समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 13 फरवरी : प्रधानमंत्री पर की गई टिप्पणी से जुड़े एक पुराने वीडियो के फिर से सामने आने के बाद भारत सरकार ने गुरुवार को संयमित रुख अपनाते हुए कहा कि पहले वीडियो की प्रामाणिकता की जांच की जाएगी और उसके बाद ही कोई “उचित कार्रवाई” की जाएगी।
साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि उन्होंने संबंधित वीडियो स्वयं नहीं देखा है। यदि वीडियो वास्तविक पाया जाता है तो उसके संदर्भ और आशय को समझकर आगे की प्रतिक्रिया तय की जाएगी। सामने आए अंशों में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति द्वारा प्रधानमंत्री की सराहना से जुड़ी टिप्पणियां बताई जा रही हैं, जिन पर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हुई है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने यह भी कहा कि किसी भी विदेशी नेता के सार्वजनिक वक्तव्यों को पूरे कूटनीतिक संदर्भ में देखा जाना चाहिए। अक्सर मंच पर कही गई अनौपचारिक बातें अलग-अलग अर्थों में ली जाती हैं, जिससे अनावश्यक विवाद पैदा हो सकता है। भारत का रुख पारस्परिक सम्मान और एक-दूसरे के आंतरिक मामलों में गैर-हस्तक्षेप के सिद्धांतों पर आधारित है।
ब्रीफिंग के दौरान रूस के साथ भारत के संबंधों पर भी स्थिति स्पष्ट की गई। प्रवक्ता ने कहा कि व्यापार, रक्षा सहयोग और जन-से-जन संपर्क जैसे क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग जारी है और वैश्विक परिस्थितियों में बदलाव के बावजूद ये संबंध आगे भी मजबूत होते रहेंगे।
इसके अलावा भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते के ढांचे से जुड़े अमेरिकी तथ्य-पत्र (फैक्टशीट) में किए गए संशोधनों पर भी प्रतिक्रिया दी गई। विदेश मंत्रालय ने कहा कि दोनों देशों के बीच जारी संयुक्त बयान ही आपसी समझ का आधार है और अमेरिकी दस्तावेज में किए गए संशोधन उसी साझा समझ को दर्शाते हैं। दोनों पक्ष तय ढांचे के क्रियान्वयन और अंतरिम समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में काम कर रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, सार्वजनिक टिप्पणियों या आधिकारिक दस्तावेजों में अंतर दिखने पर इस तरह की कूटनीतिक सफाई सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा होती है। यह घटनाक्रम दर्शाता है कि भारत संवेदनशील राजनीतिक मुद्दों पर सार्वजनिक बहस में उलझने के बजाय संस्थागत संवाद और तथ्य-आधारित दृष्टिकोण को प्राथमिकता देता है।
कुल मिलाकर, भारत का संदेश स्पष्ट है—पहले तथ्य जाँचे , संदर्भ को समझें और फिर संतुलित व गरिमापूर्ण प्रतिक्रिया दें।