यूजीसी के समता विनियम 2026 की मंशा सकारात्मक, लेकिन प्रावधानों में संतुलन जरूरी : अभाविप

समता के लक्ष्य का समर्थन, लेकिन भ्रम दूर करे यूजीसी : अभाविप

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  • यूजीसी के ‘उच्च शिक्षा संस्थानों में समता संवर्धन विनियम, 2026’ पर अभाविप की प्रतिक्रिया
  • उद्देश्य को बताया सराहनीय, लेकिन भाषा और प्रावधानों पर उठाए सवाल
  • विद्यार्थियों और अभिभावकों में फैल रहे भ्रम पर चिंता
  • यूजीसी से संवाद और स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की मांग

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली | 29 जनवरी: अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा अधिसूचित “उच्च शिक्षा संस्थानों में समता के संवर्धन हेतु विनियम, 2026” की मूल भावना का समर्थन किया है। संगठन का कहना है कि शैक्षणिक परिसरों में समान अवसर और समरस वातावरण सुनिश्चित करना लोकतांत्रिक व्यवस्था की अनिवार्य शर्त है।

प्रावधानों को लेकर असमंजस

हालांकि, अभाविप ने यह भी स्पष्ट किया कि विनियमों के कुछ प्रावधानों और प्रयुक्त शब्दों को लेकर समाज, विद्यार्थियों और अभिभावकों के बीच भ्रम की स्थिति बन रही है। संगठन का मानना है कि यदि समय रहते इन बिंदुओं को स्पष्ट नहीं किया गया, तो इसका नकारात्मक प्रभाव शैक्षणिक परिसरों के वातावरण पर पड़ सकता है।

यूजीसी से त्वरित हस्तक्षेप की अपील

अभाविप ने यूजीसी से आग्रह किया है कि वह सभी संबंधित पक्षों के साथ संवाद स्थापित कर इन भ्रांतियों को दूर करे। संगठन के अनुसार, लोकतंत्र की मूल भावना तभी सशक्त होगी जब सभी नागरिकों और विद्यार्थियों के अधिकार समान रूप से सुरक्षित रहेंगे और किसी भी प्रकार के भेदभाव की गुंजाइश नहीं रहेगी।

न्यायालय में विचाराधीन मामला

अभाविप ने यह भी उल्लेख किया कि यह विषय वर्तमान में न्यायालय के समक्ष विचाराधीन है। ऐसे में यूजीसी को चाहिए कि वह अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए शीघ्र हलफनामा दाखिल करे, ताकि स्थिति को लेकर व्याप्त अनिश्चितता समाप्त हो सके।

अभाविप का पक्ष

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा कि,

“शैक्षणिक परिसरों में सौहार्द और समानता बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। सभी वर्गों के विद्यार्थियों के लिए सामाजिक समानता सुनिश्चित होनी चाहिए और किसी भी प्रकार के भेदभाव को स्वीकार नहीं किया जा सकता। समता विनियम 2026 को लेकर जो भ्रम फैला है, उस पर यूजीसी को शीघ्र और स्पष्ट स्पष्टीकरण देना चाहिए। लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए समाज के सभी वर्गों का साझा प्रयास जरूरी है।”

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