‘टली साहब’ नहीं रहे: बीबीसी के पूर्व संवाददाता सर मार्क टली का नई दिल्ली में निधन
पीएम मोदी ने सर मार्क टली के निधन पर जताया शोक, कहा— पत्रकारिता की प्रभावशाली आवाज़ थे
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भारत में बीबीसी के पूर्व संवाददाता सर मार्क टली का नई दिल्ली में निधन
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें पत्रकारिता की प्रभावशाली आवाज़ बताया
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युद्ध, आपदाओं और ऐतिहासिक घटनाओं की निष्पक्ष रिपोर्टिंग के लिए थे प्रसिद्ध
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पत्रकारिता और भारत से गहरे लगाव के कारण लोगों के बीच थे बेहद लोकप्रिय
समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली| 25 जनवरी:भारत में बीबीसी के पूर्व संवाददाता और वरिष्ठ पत्रकार सर मार्क टली का रविवार को नई दिल्ली में निधन हो गया। उनके निधन से देश और दुनिया के पत्रकारिता जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। दशकों तक उनकी विशिष्ट आवाज़ बीबीसी रेडियो के माध्यम से श्रोताओं के बीच भरोसे का प्रतीक बनी रही।
पीएम मोदी ने व्यक्त किया दुख
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सर मार्क टली के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि वह पत्रकारिता की एक प्रभावशाली आवाज़ थे। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि भारत और यहाँ के लोगों से उनका जुड़ाव उनके कार्यों में स्पष्ट दिखाई देता था और उनकी रिपोर्टिंग ने सार्वजनिक विमर्श पर स्थायी प्रभाव छोड़ा।
ऐतिहासिक घटनाओं के रहे साक्षी
सर मार्क टली उन विदेशी पत्रकारों में शामिल थे, जिन्होंने भारत की सबसे चुनौतीपूर्ण और संवेदनशील घटनाओं को बेहद गहराई से कवर किया। उन्होंने युद्ध, अकाल, सामाजिक तनाव, भोपाल गैस त्रासदी, ऑपरेशन ब्लू स्टार और वर्ष 1992 में अयोध्या में हुए बाबरी ढांचे के विध्वंस जैसी घटनाओं की रिपोर्टिंग की थी।
राजनीतिक और पत्रकारिता जगत में शोक
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया सहित कई राजनीतिक नेताओं और पत्रकार संगठनों ने उनके निधन पर दुख व्यक्त किया। प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया ने उन्हें रेडियो पत्रकारिता का अग्रणी स्तंभ बताते हुए कहा कि उनके योगदान को लंबे समय तक याद रखा जाएगा।
भारत से था विशेष लगाव
सर मार्क टली का जन्म वर्ष 1935 में कोलकाता में हुआ था। उन्हें हिन्दी भाषा का अच्छा ज्ञान था, जो उन्हें भारतीय समाज के और अधिक निकट ले आया। इसी कारण लोग उन्हें स्नेहपूर्वक ‘टली साहब’ कहकर संबोधित करते थे। भारत के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक जीवन को समझने की उनकी क्षमता उन्हें विशिष्ट बनाती थी।
पत्रकारिता जगत के लिए अपूरणीय क्षति
वरिष्ठ पत्रकारों और लेखकों ने उन्हें एक निर्भीक, निष्पक्ष और संवेदनशील पत्रकार के रूप में याद किया, जिन्होंने सत्ता से सवाल पूछने का साहस कभी नहीं छोड़ा। उनका निधन पत्रकारिता जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति माना जा रहा है।