समग्र समाचार सेवा
बांग्लादेश ,ढाका 13 फरवरी — दो दशकों के लंबे इंतजार के बाद, बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने देश के 13वें संसदीय चुनाव में प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में वापसी की है। इस ऐतिहासिक जीत ने न केवल शेख हसीना के 15 साल के शासन के बाद बने राजनीतिक शून्य को भरा है, बल्कि तारिक रहमान के लिए देश का अगला प्रधानमंत्री बनने का रास्ता भी साफ कर दिया है।
12 फरवरी, 2026 को हुए मतदान के बाद आए रुझानों और आधिकारिक घोषणाओं के अनुसार, बीएनपी और उसके सहयोगियों ने 299 सीटों में से 212 से अधिक सीटों पर जीत दर्ज की है।
चुनाव के मुख्य आंकड़े और परिणाम
चुनाव आयोग ने पुष्टि की है कि इस बार मतदान प्रतिशत लगभग 59.44% रहा, जो पिछले चुनावों की तुलना में काफी बेहतर है। अवामी लीग की अनुपस्थिति में यह मुकाबला मुख्य रूप से बीएनपी और जमात-ए-इस्लामी के बीच था।
श्रेणी विवरण
कुल सीटें 299 (1 सीट पर उम्मीदवार की मृत्यु के कारण चुनाव स्थगित)
बीएनपी की सीटें 212+ (दो-तिहाई बहुमत)
जमात-ए-इस्लामी 70 सीटें
राष्ट्रीय नागरिक पार्टी (NCP) 06 सीटें
मुख्य चेहरा तारिक रहमान (ढाका-17 और बोगरा-6 दोनों सीटों से विजयी)
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और भारत का रुख
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को तारिक रहमान से फोन पर बात की और उन्हें इस “शानदार जीत” के लिए बधाई दी। पीएम मोदी ने विश्वास जताया कि रहमान के नेतृत्व में बांग्लादेश के लोगों की आकांक्षाएं पूरी होंगी और भारत एक “लोकतांत्रिक, प्रगतिशील और समावेशी बांग्लादेश” का समर्थन करना जारी रखेगा।
चीन, पाकिस्तान और मालदीव के नेताओं ने भी बीएनपी की जीत पर खुशी जाहिर की है और नए प्रशासन के साथ काम करने की इच्छा जताई है।
‘जुलाई चार्टर’ जनमत संग्रह
संसदीय चुनाव के साथ-साथ, देश में संवैधानिक सुधारों के लिए एक जनमत संग्रह भी आयोजित किया गया था, जिसे ‘जुलाई चार्टर’ कहा गया।
‘हां’ में वोट: 4.8 करोड़ से अधिक
‘ना’ में वोट: 2.2 करोड़ से अधिक
इस जनमत संग्रह की सफलता यह दर्शाती है कि बांग्लादेश की जनता अब शासन प्रणाली में बड़े बदलाव और जवाबदेही चाहती है।
चुनौतियों का पहाड़
भले ही बीएनपी ने बड़ी जीत हासिल की है, लेकिन नई सरकार के सामने कई चुनौतियां हैं:
अर्थव्यवस्था का पुनरुद्धार: महीनों की अस्थिरता के बाद आर्थिक ढांचे को फिर से खड़ा करना।
अल्पसंख्यकों की सुरक्षा: हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों के खिलाफ हालिया हिंसा को रोकना और उनके मन में सुरक्षा का भाव पैदा करना।
युवा शक्ति: ‘जेन ज़ी’ आंदोलन से निकली उम्मीदों को पूरा करना, हालांकि उनकी अपनी पार्टी (NCP) केवल 6 सीटें ही जीत सकी।
बीएनपी के महासचिव मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर के अनुसार, नई सरकार का गठन 15 फरवरी, 2026 तक होने की संभावना