समग्र समाचार सेवा
असम गुवाहाटी 27 फरवरी : में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले सत्तारूढ़ एनडीए (NDA) के भीतर सीट बंटवारे को लेकर चल रही कवायद अब निर्णायक मोड़ पर पहुँचती दिख रही है। मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma ने 10 मार्च को नई समयसीमा तय करते हुए कहा है कि तब तक गठबंधन के सभी सहयोगियों के साथ सीट-शेयरिंग समझौता अंतिम रूप ले लेगा।
गुरुवार को पत्रकारों से बातचीत में सरमा ने बताया कि कुछ सहयोगी दलों के साथ चर्चा अभी जारी है, लेकिन बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा, “बीपीएफ के साथ हमारी बातचीत एक-दो दिन में पूरी हो जाएगी। एजीपी के साथ 9-10 मार्च तक सब कुछ तय हो जाएगा। हमें उम्मीद है कि 10 मार्च तक हम औपचारिक घोषणा कर देंगे।”
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राभा हसोंग संयुक्त संघर्ष समिति (RHJSS) के साथ सीट बंटवारे पर सहमति बन चुकी है। हालांकि, Asom Gana Parishad (एजीपी) और Bodoland People’s Front (बीपीएफ) जैसे प्रमुख क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ अंतिम दौर की बातचीत जारी है।
एनडीए में इस समय भाजपा, एजीपी, United People’s Party Liberal (यूपीपीएल), बीपीएफ, आरएचजेएसएस और जनशक्ति पार्टी शामिल हैं। 126 सदस्यीय असम विधानसभा में भाजपा के पास 64 विधायक हैं, जबकि एजीपी के 9, यूपीपीएल के 7 और बीपीएफ के 3 विधायक हैं। आरएचजेएसएस और जनशक्ति पार्टी के पास फिलहाल कोई विधायक नहीं है।
विपक्षी खेमे में कांग्रेस के 26 विधायक, एआईयूडीएफ के 15, माकपा का एक और एक निर्दलीय विधायक शामिल है।
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब सीट बंटवारे को लेकर समयसीमा तय की गई है। 22 फरवरी को सरमा ने इसे “डन डील” बताया था। इससे पहले 7 जनवरी को उन्होंने 15 फरवरी तक समझौता पूरा करने की बात कही थी, जबकि दिसंबर में 15 जनवरी की डेडलाइन दी गई थी। बदलती समयसीमाएं इस बात का संकेत हैं कि गठबंधन की अंदरूनी राजनीति और क्षेत्रीय संतुलन साधना आसान नहीं है।
इस बार सीट बंटवारा 2023 की परिसीमन प्रक्रिया के बाद हो रहा है, जिसमें कई विधानसभा क्षेत्रों की सीमाएं बदली गई हैं। कुछ सामान्य सीटें आरक्षित श्रेणी में बदली गईं, तो कुछ आरक्षित सीटें सामान्य हो गईं। ऐसे में सभी दल नए सियासी समीकरणों के हिसाब से रणनीति तैयार कर रहे हैं।
मार्च-अप्रैल में संभावित विधानसभा चुनावों से पहले एनडीए की कोशिश है कि वह एकजुटता का संदेश दे और समय रहते उम्मीदवारों की घोषणा कर चुनावी अभियान को धार दे सके। अब सबकी निगाहें 10 मार्च पर टिकी हैं, जब असम की सियासत की अगली तस्वीर साफ हो सकती है।