इसरो ने पीएसएलवी-सी62 से 16 उपग्रह किए प्रक्षेपित

अंतरिक्ष में भारत की बड़ी उपलब्धि, 16 उपग्रहों का सफल प्रक्षेपण

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  • 260 टन वजनी पीएसएलवी-सी62 रॉकेट से कुल 16 उपग्रह प्रक्षेपित
  • अन्वेषा उपग्रह से सुरक्षा, निगरानी और पृथ्वी अवलोकन को बढ़ावा
  • मिशन में 14 सह-उपग्रह, देशी और विदेशी उपग्रह शामिल
  • इसरो की वाणिज्यिक इकाई के माध्यम से किया गया सफल प्रक्षेपण

समग्र समाचार सेवा
श्रीहरिकोटा, 12 जनवरी: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन इसरो ने अंतरिक्ष क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए 260 टन वजनी पीएसएलवी-सी62 रॉकेट से 16 उपग्रहों का सफल प्रक्षेपण किया। इस मिशन में प्रमुख पृथ्वी अवलोकन उपग्रह अन्वेषा के साथ 14 अन्य सह-उपग्रहों को निर्धारित कक्षाओं में सफलतापूर्वक स्थापित किया गया।

वर्ष 2026 का पहला मिशन, सभी चरण रहे सफल

यह मिशन इसरो का वर्ष 2026 का पहला प्रक्षेपण मिशन था। प्रक्षेपण के बाद रॉकेट के सभी चरण पूरी तरह सफल रहे और एक-एक कर सभी उपग्रहों को तय समय और सटीक ऊँचाई पर उनकी कक्षाओं में स्थापित किया गया। मिशन के दौरान किसी भी प्रकार की तकनीकी समस्या सामने नहीं आई, जिससे इसरो की विश्वसनीयता एक बार फिर सिद्ध हुई।

अन्वेषा उपग्रह की खासियत और उपयोग

अन्वेषा एक उन्नत पृथ्वी अवलोकन उपग्रह है, जिसे उच्च गुणवत्ता वाली तस्वीरें और सूचनाएं भेजने के लिए तैयार किया गया है। इसकी मदद से सीमावर्ती क्षेत्रों की निगरानी, दुश्मन गतिविधियों पर नजर, सामरिक ठिकानों की पहचान, प्राकृतिक संसाधनों का आकलन और आपदा प्रबंधन से जुड़ी जानकारी प्राप्त की जा सकेगी। रक्षा और सुरक्षा के लिहाज से इस उपग्रह को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

देशी और विदेशी सह-उपग्रह भी हुए स्थापित

इस मिशन के अंतर्गत अन्वेषा के अलावा 14 अन्य सह-उपग्रह भी प्रक्षेपित किए गए। इनमें भारत के साथ-साथ अन्य देशों के उपग्रह भी शामिल हैं। ये उपग्रह संचार, शोध, प्रौद्योगिकी परीक्षण और पृथ्वी अवलोकन जैसे विभिन्न उद्देश्यों के लिए उपयोग में लाए जाएंगे।

वाणिज्यिक प्रक्षेपण से बढ़ी भारत की अंतरराष्ट्रीय साख

यह पूरा मिशन इसरो की वाणिज्यिक इकाई न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड के माध्यम से किया गया। इसके जरिए एक बार फिर यह साबित हुआ कि भारत कम लागत और उच्च सफलता दर के साथ विश्व के भरोसेमंद अंतरिक्ष प्रक्षेपण देशों में शामिल है। विदेशी उपग्रहों की भागीदारी से वैश्विक स्तर पर इसरो की तकनीकी क्षमता और विश्वसनीयता और मजबूत हुई है।

अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की बढ़ती ताकत

पीएसएलवी-सी62 मिशन की सफलता के साथ भारत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह न केवल वैज्ञानिक अनुसंधान बल्कि सुरक्षा, निगरानी और वाणिज्यिक प्रक्षेपण के क्षेत्र में भी लगातार आगे बढ़ रहा है। आने वाले समय में ऐसे मिशन देश की रणनीतिक और तकनीकी क्षमता को नई ऊँचाइयों तक ले जाएंगे।

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