अमेरिका ने जताई नाराज़गी, भारत-ईयू ट्रेड डील को बताया ‘बेहद निराशाजनक’

भारत-ईयू समझौते से वैश्विक राजनीति में नई हलचल, अमेरिका असंतुष्ट

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  • भारत-ईयू ट्रेड डील पर अमेरिका ने कड़ी प्रतिक्रिया दी
  • रूसी तेल और टैरिफ़ को लेकर अमेरिका ने उठाए सवाल
  • अमेरिकी पक्ष का दावा, समझौते में भारत को अधिक लाभ
  • बदलती वैश्विक राजनीति में भारत-ईयू नज़दीकियाँ तेज़

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली। 29 जनवरी: भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच हुए ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते पर अमेरिका ने नाराज़गी जताई है। अमेरिका का कहना है कि यह डील यूक्रेन-रूस युद्ध की पृष्ठभूमि में यूरोप के रुख को लेकर कई सवाल खड़े करती है।

अमेरिका की कड़ी प्रतिक्रिया

अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि हर देश को अपने हित में फैसले लेने का अधिकार है, लेकिन भारत-ईयू समझौते से वह निराश हैं। उनका आरोप है कि रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान भारत ने रियायती दरों पर रूसी तेल खरीदा और बाद में वही रिफाइंड तेल यूरोप ने भारत से आयात किया, जिससे अप्रत्यक्ष रूप से युद्ध को आर्थिक समर्थन मिला।

टैरिफ़ और रूसी तेल का मुद्दा

बेसेंट ने बताया कि रूस से तेल खरीद के कारण अमेरिका ने भारत पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क लगाया, जबकि यूरोप ने ऐसा कोई कदम नहीं उठाया। उन्होंने कहा कि यूक्रेन के समर्थन की बात करने के बावजूद यूरोप ने व्यापारिक हितों को प्राथमिकता दी।

‘डील में भारत का पलड़ा भारी’

अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रियर का कहना है कि इस समझौते में भारत को अधिक लाभ मिलता दिख रहा है। उनके अनुसार, इससे भारत को यूरोपीय बाज़ारों तक व्यापक पहुँच मिलेगी और भारतीय कामगारों की आवाजाही को लेकर भी सहूलियतें बढ़ सकती हैं। कम लागत वाला श्रम भारत की बड़ी ताकत बताया गया है।

भारत-ईयू डील की घोषणा

27 जनवरी को भारत और यूरोपीय संघ के शीर्ष नेतृत्व ने इस मुक्त व्यापार समझौते की घोषणा की थी। भारत सरकार ने इसे देश के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा मुक्त व्यापार समझौता बताया है। यूरोपीय संघ ने भी इसे बदलते वैश्विक परिदृश्य में रणनीतिक और ऐतिहासिक कदम करार दिया है।

वैश्विक राजनीति का असर

विश्लेषकों के अनुसार, मौजूदा वैश्विक राजनीति और अमेरिका की आक्रामक व्यापार नीति के बीच भारत और यूरोप एक-दूसरे के करीब आए हैं। व्यापार को कूटनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल किए जाने की रणनीति ने इस साझेदारी को तेज़ किया है।

समझौते की प्रमुख बातें

भारत यूरोपीय संघ को कई ऐसे टैरिफ़ में रियायत देगा, जो अन्य साझेदारों को नहीं मिली हैं। कारों पर शुल्क 110 प्रतिशत से घटकर 10 प्रतिशत तक किया जाएगा, जबकि कार पुर्ज़ों पर शुल्क चरणबद्ध तरीके से समाप्त होंगे। मशीनरी, रसायन और दवाओं पर लगने वाले शुल्क भी काफी हद तक खत्म होंगे। टेक्सटाइल और परिधान पर पहले दिन से शून्य शुल्क लागू होगा, जिससे कारीगरों, महिलाओं और एमएसएमई को लाभ मिलेगा।

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