समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली 11 फरवरी :केंद्र सरकार ने ‘वंदे मातरम्’ को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी करते हुए सभी सरकारी कार्यक्रमों और स्कूलों में राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ से पहले राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ बजाना अनिवार्य कर दिया है। गृह मंत्रालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार, ‘वंदे मातरम्’ के दौरान उपस्थित सभी लोगों को खड़े होकर सम्मान प्रकट करना होगा। यह नियम राष्ट्रपति की उपस्थिति वाले कार्यक्रमों, पद्म पुरस्कार जैसे नागरिक सम्मान समारोहों और सरकारी आयोजनों में भी लागू होगा।
नए निर्देशों के तहत ‘वंदे मातरम्’ को सिनेमाघरों जैसे सार्वजनिक स्थलों पर भी बजाने की अनुमति दी गई है, हालांकि वहां खड़े होना अनिवार्य नहीं किया गया है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि अब ‘वंदे मातरम्’ के सभी छह अंतरे बजाए जाएंगे, जिनमें वे चार अंतरे भी शामिल हैं जिन्हें 1937 में कांग्रेस के फैसले के बाद आधिकारिक आयोजनों से हटाया गया था।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, पिछले महीने यह संकेत दिया गया था कि ‘वंदे मातरम्’ को भी राष्ट्रीय सम्मान से जुड़े कानूनों के दायरे में लाया जाएगा। नए नियमों के तहत यदि कोई व्यक्ति ‘वंदे मातरम्’ या राष्ट्रगान के सम्मान में बाधा डालता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है और उसे सजा का सामना करना पड़ सकता है।
इन निर्देशों के सामने आते ही राजनीतिक हलकों में विवाद तेज हो गया है। सत्तारूढ़ दल भारतीय जनता पार्टी का कहना है कि सभी अंतरों को शामिल करना ऐतिहासिक भूलों को सुधारने जैसा है और इससे राष्ट्रीय एकता मजबूत होगी। वहीं विपक्षी दल कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि सरकार इस मुद्दे का राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश कर रही है और इससे सामाजिक सौहार्द प्रभावित हो सकता है।
गौरतलब है कि ‘वंदे मातरम्’ की रचना 19वीं सदी के प्रसिद्ध लेखक बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी। यह गीत स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान देशभक्ति का प्रतीक बना। हालांकि इसके कुछ अंतरों में देवी-देवताओं का उल्लेख होने के कारण पहले इन्हें आधिकारिक कार्यक्रमों से हटाया गया था। नए निर्देशों के बाद यह बहस फिर तेज हो गई है कि क्या सभी अंतरों को अनिवार्य करना सामाजिक समावेशन की भावना के अनुरूप है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले चुनावों के मद्देनज़र यह मुद्दा और अधिक तूल पकड़ सकता है।