समग्र समाचार सेवा
मथुरा (उत्तर प्रदेश) 10 जनवरी :भारतीय संस्कृति, गौ-संरक्षण और सामाजिक चेतना को समर्पित प्रेरणादायक फ़ीचर फ़िल्म “गौदान” का भव्य प्रस्तुतीकरण दीनदयाल कामधेनु गौशाला समिति, दीनदयाल धाम, फरह, मथुरा (उत्तर प्रदेश) के संरक्षण में किया गया है। यह फ़िल्म पंचगव्य से पंच परिवर्तन—स्वास्थ्य, संस्कार, समृद्धि, समरसता एवं पर्यावरण—के उद्देश्य को केंद्र में रखकर निर्मित की गई है।
फ़िल्म “गौदान” गोरक्षा, गौसंवर्धन तथा भारतीय संस्कृति और परंपराओं पर आधारित एक सशक्त सिनेमाई प्रयास है, जो समाज में गौमाता के महत्व और भारतीय जीवन मूल्यों को नई दृष्टि से प्रस्तुत करती है। यह फ़िल्म वैज्ञानिक एवं आध्यात्मिक दृष्टिकोण के साथ आधुनिकता और परंपरा का अद्भुत समन्वय स्थापित करती है।
इस ऐतिहासिक अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के माननीय सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी की गरिमामयी उपस्थिति तथा उनके साथ मंच पर विराजमान संत-महात्मा, धर्माचार्य, समाजसेवी, गौसेवक एवं विशिष्ट अतिथियों का मार्गदर्शन एवं आशीर्वाद इस सांस्कृतिक अभियान को और अधिक सार्थक बनाता है। सभी ने एक स्वर में गौ-संरक्षण और भारतीय संस्कृति के संरक्षण के लिए इस प्रकार के प्रयासों को समय की आवश्यकता बताया।
फ़िल्म का निर्माण कामधेनु इंटरनेशनल प्रोडक्शन एलएलपी, मेरठ (उत्तर प्रदेश) द्वारा किया गया है। इसकी शूटिंग उत्तर प्रदेश के नोएडा और मथुरा तथा उत्तराखंड के देहरादून में की गई है। यह फ़िल्म 6 फ़रवरी 2026 को देशभर के सिनेमाघरों में भव्य रूप से प्रदर्शित की जाएगी।
“गौदान” की एक विशेष और उल्लेखनीय विशेषता यह है कि यह फ़िल्म पूर्णतः धर्मार्थ उद्देश्य से निर्मित की गई है। फ़िल्म के प्रदर्शन से प्राप्त होने वाली संपूर्ण आय दीनदयाल कामधेनु गौशाला समिति, फरह, मथुरा के गौसेवा एवं गौकल्याण के कार्यों को समर्पित की जाएगी। यह पहल सिनेमा को सामाजिक सेवा से जोड़ने का एक उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करती है।
फ़िल्म के माध्यम से दर्शकों को यह संदेश देने का प्रयास किया गया है कि गौमाता केवल आस्था का विषय नहीं, बल्कि भारतीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था, पर्यावरण संरक्षण और स्वस्थ जीवनशैली का आधार हैं। “गौदान” समाज में सांस्कृतिक चेतना को जागृत करने और गौ-संरक्षण को एक जनआंदोलन का स्वरूप देने की दिशा में एक सशक्त माध्यम बनेगी।
निर्माताओं का कहना है कि “गौदान” केवल एक फ़िल्म नहीं, बल्कि गौमाता, ग्राम और भारतीय संस्कृति के संरक्षण का एक व्यापक सामाजिक अभियान है। यह फ़िल्म युवाओं, किसानों और आम नागरिकों को अपनी जड़ों से जुड़ने तथा भारतीय मूल्यों को अपनाने के लिए प्रेरित करेगी।
कुल मिलाकर, “गौदान” भारतीय सिनेमा में एक सार्थक, संवेदनशील और सामाजिक सरोकारों से जुड़ा प्रयास है, जो मनोरंजन के साथ-साथ समाज को जागरूक करने का महत्वपूर्ण कार्य करेगा।