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ml. Nathan

ज़िन्दगी का स्वांग

*एम.एल. नत्थानी अक्सर खुले गगन में मन उन्मुक्त उड़ना चाहता है बंदिशों की बेड़ियों से दूर फिर विचरना चाहता है । मंजिल सामने खड़ी जैसे ये पैरों में बेड़ियां होती है अधूरी हसरतों के साथ आंखों में लड़ियां होती हैं…
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