नेहरू के नेशनल हेराल्ड अख़बार पर क्या है विवाद, कांग्रेस पर क्यों आरोप लगे

एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड, यंग इंडिया और प्रवर्तन निदेशालय की जांच ने कैसे राजनीतिक विवाद को दिया नया मोड़

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  • नेशनल हेराल्ड अखबार से जुड़ी कंपनी AJL के अधिग्रहण को लेकर विवाद
  • सोनिया गांधी और राहुल गांधी यंग इंडिया कंपनी से जुड़े
  • ईडी मनी लॉन्ड्रिंग एंगल से कर रही है जांच
  • कांग्रेस का आरोप, मामला राजनीतिक बदले की कार्रवाई

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली | 17 दिसंबर: नेशनल हेराल्ड मामले में अदालत द्वारा प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की चार्जशीट पर संज्ञान लेने से इनकार किए जाने के बाद यह विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है। यह मामला बीते एक दशक से भारतीय राजनीति और न्यायिक प्रक्रिया के केंद्र में बना हुआ है। एक ओर जहाँ सरकार इसे वित्तीय अनियमितता और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा मामला बता रही है, वहीं कांग्रेस पार्टी इसे राजनीतिक प्रतिशोध की कार्रवाई करार दे रही है।

यह विवाद मूल रूप से नेशनल हेराल्ड अखबार और उससे जुड़ी कंपनी एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) के स्वामित्व, नियंत्रण और संपत्तियों से जुड़ा है।

नेशनल हेराल्ड अखबार की पृष्ठभूमि

नेशनल हेराल्ड अखबार की स्थापना वर्ष 1938 में देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने की थी। स्वतंत्रता आंदोलन के दौर में यह अखबार कांग्रेस की विचारधारा और राजनीतिक सोच का प्रमुख मंच माना जाता था।
AJL के अंतर्गत नेशनल हेराल्ड (अंग्रेज़ी) के अलावा नवजीवन (हिंदी) और कौमी आवाज (उर्दू) जैसे अखबार भी प्रकाशित होते थे।

समय के साथ अखबार की आर्थिक स्थिति कमजोर होती चली गई और अंततः वर्ष 2008 में इसका प्रकाशन बंद कर दिया गया।

एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) और कर्ज का मामला

कांग्रेस पार्टी द्वारा AJL को लगभग 90 करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज दिए जाने का दावा किया गया है। पार्टी का कहना रहा है कि यह राशि अखबार को संचालन में बनाए रखने के उद्देश्य से दी गई थी।बाद में इस कर्ज को एक नई कंपनी में ट्रांसफर किया गया, जिसके बाद पूरे मामले ने विवाद का रूप ले लिया।

यंग इंडिया कंपनी की एंट्री

वर्ष 2010 में यंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी बनाई गई। इस कंपनी में सोनिया गांधी और राहुल गांधी की 38-38 प्रतिशत हिस्सेदारी बताई गई, जबकि शेष हिस्सेदारी अन्य कांग्रेस नेताओं के पास रही।

आरोप है कि यंग इंडिया ने मात्र 50 लाख रुपये में AJL का लगभग पूरा नियंत्रण हासिल कर लिया, जबकि AJL के पास देश के कई बड़े शहरों में हजारों करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियां मौजूद थीं।

आरोप क्या हैं?

नेशनल हेराल्ड केस में आरोप लगाया गया है कि—

  • कांग्रेस द्वारा AJL को दिया गया कर्ज गलत तरीके से ट्रांसफर किया गया
  • यंग इंडिया के माध्यम से AJL की बहुमूल्य संपत्तियों पर नियंत्रण हासिल किया गया
  • पूरा लेन-देन योजनाबद्ध और व्यावसायिक नियमों के विपरीत था
  • निजी कंपनी को संपत्तियों का अप्रत्यक्ष लाभ पहुंचाया गया

इन्हीं आरोपों के आधार पर मामले को धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग से जोड़ा गया।

प्रवर्तन निदेशालय (ED) की भूमिका

प्रवर्तन निदेशालय इस पूरे मामले की जांच मनी लॉन्ड्रिंग कानून के तहत कर रहा है। ईडी का दावा है कि—

  • संपत्तियों से जुड़े लेन-देन में आपराधिक आय शामिल है
  • यंग इंडिया के जरिए नियंत्रण पाने का उद्देश्य वित्तीय लाभ था
  • इस प्रक्रिया में कानूनों का उल्लंघन हुआ

ईडी ने इस मामले में सोनिया गांधी और राहुल गांधी से कई बार पूछताछ की है और संबंधित संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क भी किया गया है।

कांग्रेस का पक्ष क्या है?

कांग्रेस पार्टी ने नेशनल हेराल्ड केस को पूरी तरह निराधार बताया है। पार्टी का कहना है कि—

  • यंग इंडिया एक गैर-लाभकारी कंपनी है
  • किसी भी संपत्ति से निजी लाभ नहीं कमाया गया
  • यह मामला राजनीतिक दबाव बनाने के लिए उठाया गया है
  • जांच एजेंसियों का दुरुपयोग किया जा रहा है

कांग्रेस का तर्क है कि जब कोई आर्थिक लाभ ही नहीं लिया गया, तो मनी लॉन्ड्रिंग का सवाल नहीं उठता।

अदालतों में मामला कहां तक पहुंचा?

यह मामला दिल्ली की निचली अदालतों से लेकर उच्च न्यायालय तक पहुंच चुका है। अदालतों ने अब तक जांच पर रोक नहीं लगाई है, लेकिन अंतिम रूप से दोष या निर्दोष होने पर कोई फैसला भी नहीं सुनाया गया है। मामला फिलहाल न्यायिक प्रक्रिया में लंबित है।

राजनीतिक असर

नेशनल हेराल्ड मामला कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक टकराव का एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है। भाजपा इसे भ्रष्टाचार का उदाहरण बताती है, जबकि कांग्रेस इसे लोकतंत्र और विपक्ष को दबाने की कोशिश करार देती है। चुनावी समय में यह मामला अक्सर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ जाता है।

नेशनल हेराल्ड मामले में पहली बार कब दर्ज हुआ केस?

  • वर्ष 2012 में भाजपा नेता डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी ने दिल्ली की एक निचली अदालत में AJL और यंग इंडिया से जुड़ा निजी आपराधिक मामला दायर किया
  • इसमें कांग्रेस नेताओं पर धोखाधड़ी और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाए गए
  • वर्ष 2014 में दिल्ली की अदालत ने मामले में संज्ञान लिया
  • इसके बाद प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग एंगल से जांच शुरू की
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