अब कोरोना मरीज की देखभाल करना होगा आसान, रोबोट ग्रेस बनेंगी नर्स तो थर्मल कैमरा बताएगा मरीज का टेम्परेचर
समग्र समाचार सेवा
दिल्ली, 12 जून। देश में कोरोना महामारी के आतंक से सारी दुनिया जुंझ रही है। पिछले एक साल से ना ही इसके ईलाज के लिए दवा बन पाई है ना ही इसके कोई एक लक्षण का ही पता चल सकेगा। कोरोना संक्रमण आए दिन अपने लक्षणों में भी परिवर्तन करता रहता है। जिससे इस बीमारी की पहचान भी देश में मुश्किल हो रही है। हां इतना जरूर पता चल सका है कि यह एक छुआछुत की बीमारी है। यानि अगर बीना सावधानी के कोरोना संकमित के करीब चले गए तो दूसरे को भी संक्रमण की संभावना 90% बढ़ सकती है।
अब ऐसे देश के डॉक्टरों के लिए कोरोना संक्रमित व्यक्ति का ईलाज करना बहुत बड़ी चुनौति है। ये और बात है कि देश के डॉक्टरों ने यह साबित कर दिया है कि वास्तव में वे ही भगवान का दूसरा रूप है। डॉक्टर और नर्सों ने बीना अपनी जान की परवाह किए कोरोना संक्रमितो का ईलाज किया है। बहुत को ऐसी बीमारी ना जिसकी दवा है ना जिसका एक लक्षण को बचाया है। हालांकि इस दौरान कई डॉक्टर और नर्सों नें अपनी जान की आहूती भी दे दी है। क्योंकि ईलाज के दौरान वे भी संक्रमित हुए और खुद को नहीं बचा सके। लेकिन अब डॉक्टर्स और नर्सों की मदद के लिए हांग कांग की कंपनी हैनसन ने एक ऐसे फीमेल रोबोट का आविष्कार किय़ा है जो कोरोना मरीजो की देखभाल विल्कुल नर्स की तरह ही करेंगी। इसके साथ ही यह मरीज का टेम्परेचर भी चेक कर सकेगी।

दरअसल, ये रोबोट आइसोलेट कोरोना मरीजों की देखभाल एक नर्स जैसे ही करेगी। ऐसे में हेल्थ वर्कर्स को संक्रमण से बचाया जा सकेगा।
इस नीले रंग के फीमेल रोबोट के यूनिफॉर्म में खड़े ग्रेस रोबोट के चेस्ट में थर्मल कैमरा फिट है। ये कैमरा टेम्परेचर चेक करके आपकी तबीयत का पता लगा लेगा। ये अर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए मरीज की परेशानी को समझकर उसे इंग्लिश, मेंडेरिन और कैटोनीज भाषा में रिप्लाई करता है।
ग्रेस को बनाने वाली कंपनी हैनसन ने हांगकांग की रोबोटिक्स वर्कशॉप में इसके बोलने की टेस्टिंग की है। टेस्टिंग के बाद कंपनी ने कहा कि ‘ग्रेस’ लोगों के साथ चल सकती है और इलाज के लिए जरूरी रीडिंग देने में सक्षम है। ये रोबोट बायो रीडिंग, टॉक थेरेपी और दूसरी हेल्थ केयर मदद भी कर सकती है।
इंसानों की तरह बातें करने वाली यह रोबोट हम-आप जैसी ही दिखती है। ‘ग्रेस’ चेहरे के 48 से अधिक हावभाव को पहचान लेती है। इसको किसी एनिमेशन के कैरेक्टर की तरह डिजाइन किया गया है।
हैनसन रोबोटिक्स और सिंगुलैरिटी स्टूडियो के जॉइंट वेंचर के चीफ डेविड लेक के मुताबिक कंपनी का मकसद हेल्थ को लेकर अवेयरनेस बढ़ाना है। इसी के तहत हम ‘ग्रेस’ के बीटा यानी शुरुआती वर्जन का बड़े पैमाने पर प्रोडक्शन करने की प्लानिंग कर रहे हैं। फिलहाल इसे चीन के साथ जापान और कोरिया के हेल्थ सेंटर्स में रखा जाएगा। हैनसन ने कहा कि रोबोट बनाने की कॉस्ट एक लग्जरी कार की कीमत के बराबर आई है। हालांकि उन्होंने इसकी कीमत का खुलासा नहीं किया। लेकिन ये जरूर कहा कि प्रोडक्शन के तय लक्ष्य के बाद कीमत को कम किया जाएगा।
हवाई यूनिवर्सिटी के कम्युनिकेशन साइंस के प्रोफेसर किम मिन-सन ने कोरोना मरीजों के लिए इस फीमेल रोबोट इस्तेमाल करने पर जोर दिया है। उनका कहना है कि लॉकडाउन के दौरान लोग घर पर फंसे हुए थे। निगेटिव थिंकिंग की वजह से लोगों के मेंटल हेल्थ को नुकसान पहुंचा है। उन्होंने कहा कि ये रोबोट काफी कारगर होगा, अगर ये किसी को दोस्त या ख्याल रखने वाली नर्स की तरह फील कराता है।