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वैश्विक मानवतावाद की राजनीति पर भारतीय दृष्टिकोण

बांग्लादेश -मानवतावाद या चयनात्मक संवेदना? एक असहज सवाल

पूनम शर्मा आज के दौर में “विश्व मानवतावाद”, “सर्वधर्म समभाव” और “वैश्विक नैतिक नेतृत्व” जैसे शब्द जितनी आसानी से बोले जाते हैं, उतनी ही आसानी से वे खोखले भी हो जाते हैं। सवाल शब्दों का नहीं, चयन का है—किस पीड़ा पर आवाज़ उठती है और किस पर…
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