झंडेवालान में एमसीडी का बुलडोजर अभियान, कार्रवाई पर भड़के स्थानीय लोग
बिना पूर्व सूचना तोड़फोड़ का आरोप, हालात बिगड़ते ही पुलिस ने कई लोगों को पकड़ा
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झंडेवालान मंदिर क्षेत्र में एमसीडी–डीडीए की संयुक्त अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई
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निवासियों ने कहा, बिना नोटिस ढांचों पर बुलडोजर चलाया गया
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प्रदर्शन तेज होने पर पुलिस ने बल बढ़ाया, कई लोग हिरासत में
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लोगों ने 1100 साल पुराने धार्मिक स्थल के प्रभावित होने की आशंका जताई
समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 30 नवंबर: दिल्ली के झंडेवालान क्षेत्र में रविवार को एमसीडी और डीडीए की संयुक्त टीम ने बड़े पैमाने पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की। जैसे ही भारी मशीनरी इलाके में पहुँची और बुलडोजर चलना शुरू हुआ, स्थानीय लोगों में नाराज़गी फैल गई। प्रशासन की इस कार्रवाई के विरोध में कई लोग अचानक सड़क पर उतर आए और पूरी प्रक्रिया को रोकने की कोशिश की।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि एमसीडी ने किसी भी प्रकार का नोटिस जारी नहीं किया, न ही उन्हें यह बताया गया कि किस आधार पर यह अभियान चलाया जा रहा है। लोगों ने यह भी कहा कि उनके घर, दुकानें और पुराने ढांचे बिना किसी चेतावनी के निशाने पर ले लिए गए, जबकि वे दशकों से यहां रह रहे हैं।
कई निवासियों ने दावा किया कि जिस क्षेत्र में कार्रवाई हुई है, वहां पीर रतन नाथ जी का एक पुराना धार्मिक स्थल है, जिसे वे लगभग 1100 वर्षों से जुड़ा बताते हैं। स्थानीय लोगों ने चिंता जताई कि अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया के दौरान मंदिर परिसर या उससे सटे हिस्सों को नुकसान पहुँच सकता है। कुछ लोग यह तक कह रहे थे कि उन्हें अभी यह भी पता नहीं है कि मंदिर सुरक्षित है या प्रभावित हो गया है, क्योंकि पूरी कार्रवाई पुलिस और बैरिकेड्स के बीच हुई।
विरोध बढ़ने के साथ ही तनाव की स्थिति बन गई। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने पूरे इलाके में अतिरिक्त बल तैनात किया। कई प्रदर्शनकारी कार्रवाई के बिल्कुल सामने बैठ गए और बुलडोजर रोकने की कोशिश करते रहे। पुलिस और स्थानीय निवासियों के बीच बहस, नोकझोंक और हल्की धक्का-मुक्की की घटनाएँ भी सामने आईं।
स्थिति बिगड़ते देख पुलिस ने कुछ प्रदर्शनकारियों को मौके से हटाकर हिरासत में लिया। अधिकारियों के अनुसार यह कदम इसलिए उठाया गया ताकि स्थिति नियंत्रण से बाहर न जाए और किसी प्रकार की हिंसा न भड़के।
दूसरी ओर, एमसीडी के सूत्रों का कहना है कि यह अभियान नियमित अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया का हिस्सा था और जिन हिस्सों पर कार्रवाई की गई, उन्हें पहले से अतिक्रमण के रूप में चिह्नित किया गया था। हालांकि, स्थानीय लोग इस दावे को मानने से इनकार कर रहे हैं और कहते हैं कि बिना नाप-जोख, बिना नोटिस और बिना सूचना के बुलडोजर चलाना “मनमानी और अनुचित कार्रवाई” है।
पूरा इलाक़ा इस समय सुरक्षा की दृष्टि से घेराबंदी में है। पुलिस लगातार हालात की निगरानी कर रही है ताकि कोई असामान्य स्थिति न पैदा हो। स्थानीय निवासियों और प्रशासन के बीच बातचीत की कोशिशें जारी हैं, लेकिन लोगों में गुस्सा और चिंता दोनों बरकरार हैं, खासकर इस बात को लेकर कि पुराने धार्मिक स्थल और आसपास की संरचनाओं का क्या नुकसान हुआ है।
फिलहाल, झंडेवालान में माहौल तनावपूर्ण है और प्रशासन कार्रवाई को सही ठहराते हुए आगे की स्थिति पर नज़र बनाए हुए है।