समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली,24 फरवरी : शिक्षा जगत में एक अहम बदलाव करते हुए राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने अपनी नई कक्षा 8 सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक में पहली बार “न्यायपालिका में भ्रष्टाचार” पर चर्चा शामिल की है। यह कदम न केवल पाठ्यक्रम को अधिक यथार्थवादी बनाता है, बल्कि छात्रों को लोकतंत्र की चुनौतियों से भी परिचित कराता है।
न्यायपालिका की भूमिका से आगे बढ़कर चुनौतियों पर फोकस
अब तक की किताबें अदालतों की संरचना और उनकी भूमिका तक सीमित थीं। लेकिन नए संस्करण में “हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका” अध्याय में अदालतों की कार्यप्रणाली के साथ-साथ लंबित मामलों और भ्रष्टाचार जैसी समस्याओं पर भी प्रकाश डाला गया है।
सुप्रीम कोर्ट में लगभग 81,000 मामले लंबित हैं।
हाई कोर्ट में करीब 62.4 लाख मामले अटके हुए हैं।
जिला और अधीनस्थ अदालतों में 4.7 करोड़ से अधिक मामले लंबित हैं।
भ्रष्टाचार पर सीधी चर्चा
पुस्तक में बताया गया है कि न्यायाधीशों के लिए आचार संहिता होती है, जो अदालत के भीतर और बाहर उनके व्यवहार को नियंत्रित करती है। शिकायतों के लिए CPGRAMS प्रणाली का उल्लेख किया गया है, जिसके जरिए 2017 से 2021 के बीच 1,600 से अधिक शिकायतें दर्ज हुईं।
इसके अलावा, गंभीर आरोपों की स्थिति में संसद द्वारा महाभियोग की प्रक्रिया का भी विवरण दिया गया है। इसमें स्पष्ट किया गया है कि न्यायाधीश को निष्पक्ष सुनवाई का अवसर दिया जाता है और तभी संसद कार्रवाई करती है।
जनता की चिंताओं को मान्यता
किताब यह स्वीकार करती है कि आम लोग न्यायपालिका के विभिन्न स्तरों पर भ्रष्टाचार का अनुभव करते हैं। गरीब और वंचित वर्ग के लिए यह न्याय तक पहुंच को और कठिन बना देता है।
पारदर्शिता और तकनीक का सहारा
पाठ्यपुस्तक में यह भी बताया गया है कि राज्य और केंद्र स्तर पर पारदर्शिता बढ़ाने और जनता का विश्वास मजबूत करने के प्रयास किए जा रहे हैं। तकनीक का इस्तेमाल और भ्रष्टाचार के मामलों में त्वरित कार्रवाई इन प्रयासों का हिस्सा है।
पूर्व मुख्य न्यायाधीश का उद्धरण
जुलाई 2025 में पूर्व मुख्य न्यायाधीश बी. आर. गवई ने कहा था कि न्यायपालिका में भ्रष्टाचार और कदाचार की घटनाएं जनता के विश्वास को कमजोर करती हैं। उन्होंने जोर दिया कि “विश्वास को पुनः स्थापित करने का मार्ग पारदर्शी और निर्णायक कार्रवाई से ही निकलता है। पारदर्शिता और जवाबदेही लोकतांत्रिक गुण हैं।”
शिक्षा में नई दिशा
यह बदलाव छात्रों को केवल आदर्श स्थिति नहीं, बल्कि वास्तविक चुनौतियों से भी अवगत कराता है। इससे वे समझ पाएंगे कि लोकतंत्र में संस्थाओं की मजबूती केवल संरचना से नहीं, बल्कि पारदर्शिता और जवाबदेही से आती है।