पेट की मजबूरी भारी पड़ी: बिहार के एक ही गाँव के छह मज़दूरों की मौत

रोज़गार की तलाश में गई ज़िंदगियाँ लौटीं ताबूत में

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  • छत्तीसगढ़ के स्पंज आयरन संयंत्र में विस्फोट से छह मज़दूरों की मौत
  • सभी मृतक बिहार के गया ज़िले के एक ही गाँव के निवासी
  • कर्ज़ और कम आय के चलते पहली बार बाहर गए थे काम करने
  • मुआवज़े की घोषणाएँ, लेकिन रोज़गार सुरक्षा पर चिंता बरकरार

समग्र समाचार सेवा
गया (बिहार), 26 जनवरी: छत्तीसगढ़ के बलौदाबाज़ार-भाटपारा ज़िले में एक औद्योगिक संयंत्र में हुए विस्फोट ने बिहार के गया ज़िले के गोटीबांध गाँव को गहरे शोक में डाल दिया है। इस हादसे में गाँव के छह मज़दूरों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं। एक साथ इतनी मौतों से पूरे गाँव में मातम पसरा है और हर घर में डर और असहायता का माहौल है।

एक गाँव, कई उजड़े घर

गोटीबांध गाँव से कुछ ही दिन पहले 14 लोग रोज़गार की तलाश में छत्तीसगढ़ गए थे। इनमें से छह की जान चली गई। मृतकों में पिता-पुत्र भी शामिल हैं, वहीं एक मज़दूर ऐसा था जिसकी शादी कुछ महीने पहले ही हुई थी और घर में नवजात बच्चा है। परिजन शवों के लौटने का इंतज़ार कर रहे हैं और गाँव में शोक सभाओं का सिलसिला जारी है।

कर्ज़ ने धकेला बाहर

परिजनों का कहना है कि अधिकतर मज़दूर पहले गाँव और आसपास दिहाड़ी काम कर परिवार चलाते थे, लेकिन बढ़ते ख़र्च और कर्ज़ की किस्तों ने उन्हें बाहर जाने पर मजबूर कर दिया। ठेकेदार द्वारा बेहतर आमदनी और भोजन की व्यवस्था का भरोसा दिया गया था, जिससे परिवारों को लगा कि हालात सुधरेंगे, लेकिन यह फैसला जानलेवा साबित हुआ।

हादसे का भयावह मंजर

घटना में बच गए एक मज़दूर के अनुसार, काम के दौरान अचानक गैस फैलने लगी और कुछ ही पलों में अफरा-तफरी मच गई। दृश्यता खत्म हो गई और लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। जो सुरक्षित दिशा में निकल पाए, वे बच गए, जबकि कई मज़दूर बाहर नहीं आ सके।

डर के साये में जीते परिवार

गाँव की महिलाओं का कहना है कि बाहर काम करने वाले पुरुषों की सुरक्षा को लेकर हमेशा चिंता बनी रहती है। कई परिवारों के सदस्य आज भी दूसरे राज्यों में काम कर रहे हैं। हादसे की खबर के बाद से ही घरों में डर और अनिश्चितता का माहौल है।

पलायन पर फिर सवाल

यह इलाक़ा अनुसूचित जाति बहुल है और रोज़गार के सीमित साधनों के कारण पलायन आम बात है। स्थानीय स्तर पर स्थायी रोज़गार और औद्योगिक अवसरों की कमी के चलते लोग जोखिम भरे काम स्वीकार करने को मजबूर होते हैं।

मुआवज़ा और आश्वासन

राज्य सरकार ने मृतकों के परिजनों और घायलों के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा की है। प्रशासन का कहना है कि आगे कानूनी प्रक्रिया के तहत अतिरिक्त मुआवज़े की कार्रवाई की जाएगी। वहीं, छत्तीसगढ़ सरकार ने भी सहायता देने की बात कही है।

बड़ा सवाल

हर औद्योगिक हादसे के बाद मुआवज़े और योजनाओं की घोषणा होती है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर मज़दूरों की सुरक्षा, ठेकेदारी व्यवस्था की निगरानी और स्थानीय रोज़गार सृजन जैसे सवाल अब भी अनुत्तरित हैं। गोटीबांध गाँव की यह त्रासदी एक बार फिर दिखाती है कि पेट की मजबूरी किस तरह ज़िंदगियों को जोखिम में डाल देती है।

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