कूटनीति से कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय समस्याएं सुलझी हैं और सुलझायी जा सकती है-राजदूत मोहन कृष्ण श्रेष्ठ
पूर्व राजदूत मोहन कृष्ण श्रेष्ठ की पुस्तक ‘थ्री डिकेड्स इन डिप्लोमेसी का फॉरेन करेस्पांडेंट्स क्लब ऑफ़ साउथ एशिया में विमोचन
समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली | 22 जनवरी: पूर्व राजदूत मोहन कृष्ण श्रेष्ठ की पुस्तक ‘थ्री डिकेड्स इन डिप्लोमेसी : ए बुक ऑफ प्रैक्टिकल डिप्लोमैटिक एक्सपीरियंस’ का लोकार्पण नई दिल्ली स्थित एफसीसी-फॉरेन करेस्पांडेंट्स क्लब ऑफ़ साउथ एशिया में किया गया। यह कार्यक्रम सेंटर फॉर डिप्लोमेसी एंड डेवलपमेंट, काठमांडू तथा समग्र विकास न्यास, नई दिल्ली के सहयोग से आयोजित हुआ, जिसमें देश–विदेश के राजनयिक, शिक्षाविद और मीडिया जगत के वरिष्ठ प्रतिनिधि शामिल हुए।
यह पुस्तक नेपाली के अलावा अंग्रेज़ी और हिंदी में भी प्रकाशित की गई है । 19 जनवरी को आयोजित इस कार्यक्रम में अंग्रेज़ी और हिंदी भाषा की पुस्तकों का विमोचन किया गया ।
कार्यक्रम की अध्यक्षता एफसीसी एवं अंतरराष्ट्रीय प्रेस संवाददाता संघ के अध्यक्ष और वरिष्ठ पत्रकार डॉ. वाएल एस. एच. अव्वाद ने की। वहीं ग्लोबल गवर्नेंस न्यूज़ ग्रुप के संपादकीय अध्यक्ष डॉ. कुमार राकेश कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।डॉ राकेश ने कहा -नेपाल और भारत सदियों से एक थे , एक हैं और एक रहेंगे ।
मुख्य बीज़ वक्तव्य में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय की प्रोफेसर डॉ. गीता कोचर ने दक्षिण एशिया के कूटनीतिक इतिहास के साथ आज की स्थिति में भारत नेपाल संबंधों के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डाला ।डॉ गीता ने अपने वक्तव्य में व्यावहारिक कूटनीतिज्ञ नीतियों को अपनाने पर बल देते हुए भारत -नेपाल संबंधों को विश्व की एक जरूरत बताया ।कार्यक्रम में समग्र विकास न्यास की संस्थापक एवं निदेशक पूनम शर्मा तथा नेपाल दूतावास के मंत्री परामर्शदाता श्री अंबिका जोशी ने भी अपने विचार साझा किए।
यह पुस्तक राजदूत मोहन कृष्ण श्रेष्ठ के नेपाल विदेश सेवा में 31 वर्षों से अधिक के कार्यकाल का विस्तृत विवरण है। काठमांडू से सेवा की शुरुआत कर अनुभाग अधिकारी से लेकर राजदूत बनने तक की उनकी यात्रा के साथ यह कृति नेपाल की कूटनीति की आंतरिक कार्यप्रणाली की दुर्लभ झलक भी देती है।साथ ही एक राजदूत की जीवन शैली और स्वभाव का भी चित्रण करती है।
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने पुस्तक के प्रमुख विषयों पर चर्चा की, जिनमें जापान, थाईलैंड, संयुक्त अरब अमीरात और फ्रांस जैसे विभिन्न देशों में सेवा के अनुभव, डरबन में गुटनिरपेक्ष शिखर सम्मेलन के दौरान राजनयिक पासपोर्ट चोरी जैसी चुनौतीपूर्ण घटनाओं का प्रबंधन, पेरिस में कार्यकाल के दौरान नेपाल के पर्यटन और व्यापार को बढ़ावा देने के प्रयास, तथा राजनयिक प्रोटोकॉल और विशिष्ट अतिथियों की यात्राओं से जुड़े अनुभव दर्ज हैं ।
अपने संबोधन में राजदूत मोहन कृष्ण श्रेष्ठ ने कहा कि सकारात्मक सोच ने उन्हें जटिल कूटनीतिक परिस्थितियों में हमेशा मार्गदर्शन दिया। राजदूत श्री श्रेष्ठ ने कहा कि मेरे अनुभवों के अनुसार कूटनीति से कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय समस्याएं सुलझी हैं और सुलझायी जा सकती है।
उन्होंने बताया कि 74 देशों की यात्राओं और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के अनुभवों से अर्जित व्यावहारिक ज्ञान को साझा करने के उद्देश्य से यह पुस्तक लिखी गई है।
इस पुस्तक का प्रकाशन अंग्रेज़ी और हिंदी में दिल्ली , यूके और अमेरिका की प्रतिष्ठित प्रकाशन समूह -वॉलनट पब्लिकेशन ने किया है । इस कार्यक्रम में प्रकाशन समूह के सौरभ सुधीर , तृषा प्रिया, शुभश्री स्वैन सहित कई शोधार्थियों ने भी भागीदारी की ।