संविधान सदन से प्रधान मंत्री मोदी, भारत का लोकतंत्र जीवंत और सक्षम

28वें CSPOC का उद्घाटन: पीएम मोदी बोले— भारतीय लोकतंत्र ने विविधता को बनाया अपनी सबसे बड़ी शक्ति

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  • नई दिल्ली में 28वीं कॉमनवेल्थ स्पीकर्स एंड प्रेसिडिंग ऑफिसर्स कॉन्फ्रेंस का शुभारंभ
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संविधान सदन के सेंट्रल हॉल में किया उद्घाटन
  • महिला नेतृत्व, विशाल चुनाव प्रक्रिया और लोकतांत्रिक परंपराओं पर दिया विशेष जोर
  • 42 देशों के स्पीकर्स व प्रेसिडिंग ऑफिसर्स सम्मेलन में हुए शामिल

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली |15 जनवरी: नई दिल्ली स्थित संविधान सदन के सेंट्रल हॉल में गुरुवार को 28वीं कॉमनवेल्थ स्पीकर्स एंड प्रेसिडिंग ऑफिसर्स कॉन्फ्रेंस (CSPOC), 2026 का शुभारंभ हुआ। सम्मेलन का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया। इस अवसर पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह उपस्थित रहे।

महिलाओं की बढ़ती भूमिका का उल्लेख

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि आज भारत में सर्वोच्च संवैधानिक पद पर एक महिला राष्ट्रपति हैं और देश की राजधानी की कमान भी महिला मुख्यमंत्री के हाथों में है। उन्होंने कहा कि यह भारतीय लोकतंत्र की परिपक्वता को दर्शाता है, जहाँ महिलाएँ केवल भागीदार नहीं बल्कि नेतृत्वकर्ता की भूमिका निभा रही हैं।

लोकतंत्र का विशाल पैमाना

प्रधानमंत्री ने 2024 के आम चुनावों को लोकतंत्र का ऐतिहासिक उदाहरण बताते हुए कहा कि करीब 98 करोड़ मतदाताओं का पंजीकरण इस बात का प्रमाण है कि भारत में जनभागीदारी कितनी व्यापक है। हजारों उम्मीदवारों और सैकड़ों राजनीतिक दलों की भागीदारी के साथ महिलाओं के मतदान में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखी गई।

संविधान सदन से जुड़ा इतिहास

पीएम मोदी ने कहा कि सेंट्रल हॉल केवल एक भवन नहीं, बल्कि भारत की लोकतांत्रिक चेतना का प्रतीक है। स्वतंत्रता से पहले इसी स्थान पर संविधान सभा की बैठकें हुईं और आज़ादी के बाद दशकों तक यहीं से देश की दिशा तय करने वाले निर्णय लिए गए। अब इसे ‘संविधान सदन’ के रूप में लोकतंत्र को समर्पित किया गया है।

कॉमनवेल्थ देशों के साथ साझा दायित्व

प्रधानमंत्री ने कहा कि कॉमनवेल्थ की कुल जनसंख्या का लगभग आधा हिस्सा भारत में रहता है, इसलिए भारत की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। उन्होंने स्वास्थ्य, जलवायु परिवर्तन, आर्थिक विकास और नवाचार जैसे क्षेत्रों में भारत की सक्रिय भागीदारी का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत अपने अनुभवों से अन्य देशों को भी लाभ पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है।

स्पीकरों की भूमिका पर विचार

पीएम मोदी ने कहा कि संसदीय व्यवस्था में स्पीकर की भूमिका संतुलन और धैर्य की मिसाल होती है। उनका कर्तव्य है कि वे सभी सदस्यों को समान अवसर दें और सदन की गरिमा बनाए रखें। उन्होंने बताया कि यह चौथी बार है जब CSPOC का आयोजन भारत में हो रहा है और इस बार सम्मेलन का विषय “संसदीय लोकतंत्र की प्रभावी कार्यान्वयन प्रक्रिया” रखा गया है।

लोकतंत्र और विकास का संबंध

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने यह सिद्ध किया है कि लोकतंत्र विकास में बाधा नहीं, बल्कि गति और स्थिरता प्रदान करता है। विविधताओं के बावजूद भारत ने संस्थागत मजबूती के जरिए आर्थिक प्रगति, डिजिटल भुगतान प्रणाली और वैश्विक उत्पादन में महत्वपूर्ण स्थान हासिल किया है।

जनहित की नीतियों से सशक्त लोकतंत्र: ओम बिरला

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि भारत में लोकतंत्र को जन-केंद्रित नीतियों और कल्याणकारी कानूनों के माध्यम से निरंतर मजबूत किया गया है। उन्होंने बताया कि संसद के प्रयासों से सैकड़ों पुराने और अप्रासंगिक कानून हटाए गए, जिससे शासन अधिक प्रभावी और पारदर्शी बना है।

संवाद और असहमति की परंपरा पर जोर

राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने कहा कि भारतीय संसदीय परंपरा संवाद, बहस और असहमति को सम्मान देने पर आधारित है। उन्होंने ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना का उल्लेख करते हुए कहा कि यह सम्मेलन वैश्विक चुनौतियों पर सामूहिक सोच विकसित करने का मंच है।

42 देशों के प्रतिनिधि शामिल

सम्मेलन की अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला कर रहे हैं। इसमें 42 कॉमनवेल्थ देशों के 61 स्पीकर्स और प्रेसिडिंग ऑफिसर्स सहित चार अर्ध-स्वायत्त संसदों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। यह सम्मेलन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संसदीय सहयोग को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है।

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