बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार को लेकर ब्रिटेन की संसद में चिंता, बैरोनेस वर्मा ने मांगी त्वरित कार्रवाई

अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और निष्पक्ष चुनाव पर सवाल, बैरोनेस वर्मा ने बांग्लादेश और यूके सरकार से की हस्तक्षेप की मांग

कृपया इस पोस्ट को साझा करें!
  • बैरोनेस वर्मा ने बांग्लादेश हाई कमिश्नर से तत्काल बैठक की मांग की
  • अल्पसंख्यकों, विपक्षी समर्थकों पर हिंसा और प्रशासनिक निष्क्रियता का आरोप
  • यूके सरकार की चुप्पी पर सवाल, मानवाधिकार उल्लंघन की सार्वजनिक निंदा की मांग
  • फरवरी में प्रस्तावित चुनावों को लेकर सुरक्षा, धर्मनिरपेक्षता और निष्पक्षता पर चिंता

समग्र समाचार सेवा
लंदन| 26 जनवरी: ब्रिटेन की संसद हाउस ऑफ लॉर्ड्स की वरिष्ठ कंज़र्वेटिव पीयर और पूर्व मंत्री बैरोनेस वर्मा ऑफ़ लीसेस्टर ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदायों और विपक्षी समर्थकों के खिलाफ बढ़ती हिंसा को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने इस संबंध में ब्रिटेन में बांग्लादेश की उच्चायुक्त और यूके की विदेश मंत्री को अलग-अलग पत्र लिखकर त्वरित हस्तक्षेप की मांग की है।

हाई कमिश्नर को पत्र, हालात को बताया गंभीर

बांग्लादेश की उच्चायुक्त एच.ई. अबीदा इस्लाम को लिखे पत्र में बैरोनेस वर्मा ने कहा कि हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों के बाद बांग्लादेश की स्थिति तेजी से बिगड़ी है। उन्होंने भीड़ हिंसा, पीट-पीटकर हत्या, घरों, दुकानों और पूजा स्थलों में आगजनी जैसी घटनाओं का उल्लेख किया।


पत्र में गैर-मुस्लिम महिलाओं के साथ दुष्कर्म और जबरन धर्म परिवर्तन की रिपोर्टों का भी जिक्र किया गया है। बैरोनेस वर्मा ने चिंता जताई कि कई मामलों में कानून प्रवर्तन एजेंसियों की निष्क्रियता के कारण अपराधियों को दंड से बचने का अवसर मिल रहा है।

ब्रिटिश बांग्लादेशी समुदाय में भय

उन्होंने कहा कि इन घटनाओं से ब्रिटेन में रहने वाले बांग्लादेशी समुदाय, विशेष रूप से अल्पसंख्यक वर्गों में गहरी चिंता और भय का माहौल है। लोग अपने परिजनों की सुरक्षा को लेकर आशंकित हैं।

बैरोनेस वर्मा ने हाई कमिश्नर से तत्काल बैठक की मांग करते हुए आग्रह किया कि अल्पसंख्यकों और विपक्षी समर्थकों की सुरक्षा, हिंसा के मामलों में जवाबदेही, निष्पक्ष चुनाव और संविधान में निहित धर्मनिरपेक्षता, बहुलता और विधि शासन की रक्षा के लिए उठाए जा रहे कदमों पर स्पष्ट जानकारी दी जाए। उन्होंने इस प्रक्रिया में अल्पसंख्यक ब्रिटिश बांग्लादेशी समुदाय के प्रतिनिधियों को शामिल करने की भी मांग की।


यूके सरकार की चुप्पी पर सवाल

यूके की विदेश मंत्री यवेट कूपर को लिखे अलग पत्र में बैरोनेस वर्मा ने बांग्लादेश में हो रही घटनाओं पर ब्रिटिश सरकार की कथित निष्क्रियता की आलोचना की। उन्होंने कहा कि संसद और प्रधानमंत्री तक बार-बार मुद्दा उठाने के बावजूद सरकार की ओर से कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं आई है।

पत्र में पूर्व प्रधानमंत्री शेख़ हसीना के हटने के बाद अल्पसंख्यकों, विशेष रूप से हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसा और जबरन धर्म परिवर्तन की घटनाओं में वृद्धि का उल्लेख किया गया है।

चुनाव और धर्मनिरपेक्षता पर चिंता

फरवरी में प्रस्तावित बांग्लादेशी चुनावों को लेकर बैरोनेस वर्मा ने चेतावनी दी कि हालात और गंभीर हो रहे हैं। उन्होंने उग्र संगठनों की राजनीतिक प्रक्रिया में भूमिका, संवैधानिक धर्मनिरपेक्षता के कमजोर होने और सार्वजनिक संस्थानों में जमात-ए-इस्लामी की बढ़ती मौजूदगी को लेकर चिंता जताई।

उन्होंने यूके सरकार से मांग की कि:

  • अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की सार्वजनिक रूप से निंदा की जाए
  • बांग्लादेश सरकार पर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का दबाव बनाया जाए
  • चुनावों की निगरानी के लिए ब्रिटिश प्रतिनिधिमंडल भेजने पर विचार किया जाए
  • उग्र संगठनों की भूमिका की समीक्षा की जाए
  • बांग्लादेश को दी जा रही ब्रिटिश सहायता और उसकी निगरानी को लेकर स्थिति स्पष्ट की जाए
नेतृत्व और त्वरित कार्रवाई की मांग

बैरोनेस वर्मा ने कहा कि ब्रिटेन में अल्पसंख्यक पृष्ठभूमि से आने वाला बांग्लादेशी समुदाय यूके सरकार से स्पष्ट नेतृत्व और ठोस कार्रवाई की अपेक्षा कर रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो इससे मानवाधिकार, लोकतांत्रिक मूल्य और सार्वजनिक विश्वास गंभीर रूप से प्रभावित होंगे।

कृपया इस पोस्ट को साझा करें!
Leave A Reply

Your email address will not be published.