यह ऑपरेशन विश्व के इतिहास में एक अनूठे सैन्य अभियान के रूप में लिखा जाएगा। राष्ट्र को अपनी वीर सेना, यशस्वी प्रधानमंत्री मोदी और उनकी टोली पर गर्व है। भारत ने विश्व को शांति का नवीन मार्ग दिखाया है, कि आतंकवाद के विरुद्ध कैसे दृढ़ता से कदम उठाए जाएं। विश्व ने देखा, कैसे भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान की वायु रक्षा प्रणाली को भेदा और हमारी रक्षा प्रणाली ने उनके ड्रोनों और मिसाइलों को निष्प्रभावी किया। इस अकल्पनीय, अविश्वसनीय अभियान की गुणवत्ता और विस्तार को देखकर, कोई भी भारतीय बुद्ध की रहस्यमयी मुस्कान के साथ यह सोचने से खुद को रोक नहीं सकता कि हमने क्या हासिल किया, और आगे का रास्ता क्या है?
भारत ने विश्व को स्पष्ट संदेश दिया कि अब एक नया भारत जन्म ले चुका है, जो अपने जनमानस के विरुद्ध आतंकवाद के किसी भी कृत्य को बर्दाश्त नहीं करेगा, न ही परमाणु ब्लैकमेल को स्वीकार करेगा। प्रत्येक आतंकी कृत्य को “युद्ध का कृत्य” माना जाएगा। शक्ति का उपयोग संस्कारों से निर्देशित होना चाहिए, अन्यथा रावण के पास भी शक्ति थी! शक्ति का प्रयोग शांति, प्रगति, विवेक और नैतिकता के लिए होना चाहिए। ऑप–सिंदूर ने आतंकवाद के विरुद्ध युद्ध को पुनर्परिभाषित किया है, एक नवीन मानदंड स्थापित किया है, जो दृढ़ संकल्प, साहस, विश्वास, सामर्थ्य, प्रौद्योगिकी, नैतिकता, और चतुर कूटनीति का प्रतीक है। इसने विश्व को दिखाया कि संकटकाल में कैसे सारा भारत एकजुट होकर खड़ा रहता है। सेना, खुफिया तंत्र, इसरो, डीआरडीओ, रक्षा अनुसंधान, और सीमा सुरक्षा बलों में जनता का विश्वास नई उचाइयाँ छू रहा है। भारतीय वायुसेना ने अपनी तकनीकी प्रभुता को सिद्ध किया है।
भारत ने पाकिस्तान के शस्त्रों पर, जो मुख्यतः चीन, तुर्की आदि द्वारा आयात किए गए थे, तकनीकी श्रेष्ठता सिद्ध की है। यह हमारे युवाओं को सशस्त्र बलों, रक्षा, अंतरिक्ष और खुफिया क्षेत्रों आदि को कैरियर चुनने के लिए उत्साहित करेगा, और विकसित भारत तथा विश्व गुरु बनने की भारत की यात्रा को एक सशक्त प्रेरणा प्रदान करेगा।
वैश्विक गतिशीलता
विश्व ने साक्षात देखा कि पाकिस्तानी सेना और आईएसआई के अधिकारी आतंकियों के अंतिम संस्कार में, जो पाकिस्तान के ध्वज में लिपटे थे, सम्मिलित हुए। ऑप–सिंदूर के पश्चात, विश्व ने देखा कि आईएमएफ ने पाकिस्तान को अरबों डॉलर का ऋण स्वीकृत किया। क्या यह विकास कार्यों के लिए था, या आतंकवाद को और पोषित करने हेतु हथियार खरीदने के लिए? पाकिस्तान में दो तुर्की ड्रोन–ठेकेदारों की मृत्यु हुई। चीन के उपग्रहों ने पाक सेना का सहयोग किया। ऑप–सिंदूर के बाद, अंतरराष्ट्रीय मंच पर कुछ अन्य घटनाएं अनदेखी नहीं की जा सकतीं, जैसे – अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रम्प का मध्य पूर्व दौरा (13-16 मई) और सीरियाई अंतरिम राष्ट्रपति से भेंट, अमेरिका–चीन के शीर्ष अधिकारियों की व्यापार–टैरिफ वार्ता, अमेरिका द्वारा दो जिहादियों को व्हाइट हाउस सलाहकार बोर्ड में शामिल करना। अमेरिका म्यांमार के राखाइन (म्यान्मार) में रोहिंग्याओं के लिए एक सुरक्षित क्षेत्र का निर्माण कर रहा है – क्या मानवीय आधार पर निर्मित यह क्षेत्र भविष्य में किसी अन्य उद्देश्य के लिए उपयोग हो सकता है? साथ ही, बांग्लादेश कथित तौर पर चीन की सहायता से हमारे चिकन–नेक क्षेत्र (सिलीगुड़ी कॉरिडोर) के समीप एयरबेस स्थापित करने का प्रयास कर रहा है। क्या यह चिंताजनक नहीं? हमे डीप–स्टेट को भी नहीं भूलना चाहिए? अनेक देशों के निजी स्वार्थ PoK और उत्तर–पूर्वी भारत में हैं। वे हमें शांति से जीने नहीं देंगे। वैश्विक राजनीति की जटिल गतिशीलता को समझते हुए, हमें कूटनीतिक रूप से अन्य देशों के साथ मित्रता निभानी होगी, सतर्कता के साथ, और आवश्यकता पड़ने पर कठोरता से कदम उठाना होगा।
देशद्रोही – हमें उन राष्ट्र–विरोधी शक्तियों को पहचानना होगा, जो बाह्य और आंतरिक रूप से भारत को खंडित करने का प्रयास करती हैं। हाल ही में, देश के विभिन्न भागों से 15 भारतीय नागरिक पाकिस्तान के लिए जासूसी करते पकड़े गए। इनमें youtuber ज्योति मल्होत्रा, गजाला, अरमान, मोहम्मद, सिंह (3), तारीफ, इलाही, अली, शहजाद शामिल हैं। केवल धन के लालच में उन्होंने अपनी मातृभूमि को बेच दिया? क्या उनके हृदय और विवेक में कोई संवेदना शेष नहीं? यदि समस्त नागरिक एकजुट हों तो कोई भी राष्ट्र–विघटनकारी गतिविधि सफल नहीं हो सकती । इतिहास गवाह है कि जयचंद, मीर जफर, मान सिंह, मिर्जा राजा जय सिंह जैसे गद्दारों के कारण हम पहले पराजित हुए थे, और आज भी वे विभिन्न नामों, चेहरों और पहचानों में विद्यमान हैं। ऐसे तत्वों से सावधान रहते हुए उनकी जानकारी तुरंत अधिकारियों को दी जानी चाहिए। राजनेताओं को विदेशी दौरों में भारत–विरोधी बयान देने से बचना होगा और देश में भी गैर–जिम्मेदाराना कथन देने से परहेज करना होगा।
भविष्यगामी पथ – ऑप–सिंदूर के पश्चात, भारत एक सशक्त राष्ट्र के रूप में उभरा है, और सशक्त होने से सम्मान मिलता है। आतंकवाद से पीड़ित विश्व के राष्ट्रों में एक नवीन प्रेरणा जागी है कि भारत आगामी समय में मानवता की रक्षा हेतु आशा की किरण बन सकता है। हमारे स्वदेशी मिसाइलों, राडार प्रणालियों, ड्रोनों, निगरानी प्रणालियों, खुफिया और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की सिद्ध तकनीकी श्रेष्ठता के साथ, आतंकवाद के विरुद्ध अन्य देशों का समर्थन करने में भारत अवश्य अग्रणी रहेगा ।
प्रगति के साथ, कुछ शक्तियाँ हमें नीचे खींचने का प्रयास करेंगी – यही संसार का नियम है। भारत को खंडित करने का प्रयास करने वाली बाहरी शक्तियाँ उत्तर–पूर्वी भारत और पड़ोसी बांग्लादेश में अधिक सक्रिय हो रही हैं। यह गंभीर चिंता का विषय है। हमें सतर्क, सजग और एकजुट रहना होगा। बाहरी समर्थन से, बांग्लादेश पश्चिम बंगाल और उत्तर–पूर्व में निरंतर उपद्रव उत्पन्न कर रहा है। यह समय की पुकार है कि नागरिक इन संक्षारक साजिशों को समझें और प्राधिकारियों के साथ सहयोग करें। अवैध अप्रवासियों, कट्टरपंथी शक्तियों और राष्ट्र–विघटनकारी ताकतों को वित्तीय और रसद सहायता बंद करनी होगी। चीनी, तुर्की और बांग्लादेशी उत्पादों का बहिष्कार करें। जनमानस को अपनी मानसिकता को परिवर्तित करना होगा।
क्या सभी शांति और समृद्धि की कामना नहीं कर सकते? विश्व के नेता व्यापार, व्यवसाय और अस्वस्थ प्रतिस्पर्धा के पीछे क्यों पड़े हैं? उन्हें दोहरे मापदंडों का खेल बंद करना होगा – अपने देश में आतंकवाद को रोकना, किंतु अन्य देशों के विरुद्ध आतंकवाद को प्रोत्साहन देना। विश्व ने गत अगस्त में बांग्लादेश में हुए घटनाक्रम को देखा। आतंकवाद की जड़ों के पीछे की विचारधारा को मिटाना होगा – देश के भीतर रहने वाली राष्ट्र–विरोधी ताकतों को इस जिम्मेदारी को समझना होगा। भारतीय दर्शनशास्त्र में एक विचार है:“पापी से घृणा न करो, पाप का उन्मूलन करो”
और आज के वैश्विक आतंकवाद के संदर्भ में, पापी, पाप और पापी का समर्थन करने वाले हर तत्व को समाप्त करना होगा। आतंकवाद किसी राष्ट्र का भला नहीं कर सकता। विश्व को यह सत्य समझना होगा और तदनुरूप कार्य करना होगा।
सीमावर्ती क्षेत्रों में निवास करने वाले हमारे नागरिकों की समस्याओं का समाधान करना होगा, ताकि वहाँ अधिक प्रगति और विकास हो, और युवाओं को पर्याप्त रोजगार के अवसर प्राप्त हों। इससे युवा राष्ट्र की शांति और विकास प्रक्रिया से जुड़ेंगे, और आतंकवादी, जो धन के लालच में युवाओं को भटकाते हैं, निराश होंगे। इन समस्याओं को जमीनी स्तर पर संबोधित करना होगा, केवल सतही नीतियाँ पर्याप्त नहीं। दशकों से पीड़ित स्थानीय जनों को संवेदनशीलता और सहानुभूति के साथ जोड़ा जाना चाहिए। हमारी सुरक्षा बलों को उत्तर–पूर्व सहित सभी सीमाओं पर और अधिक सजग रहना होगा। सीमाओं को और अभेद्य बनाना होगा। सुरक्षा बलों का मनोबल बढ़ाने हेतु नागरिकों के साथ समय–समय पर कार्यक्रम आयोजित किए जाएं, और उनकी समस्याओं का समाधान प्रभावी ढंग से हो। साथ ही, युद्ध प्रौद्योगिकियों को निरंतर उन्नत करना होगा, रक्षा अनुसंधान पर बल देना होगा। हमारे छात्रों/युवाओं को इस प्रयास में सहभागी बनना चाहिए ।
दायित्व – शक्ति के साथ दायित्व आता है। ऑप–सिंदूर ने भारतवासियों की दायित्वशीलता में एक और वृद्धि की है ,वह है – मानवता की रक्षा का दायित्व। भारत को यह कर्तव्य निष्ठापूर्वक निभाना होगा। यह भारत का युग है। आइए, हम अपने राष्ट्र को इतना सशक्त और समृद्ध बनाएँ कि हम अपनी आवश्यकताओं के लिए अन्य देशों पर न्यूनतम निर्भर हों। सहस्राब्दियों पुरानी सनातन धर्म की पावन भूमि होने के नाते, हमारा कर्तव्य है कि हम विश्व को शांति, समृद्धि और आध्यात्मिकता का मार्ग दिखाएँ – सभी धर्मों के लिए।