केजरीवाल पर रिपोर्ट के बाद ‘पंजाब केसरी’ पर छापे

पंजाब में प्रेस की आज़ादी पर सवाल: ‘पंजाब केसरी’ के दफ्तरों पर छापेमारी

कृपया इस पोस्ट को साझा करें!
  • केजरीवाल पर ख़बर छपने के बाद ‘पंजाब केसरी’ के कई दफ्तरों पर छापे
  • अख़बार का आरोप: प्रेस की बिजली काटी गई, कामकाज ठप
  • प्रबंधन ने राज्यपाल से सुरक्षा व हस्तक्षेप की अपील की
  • इमरजेंसी काल में इंडियन एक्सप्रेस के साथ हुई कार्रवाई से तुलना

समग्र समाचार सेवा
चंडीगढ़, 17 जनवरी: पंजाब में प्रेस की स्वतंत्रता को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। हिंदी दैनिक पंजाब केसरी ने आरोप लगाया है कि पंजाब पुलिस और अन्य सरकारी विभागों ने उसके विभिन्न कार्यालयों पर एक साथ छापेमारी की। यह कार्रवाई उस ख़बर के बाद हुई, जिसमें दावा किया गया था कि दिल्ली में चुनावी हार के बाद अरविंद केजरीवाल पंजाब में स्थायी रूप से डेरा डाले हुए हैं।

अख़बार का आरोप: समन्वित दबाव की कार्रवाई

अख़बार प्रबंधन के अनुसार, छापे राज्य के अलग-अलग स्थानों पर लगभग एक साथ डाले गए, जिससे यह एक समन्वित कार्रवाई प्रतीत होती है। ‘पंजाब केसरी’ का कहना है कि विभिन्न विभागों की टीमें दफ्तरों में दाख़िल हुईं और रिकॉर्ड खंगाले गए।

प्रेस की बिजली काटने का दावा

प्रबंधन ने यह भी आरोप लगाया कि छापेमारी के दौरान प्रेस प्रतिष्ठानों की बिजली आपूर्ति काट दी गई, जिससे अख़बार का प्रकाशन और तकनीकी कामकाज बुरी तरह प्रभावित हुआ। इसे मीडिया को डराने और दबाव में लेने की कोशिश बताया गया है।

राज्यपाल से सुरक्षा की मांग

घटनाक्रम के बाद अख़बार ने पंजाब के राज्यपाल को पत्र लिखकर सुरक्षा और हस्तक्षेप की अपील की है। पत्र में कहा गया है कि इस तरह की कार्रवाइयाँ लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को कमजोर करती हैं।

इमरजेंसी  काल से तुलना

अख़बार ने मौजूदा हालात की तुलना 1975–77 की इमरजेंसी से की है, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के दौर में इंडियन एक्सप्रेस जैसे अख़बारों पर छापे और सेंसरशिप के आरोप लगे थे।

सरकारी पक्ष और राजनीतिक प्रतिक्रिया

हालांकि, पंजाब पुलिस की ओर से अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि यह कार्रवाई ‘रूटीन निरीक्षण’ का हिस्सा थी, लेकिन अख़बार ने इस दावे को सिरे से खारिज किया है।

विपक्षी दलों और मीडिया अधिकार संगठनों ने इस कदम की निंदा करते हुए निष्पक्ष जाँंच की मांग की है। वहीं, पंजाब में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी की ओर से अब तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

कृपया इस पोस्ट को साझा करें!
Leave A Reply

Your email address will not be published.