समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली 24 फरवरी : कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार के उस ऐतिहासिक कदम की प्रशंसा की है, जिसमें राष्ट्रपति भवन में ब्रिटिश वास्तुकार एडविन लुटियंस की मूर्ति हटाकर स्वतंत्र भारत के पहले और एकमात्र भारतीय गवर्नर-जनरल चक्रवर्ती राजगोपालाचारी (राजाजी) की प्रतिमा स्थापित की गई।
थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर लिखा कि वे लंबे समय से राजाजी के मूल्यों की सराहना करते रहे हैं। उन्होंने राजाजी की उदार आर्थिक सोच, सामाजिक न्याय, भारतीय सभ्यता में विश्वास और संवैधानिक स्वतंत्रताओं के प्रति सम्मान को आज भी प्रासंगिक बताया।
राजगोपालाचारी भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख नेताओं में से एक थे और स्वतंत्र भारत के पहले भारतीय गवर्नर-जनरल बने। राष्ट्रपति भवन में उनकी प्रतिमा स्थापित करना न केवल उनके योगदान को सम्मानित करता है बल्कि यह भारत की ऐतिहासिक स्मृतियों को औपनिवेशिक छाया से मुक्त करने का प्रतीक भी है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अवसर को “मानसिक उपनिवेश-मुक्ति” की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि भारत को उन नेताओं को सम्मान देना चाहिए जिन्होंने देश की नियति को आकार दिया, न कि उन औपनिवेशिक प्रतीकों को जो हमारी विरासत पर हावी रहे।
अनावरण समारोह में *वंदे मातरम* की गूंज के साथ राष्ट्रभक्ति का माहौल बना। इस मौके पर भाजपा अध्यक्ष जे.पी. नड्डा, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और राजाजी के परिजन भी मौजूद रहे।
लुटियंस, जिन्होंने नई दिल्ली की कई इमारतों का डिजाइन तैयार किया था, औपनिवेशिक शासन का प्रतीक माने जाते हैं। उनकी जगह राजाजी की प्रतिमा का स्थापित होना भारतीय नेतृत्व और स्वाभिमान की पुनर्स्थापना का संदेश देता है।
थरूर का यह समर्थन खास मायने रखता है क्योंकि वे विपक्ष के वरिष्ठ नेता हैं। उनका यह बयान इस बात को रेखांकित करता है कि राजाजी जैसे महान नेताओं का सम्मान राजनीतिक सीमाओं से परे है।
यह कदम भारत के उस व्यापक प्रयास का हिस्सा है जिसमें संस्थानों, प्रतीकों और सार्वजनिक स्थलों को उपनिवेशवादी विरासत से मुक्त कर भारतीय मूल्यों और नेताओं के अनुरूप पुनर्परिभाषित किया जा रहा है। राष्ट्रपति भवन में राजाजी की प्रतिमा अब स्वतंत्र भारत की आत्मा और गौरव का प्रतीक बनकर खड़ी है।