बांग्लादेश में नए नेतृत्व के शपथ ग्रहण की तैयारियाँ ,प्रधानमंत्री मोदी आमंत्रित

सूत्रों के अनुसार भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाएँगे

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समग्र समाचार सेवा
बांग्लादेश, ढाका 15 फरवरी : बांग्लादेश में नए नेतृत्व के शपथ ग्रहण की तैयारियाँ  तेज हो गई हैं, जो देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में एक अहम पड़ाव माना जा रहा है। निर्वाचन आयोग द्वारा अंतिम परिणाम घोषित किए जाने के बाद राजधानी ढाका सहित कई शहरों में समर्थकों ने जश्न मनाया।
प्रधानमंत्री-नामित नेता ने आर्थिक सुधार, पारदर्शी प्रशासन और रोजगार सृजन को प्राथमिकता देने की बात कही है। उन्होंने समावेशी विकास और संस्थागत मजबूती पर जोर देते हुए राष्ट्रीय एकता का आह्वान किया। नई सरकार के सामने महंगाई नियंत्रण, निर्यात क्षेत्र को मजबूत करने और बुनियादी ढांचे के विस्तार जैसी चुनौतियां प्रमुख होंगी।

इस बीच, शपथ ग्रहण समारोह को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा तेज है। सूत्रों के अनुसार भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाएंगे। बताया जा रहा है कि वे मुंबई में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ द्विपक्षीय वार्ता में व्यस्त रहेंगे। यह बैठक भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के उद्देश्य से आयोजित की जा रही है।

मुंबई बैठक के बाद प्रधानमंत्री मोदी नई दिल्ली में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट की अध्यक्षता करेंगे, जहां कृत्रिम बुद्धिमत्ता के सामाजिक और आर्थिक प्रभावों पर चर्चा की जाएगी। इसी व्यस्त कार्यक्रम के कारण उनके बांग्लादेश दौरे की संभावना कम बताई जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मोदी की अनुपस्थिति के बावजूद भारत और बांग्लादेश के संबंधों पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा। दोनों देशों के बीच व्यापार, कनेक्टिविटी, ऊर्जा सहयोग और सुरक्षा साझेदारी मजबूत आधार पर टिकी हुई है। माना जा रहा है कि भारत की ओर से उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल समारोह में शामिल हो सकता है।

बांग्लादेश इस समय आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा है, जिनमें निर्यात बाजार में प्रतिस्पर्धा, विदेशी निवेश आकर्षित करने की आवश्यकता और उद्योगों का विविधीकरण शामिल है। नई सरकार से अपेक्षा की जा रही है कि वह फ्रांस और चीन जैसे प्रमुख वैश्विक साझेदारों के साथ सहयोग को और आगे बढ़ाएगी।
अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों ने चुनाव प्रक्रिया को शांतिपूर्ण बताया है, हालांकि विपक्षी दलों ने पारदर्शिता और लोकतांत्रिक संवाद को मजबूत करने की मांग की है। सत्ता हस्तांतरण के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।
जनता को उम्मीद है कि नई सरकार रोजगार सृजन, महंगाई नियंत्रण और सामाजिक कल्याण योजनाओं पर ठोस कदम उठाएगी। आने वाले दिनों में मंत्रिमंडल गठन और नीतिगत घोषणाओं पर देश और क्षेत्र की नजरें टिकी रहेंगी।

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