भारत का बजट 2026: युवा शक्ति एवं तीन मुख्य कर्तव्य

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पूनम शर्मा
1 फ़रवरी 2026 को संसद में पेश किया गया यूनियन बजट 2026-27 सिर्फ संख्याओं और प्रशासकीय दस्तावेजों का समूह नहीं है, बल्कि यह एक युवा-केन्द्रित सोच और दीर्घकालिक विकास की सोच का प्रतीक माना जा रहा है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इसे “युवा शक्ति-ड्राइवेन बजट” बताते हुए कहा कि यह बजट युवा ऊर्जा, नवाचार और व्यापक भागीदारी से प्रेरित है।
युवा शक्ति-ड्राइवेन बजट — क्या है खास?
वित्त मंत्री  ने स्पष्ट किया कि इस बजट की प्रेरणा सिर्फ आर्थिक आंकड़ों से नहीं, बल्कि देश के युवा नेताओं द्वारा ‘विकसित भारत’ युवा संवाद (Viksit Bharat Young Leaders’ Dialogue 2026) में साझा की गई विचारों से भी मिली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उस संवाद में आए कई युवा विचारों ने बजट की दिशा तय करने में भूमिका निभाई है।

इस बजट को खास बनाता है कि पहली बार इसे “कर्तव्य भवन” में तैयार किया गया — एक ऐसा नाम जो कर्तव्य और उत्तरदायित्व की भावना को दर्शाता है।

तीन मुख्य कर्तव्य — तीन ‘Kartavyas’

बजट का मूल आधार तीन मुख्य कर्तव्यों पर रखा गया है, जिनका लक्ष्य स्थिर, समावेशी और समान विकास सुनिश्चित करना है।

1. आर्थिक विकास को गति देना और स्थिरता बनाए रखना

पहला कर्तव्य आर्थिक वृद्धि को तेज तथा टिकाऊ बनाना है। इसका मतलब है:

उत्पादकता और प्रतिस्पर्धा में सुधार

वैश्विक आर्थिक उतार-चढ़ाव का सामना करने में सक्षम बनाना

निवेश और उत्पादन को बढ़ावा देना

सरकार ने इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए नीतिगत सुधार, पूंजीगत व्यय में बड़े निवेश और संरचनात्मक सुधारों पर जोर दिया है, ताकि मजबूत आर्थिक नींव तैयार हो सके।

इस दिशा में तकनीकी क्षेत्रों में निवेश और नवाचार पर विशेष ध्यान देने की बात भी सामने रखी गई है।

2. नागरिकों की आकांक्षाओं की पूर्ति और क्षमता निर्माण

दूसरा कर्तव्य लोगों की व्यक्तिगत और आर्थिक आकांक्षाओं को पहचानना और उन्हें सशक्त बनाना है। इसका तात्पर्य है:

लोगों को नौकरी, कौशल, शिक्षा और अवसर के साथ सशक्त बनाना

समुदायों को विकास में भागीदार बनाना

आर्थिक समावेशन और सामाजिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देना

बजट पेश करते समय यही बात कही गई कि यदि नागरिकों की आकांक्षाओं को पूरा किया जाए तो वे अधिक भागीदारी और योगदान दे सकते हैं, जिससे देश की प्रगति भी तेज होगी।

3. सबका साथ, सबका विकास — समान अवसर और संसाधन वितरण

तीसरा कर्तव्य “सबका साथ, सबका विकास” के व्यापक विचार पर आधारित है। इसका मतलाब है:

हर परिवार, हर समुदाय, हर क्षेत्र को संसाधनों, अवसरों और सुविधाओं तक समान पहुंच

किसी भी वर्ग या क्षेत्र को पीछे न रखना

विकास की गति को सब तक पहुँचाना

यह कर्तव्य सामाजिक समानता, क्षेत्रीय विकास और आर्थिक अवसरों में संतुलन सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता दिखाता है।

समर्थक पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण

इन तीनों कर्तव्यों को पूरा करने के लिए, वित्त मंत्री ने कहा कि एक सपोर्टिव इकोसिस्टम, यानी एक ऐसा वातावरण आवश्यक है, जिसमें:

नवाचार को प्रोत्साहन मिले

कौशल और उद्यमिता को बढ़ावा मिले

नीति-स्थिरता और लक्षित निवेश को बढ़ाकर लक्ष्यों को वास्तविकता में बदलने की क्षमता हो

यही कारण है कि बजट में युवा, तकनीक, जैसे क्षेत्रों पर बढ़ती योजनाओं का समावेश किया गया है।

कुल मिलाकर क्या संदेश है?

इस बजट का संदेश सरल और स्पष्ट है — भारत की प्रगति अब सिर्फ आर्थिक आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह युवा ऊर्जा, समान अवसर, सामाजिक समावेश और दीर्घकालिक सोच पर आधारित है। “युवा शक्ति-ड्राइवेन” बजट सिर्फ एक टैक्स-प्लान नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय यात्रा का मार्गदर्शक है, जिसमें हर नागरिक के सपने और योगदान को अहमियत दी गई है।

यदि यह बजट सफलतापूर्वक लागू होता है, तो यह न केवल आर्थिक वृद्धि को मजबूती देगा, बल्कि भारतीय युवाओं को एक सशक्त भूमिका में भी स्थापित करेगा।

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