समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 19मई। एक तो कोरोना महामारी और अगर उससे बच गए तो ब्लैक फंगस..जी हां कोरोना महामारी से ठीक होने के बाद अब देश में एक नई समस्या हो गई है वो है ब्लैक फंगस। ब्लैक फंगस भी लोगों के लिए खतरनाक साबित हो रही है। ब्लैक फंगस को म्यूकरमायकोसिस भी कहते है।
सरकार व विभागीय अधिकारियों ने आमलोगों के लिए एडवाइजरी भी जारी किए है।
बता दें कि ब्लैक फंगस मात्र कोरोना महामारी से ठीक होने के बाद ही कुछ लोगों में पाए गए है। यह मुख्य रूप से चेहरे, नाक, आंख, कान, दिमाग आदि को प्रभावित करता है।
किसे हो सकता है म्यूकरमायकोसिस
ब्लैक फंगस कोरोना पीड़ित ऐसे व्यक्ति को होता है जिसे कोरोना पॉजिटिव होने के बाद इलाज के दौरान डेक्सामथाजोन, मिथाइल प्रेडनिसोलोन आदि स्टेरॉयड दवा दी गई हो या मरीज को अधिक समय तक आइसीयू में रखा गया हो या अधिक समय तक ऑक्सीजन दिया गया हो या मरीज को मधुमेह , किडनी ट्रांसप्लांट आदि के लिए दवा दी गई हो, तो ऐसे लोगों में ब्लैक फंगस होने का अधिक खतरा है।
क्या हैं लक्षण?
– बुखार, सिरदर्द, खांसी, सांस फूलना।
– नाक बंद होना, बलगम के साथ नाक से खून बहना।
– आंख में दर्द होता है, आंख सूज जाती है, दो-दो दिखाई देने लगते हैं या दिखना बंद हो जाता है।
– चेहरे के एक तरफ दर्द, सूजन या सुन्न पड़ जाना मतलब छूने पर स्पर्श महसूस न होना।
– दांत दर्द, दांत हिलने लगते हैं और चबाना दर्द होता है।
– उल्टी या खांसने पर बलगम से खून आता है।
लक्षण पता चलने पर क्या करना है
लक्षण समझ में आने पर फौरन चिकित्सक या अस्पताल से संपर्क करें। समस्या के अनुसार नाक, कान, गले, आंख, सीना आदि के विशेषज्ञ चिकित्सक से संपर्क कर इलाज आरंभ कराएं।
स्वयं या किसी अन्य डॉक्टर के कहने पर स्टेरॉयण, डेक्सोना और मेड्रोल का उपयोग कतई ना करें।