पूनम शर्मा
पश्चिम बंगाल की राजनीति में मतदाता सूची को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता दिलीप घोष ने गुरुवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि राज्य की जनता बदलाव चाहती है और आगामी विधानसभा चुनावों के बाद उनके जाने का समय आ गया है।
पत्रकारों से बातचीत में दिलीप घोष ने कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का राजनीतिक तरीका केवल धरना और विरोध तक सीमित रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने केंद्र सरकार की कई योजनाओं और उससे मिलने वाले फंड को आम लोगों तक पहुंचने ही नहीं दिया।
उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री ने केवल धरने दिए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जनता के लिए जो योजनाएं दी गईं, उन्हें भी लोगों तक पहुंचने नहीं दिया गया। अब समय आ गया है कि वे सत्ता से जाएं।”
दरअसल, तृणमूल कांग्रेस ने राज्य में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। पार्टी का आरोप है कि इस प्रक्रिया में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं।
इसी मुद्दे को लेकर तृणमूल कांग्रेस ने विरोध प्रदर्शन का फैसला किया है। पार्टी के सांसद अभिषेक बनर्जी ने रविवार को घोषणा की थी कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी 6 मार्च को कोलकाता के एस्प्लेनेड स्थित मेट्रो चैनल में दोपहर 2 बजे से धरना देंगी।
तृणमूल कांग्रेस का कहना है कि मतदाता सूची में कई तरह की विसंगतियां सामने आई हैं, जिनके खिलाफ यह विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है।
वहीं, चुनाव आयोग की ओर से हाल ही में पश्चिम बंगाल की अंतिम मतदाता सूची जारी की गई है। यह सूची राज्य में किए गए विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद तैयार की गई है।
आयोग के मुताबिक दिसंबर 2025 में प्रारूप सूची जारी होने के बाद फॉर्म-7 के जरिए 5,46,053 मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं।
नई मतदाता सूची के अनुसार अब पश्चिम बंगाल में कुल मतदाताओं की संख्या 7,04,59,284 यानी करीब 7.04 करोड़ रह गई है। इससे पहले राज्य में कुल 7,66,37,529 यानी लगभग 7.66 करोड़ मतदाता दर्ज थे।
इस तरह संशोधन की प्रक्रिया के बाद मतदाता सूची में कुल मिलाकर 61 लाख से अधिक नामों का अंतर देखा गया है। इसी बदलाव को लेकर राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी लगातार सवाल उठा रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए यह मुद्दा राज्य की राजनीति में बड़ा चुनावी विषय बन सकता है।
इस बीच दिलीप घोष ने बिहार की राजनीति को लेकर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा चुनाव लड़ने के फैसले पर कहा कि नीतीश कुमार एक वरिष्ठ और अनुभवी नेता हैं और उन्होंने लंबे समय तक लोकसभा और राज्य की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
घोष ने कहा कि राजनीति में समय-समय पर नेताओं को नई जिम्मेदारियां दी जाती हैं और यह एक सामान्य प्रक्रिया है। उन्होंने यह भी कहा कि अब सभी की नजर बिहार के अगले मुख्यमंत्री के नाम पर है।
उन्होंने कहा, “वे एक वरिष्ठ नेता हैं। कई बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं और लंबे समय तक लोकसभा में भी रहे हैं। लोगों को नई जिम्मेदारियां मिलनी चाहिए। अब मैं अगले मुख्यमंत्री के नाम का इंतजार कर रहा हूं।”
बिहार में राज्यसभा की सीटों के लिए नामांकन प्रक्रिया चल रही है और इसी दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी नामांकन दाखिल करने के कार्यक्रम में शामिल होने वाले हैं।
पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची को लेकर बढ़ता विवाद और इस पर सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस तथा भाजपा के बीच तीखी बयानबाजी आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति को और गरमा सकती है।