पूर्वी नागालैंड के विकास को नई दिशा, FNTA गठन पर ऐतिहासिक समझौता

केंद्र, नागालैंड सरकार और ENPO के बीच समझौते से छह जिलों को मिलेगा प्रशासनिक और वित्तीय सशक्तिकरण

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  • नई दिल्ली में केंद्र, राज्य और ENPO के बीच ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर
  • छह जिलों के लिए फ्रंटियर नागालैंड टेरिटोरियल अथॉरिटी (FNTA) के गठन का रास्ता साफ
  • FNTA को 46 विषयों से संबंधित प्रशासनिक शक्तियों का हस्तांतरण
  • केंद्र सरकार करेगी वित्तीय सहायता, गृह मंत्रालय उठाएगा प्रारंभिक व्यय

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली | 06 फरवरी: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के शांतिपूर्ण और समृद्ध उत्तर-पूर्व के विजन को साकार करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। इसी क्रम में भारत सरकार, नागालैंड सरकार और ईस्टर्न नगालैंड पीपुल्स ऑर्गनाइजेशन (ENPO) के प्रतिनिधियों के बीच नई दिल्ली में एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए।

ENPO नागालैंड के छह पूर्वी जिलों की आठ मान्यता प्राप्त नगा जनजातियों का प्रतिनिधित्व करने वाला शीर्ष संगठन है।

अमित शाह और नेफिउ रियो की मौजूदगी में हुआ समझौता

यह समझौता केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह और नागालैंड के मुख्यमंत्री नेफिउ रियो की उपस्थिति में संपन्न हुआ।

समझौते के तहत तुएनसांग, मोन, किफिरे, लॉन्गलेंग, नोकलाक और शमाटोर जिलों के लिए फ्रंटियर नागालैंड टेरिटोरियल अथॉरिटी (FNTA) के गठन का मार्ग प्रशस्त हो गया है।

FNTA को 46 विषयों पर मिलेंगी शक्तियाँ

नई व्यवस्था के तहत FNTA को 46 विषयों से संबंधित प्रशासनिक और विकासात्मक शक्तियों का हस्तांतरण किया जाएगा। इससे स्थानीय स्तर पर निर्णय लेने की प्रक्रिया मजबूत होगी और विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी।

“मोदी सरकार हर विवाद का समाधान खोजने के लिए प्रतिबद्ध”

इस अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि आज का दिन विवादमुक्त उत्तर-पूर्व की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उग्रवादमुक्त, हिंसामुक्त और विकसित पूर्वोत्तर की जो परिकल्पना की है, उसमें यह समझौता एक और ठोस कदम है।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2019 से अब तक मोदी सरकार ने पूर्वोत्तर क्षेत्र में 12 महत्वपूर्ण समझौते किए हैं।

समझौते कर लागू करने की परंपरा

गृह मंत्री ने कहा कि पिछली सरकारें केवल समझौते करती थीं, लेकिन मोदी सरकार की परंपरा रही है कि किए गए समझौतों को अक्षरशः और भावनात्मक रूप से पूरी तरह लागू किया जाता है। उन्होंने ENPO के प्रतिनिधियों को भरोसा दिलाया कि भारत सरकार पूर्वी नागालैंड के विकास में सहायता भी करेगी और इसकी पूरी जिम्मेदारी भी उठाएगी।

वित्तीय सहायता और मिनी-सचिवालय का प्रावधान

समझौते के अनुसार, प्रत्येक वर्ष एक निश्चित राशि निर्धारित की जाएगी, जबकि FNTA की स्थापना से जुड़े प्रारंभिक खर्च का वहन गृह मंत्रालय करेगा।

इसके साथ ही FNTA के लिए एक मिनी-सचिवालय के गठन का प्रावधान किया गया है, जिसका नेतृत्व अतिरिक्त मुख्य सचिव या प्रधान सचिव स्तर का अधिकारी करेगा। विकास व्यय का बंटवारा आबादी और क्षेत्रफल के अनुपात में किया जाएगा।

अनुच्छेद 371(A) पर कोई प्रभाव नहीं

यह स्पष्ट किया गया है कि यह व्यवस्था भारत के संविधान के अनुच्छेद 371(A) के प्रावधानों को किसी भी प्रकार से प्रभावित नहीं करती है।

अब विकास के मार्ग में नहीं रहेगी बाधा

अमित शाह ने कहा कि लंबे समय से चले आ रहे इस विवाद का सुखद अंत हुआ है और अब पूर्वी नागालैंड के विकास के मार्ग में कोई बाधा नहीं रहेगी। केंद्र और राज्य सरकार मिलकर क्षेत्र के बुनियादी ढांचे, आर्थिक सशक्तिकरण और प्रशासनिक सुधारों को आगे बढ़ाएंगी।

संवाद से समाधान की प्रतिबद्धता का प्रतीक

यह समझौता सभी विवादास्पद मुद्दों को संवाद के माध्यम से हल करने की भारत सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है और यह सिद्ध करता है कि लोकतंत्र में समाधान आपसी सम्मान और बातचीत से ही संभव है, न कि हिंसा और सशस्त्र संघर्ष से।

इस अवसर पर नागालैंड के उपमुख्यमंत्री, मंत्रिमंडल के सदस्य, सांसद, ENPO के प्रतिनिधि तथा केंद्र और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।

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