पाकिस्तानी नागरिकता छिपाकर बनी सरकारी टीचर, 30 साल बाद खुला राज
पाकिस्तानी पासपोर्ट पर भारत लौटी महिला, भारतीय दस्तावेजों से बनी टीचर
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पाकिस्तानी नागरिकता हासिल करने के बाद भी भारतीय दस्तावेजों से नौकरी
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बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षिका रहते हुए 30 साल तक नहीं खुला मामला
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विभागीय जाँच में सामने आई सच्चाई, निलंबन के बाद बर्खास्तगी
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पुलिस ने धोखाधड़ी व कूट रचना की धाराओं में एफआईआर दर्ज की
समग्र समाचार सेवा
रामपुर (उत्तर प्रदेश),07जनवरी: उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले में पाकिस्तानी नागरिकता छिपाकर सरकारी नौकरी करने का गंभीर मामला सामने आया है।
यहाँ एक महिला ने अपनी पुरानी भारतीय पहचान के दस्तावेजों के आधार पर बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षिका की नौकरी हासिल की और करीब तीन दशक तक सेवा में बनी रही। मामले के उजागर होने के बाद विभागीय कार्रवाई के साथ अब पुलिस ने भी एफआईआर दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है।
1979 में पाकिस्तानी नागरिक बनी महिला
जानकारी के अनुसार, महिला की पहचान माहिरा अख्तर उर्फ फरजाना के रूप में हुई है। वर्ष 1979 में उसने एक पाकिस्तानी नागरिक से विवाह किया, जिसके बाद वह पाकिस्तानी नागरिक बन गई। बाद में तलाक होने पर वह पाकिस्तानी पासपोर्ट पर भारत लौटी और फरजाना नाम से रामपुर में रहने लगी।
भारतीय दस्तावेजों से मिली सरकारी नौकरी
1985 में महिला ने रामपुर में दूसरी शादी की। इसके बाद उसने अपनी पुरानी भारतीय नागरिकता से जुड़े दस्तावेजों का इस्तेमाल करते हुए बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षिका की नौकरी प्राप्त कर ली। रामपुर में ही उसकी पढ़ाई और बीटीसी प्रशिक्षण हुआ। वर्ष 1991 में तत्कालीन जिलाधिकारी द्वारा जारी निवास प्रमाण पत्र के आधार पर वह लंबे समय तक सरकारी सेवा में बनी रही।
विभागीय जाँच में हुआ खुलासा
मामला तब सामने आया जब विभागीय जाँच में यह स्पष्ट हुआ कि नौकरी के समय वह पहले ही पाकिस्तानी नागरिक बन चुकी थी। जाँच रिपोर्ट के आधार पर बेसिक शिक्षा विभाग ने पहले महिला को निलंबित किया और फिर सेवा से बर्खास्त कर दिया।
एफआईआर दर्ज, जाँच जारी
अपर पुलिस अधीक्षक रामपुर अनुराग सिंह के अनुसार, थाना अजीमनगर क्षेत्र के ग्राम कमरिया स्थित प्राथमिक विद्यालय में तैनात रही शिक्षिका के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराएं 318(4), 336, 338 और 340 के तहत धोखाधड़ी और कूट रचना का मामला दर्ज किया गया है। आरोप है कि पाकिस्तानी नागरिक होने के बावजूद उसने फर्जी निवास प्रमाण पत्र के जरिए सरकारी नौकरी हासिल की।
पुलिस का कहना है कि फिलहाल साक्ष्य संकलन की प्रक्रिया जारी है और विभागीय दस्तावेजों व गवाहों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी।