ऑर्बिट में तैनात नहीं हो सका ‘अन्वेषा’ सैटेलाइट, तीसरे चरण में आई तकनीकी दिक्कत

दिशा परिवर्तन के कारण ऑर्बिट में स्थापित नहीं हो पाया ‘अन्वेषा’

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  • तीसरे चरण में तकनीकी समस्या और दिशा में परिवर्तन की पुष्टि
  • पीएसएलवी-सी62 से ‘अन्वेषा’ सहित 16 उपग्रह भेजे गए थे
  • मिशन के आंकड़ों का विश्लेषण जारी, अगला अपडेट बाद में
  • निगरानी क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से तैयार किया गया था ‘अन्वेषा’

समग्र समाचार सेवा
दिनांक: 12 जनवरी: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन इसरो ने स्पष्ट किया है कि ‘अन्वेषा’ उपग्रह को कक्षा में स्थापित नहीं किया जा सका। संगठन प्रमुख के अनुसार प्रक्षेपण यान के तीसरे चरण में तकनीकी दिक्कत आई, जिससे दिशा में परिवर्तन हो गया और उपग्रह अपनी निर्धारित कक्षा तक नहीं पहुंच सका।

डेटा विश्लेषण जारी

इसरो ने बताया कि मिशन से जुड़े सभी तकनीकी आंकड़ों का विश्लेषण किया जा रहा है। जैसे ही विस्तृत निष्कर्ष सामने आएंगे, उन्हें सार्वजनिक किया जाएगा। संगठन ने यह भी कहा कि प्रक्षेपण से जुड़े अन्य घटकों का प्रदर्शन सामान्य रहा।

पीएसएलवी-सी62 से भेजे गए उपग्रह

260 टन वजनी PSLV-C62 प्रक्षेपण यान के माध्यम से ‘अन्वेषा’ के साथ 15 अन्य सह-उपग्रह भेजे गए थे। यह मिशन इस वर्ष का पहला प्रमुख प्रक्षेपण था, जिसका उद्देश्य पृथ्वी अवलोकन और विविध अनुप्रयोगों के लिए उपग्रहों को कक्षा में स्थापित करना था।

व्यावसायिक सहयोग और उद्देश्य

यह मिशन इसरो की व्यावसायिक इकाई न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड के लिए भी महत्वपूर्ण था, जिसके अंतर्गत 14 घरेलू और विदेशी उपग्रहों को कक्षा में स्थापित किया जाना था।

‘अन्वेषा’ की भूमिका

‘अन्वेषा’ उपग्रह को भारत की निगरानी क्षमताओं को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से विकसित किया गया था। इससे सीमावर्ती गतिविधियों और रणनीतिक क्षेत्रों की निगरानी में सहायता मिलने की उम्मीद थी।

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