पूर्वी नागालैंड का दशकों पुराना मुद्दा समझौते से सुलझा, पीएम मोदी बोले– समृद्धि के नए रास्ते खुलेंगे
46 विषयों पर प्रशासनिक अधिकार एफएनटीए को हस्तांतरित होंगे
समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली | 06: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्वी नागालैंड से जुड़े दशकों पुराने लंबित मुद्दे के समाधान को ऐतिहासिक करार देते हुए कहा है कि यह समझौता लोगों के लिए अवसर और समृद्धि के नए रास्ते खोलेगा। केंद्र सरकार, नागालैंड सरकार और ईस्टर्न नागालैंड पीपुल्स ऑर्गनाइजेशन (ईएनपीओ) के बीच हुए इस समझौते की उन्होंने सार्वजनिक रूप से सराहना की।
एक्स पर पीएम मोदी का संदेश
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि यह समझौता विशेष रूप से पूर्वी नागालैंड के विकास की दिशा को मजबूत करेगा। उन्होंने भरोसा जताया कि इससे स्थानीय लोगों को नए अवसर मिलेंगे और यह नॉर्थईस्ट में शांति, प्रगति और समावेशी विकास के प्रति केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
गृह मंत्री अमित शाह ने दी समझौते की जानकारी
इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने समझौते की जानकारी साझा करते हुए बताया कि भारत सरकार, नागालैंड सरकार और ईस्टर्न नागालैंड पीपुल्स ऑर्गनाइजेशन के बीच यह ऐतिहासिक करार हुआ है। उन्होंने कहा कि इस समझौते से पूर्वी नागालैंड से जुड़े सभी प्रमुख विवादित मुद्दों का समाधान हो गया है।
प्रधानमंत्री के विजन की दिशा में अहम कदम
गृह मंत्री ने कहा कि यह समझौता शांतिपूर्ण और समृद्ध पूर्वोत्तर के लिए प्रधानमंत्री मोदी के विजन को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। ईएनपीओ, नागालैंड के छह पूर्वी जिलों की आठ मान्यता प्राप्त नगा जनजातियों का प्रतिनिधित्व करने वाला शीर्ष संगठन है।
मुख्यमंत्री नेफिउ रियो की मौजूदगी में हस्ताक्षर
नागालैंड के मुख्यमंत्री नेफिउ रियो की मौजूदगी में गुरुवार को समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते के तहत तुएनसांग, मोन, किफिरे, लॉन्गलेंग, नोकलाक और शमाटोर जिलों के लिए फ्रंटियर नगालैंड टेरिटोरियल अथॉरिटी (एफएनटीए) का गठन किया जाएगा।
एफएनटीए को मिलेंगी व्यापक प्रशासनिक शक्तियां
समझौते के अनुसार एफएनटीए को 46 विषयों से जुड़े प्रशासनिक अधिकार सौंपे जाएंगे। इसके साथ ही एक मिनी-सचिवालय का गठन किया जाएगा, जिसका नेतृत्व अतिरिक्त मुख्य सचिव या प्रधान सचिव स्तर का अधिकारी करेगा। पूर्वी नागालैंड क्षेत्र के विकास व्यय का बंटवारा आबादी और क्षेत्रफल के अनुपात में किया जाएगा।
अनुच्छेद 371(ए) पर कोई असर नहीं
गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि यह समझौता भारत के संविधान के अनुच्छेद 371(ए) के प्रावधानों को किसी भी प्रकार से प्रभावित नहीं करता है। मंत्रालय के अनुसार यह करार संवाद और आपसी सम्मान के माध्यम से समाधान निकालने की लोकतांत्रिक परंपरा को मजबूत करता है।